जड़ी बूटी, आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी दवाओं के बारे में हिंदी में जानें

जड़ी बूटियों के नाम

प्राचीन काल से ही जड़ी बूटियों का प्रयोग आयुर्वेद और अन्य चिकित्सा प्रणालियों में स्वास्थ्य लाभ के किया जाता रहा हैं। उनमें से हम कुछ विशेष जड़ी बूटियों के नाम की सूची यहाँ दे रहे हैं। जड़ी बूटियों के नामों की सूची जड़ी बूटियों के नाम की सूची हिंदी में निम्नलिखित हैं: अगरु अगस्त्य अग्निमन्थ अजमोदा अतसी अतिबला अतिविषा अध:पुष्पी अनानास अन्नामय…
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सदा स्वस्थ कैसे रहे

सुबह गर्म पानी पीना चाहिए (कम से कम एक गिलास पानी जरूर पिए)। धीरे-धीरे और घूंट घूंट भर पानी पीना चाहिए। पानी पीने में जल्दबाजी न करें। भोजन से 40-45 मिनट पहले एक गिलास पानी पीएं। खाना पकाने के बाद 40 मिनट के भीतर भोजन खाएं। खाना चबा चबा कर खाना चाहिए। (भोजन को 32 बार चबाने से लार के साथ भोजन ठीक से मिश्रित हो जाता है और पाचन के लिए हितकारी है।)…
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उलट कम्बल

उलट कम्बल गर्भाशय संबंधी विकारो की रोकथाम के लिए उपयुक्त औषधि हैं। इसके अलावा इसका सेवन करने से गठिया, गठिये में होने वाले दर्द, कष्टार्तव, मधुमेह जैसी समस्याओं में फायदा होता हैं। उलट कम्बल से साइनसाइटिस से होने वाले सिरदर्द से भी राहत मिलती हैं। औषधीय भाग जड़ और जड़ की छाल उलट कम्बल (एब्रोमा ऑगस्टा) का महत्वपूर्ण औषधीय भाग हैं। इसकी जड़ों का प्रयोग…
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दशमूल क्वाथ या दशमूल काढ़ा

दशमूल क्वाथ (दशमूल काढ़ा) एक आयुर्वेदिक औषधि है जो वातरोग के लिए प्रयोग की जाती है। इसका प्रभाव तंत्रिकाओं, मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों पर पड़ता है। इन अंगों के लिए यह एक प्रकार की उत्तम दवा है। इन अंगों से संबंधित रोगों में यह बहुत लाभदायक सिद्ध हुई है। दशमूल क्वाथ दर्द निवारक और शोथहर है। यह अस्थिसंधिशोथ, गठिया, घुटने के दर्द, पीठ दर्द आदि में…
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हमें रात को दही क्यों नहीं खाना चाहिए?

आयुर्वेद अनुसार दही रात्रि को नहीं खाना चाहिए क्योंकि यह कफ वर्धक आहार हैं। रात को दही खाने से शरीर में कफ दोष की वृद्धि होती है जिस से छाती में बलगम बनती है और जुखाम, सर्दी और श्वास संबंधी रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है। रात को वैसे ही शरीर में कफ दोष की प्रबलता रहती है जो दही खाने से और अधिक बढ़ जाती है। इसीलिए रात्रि को हल्का भोजन खाने की…
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कांकायन वटी (कांकायन गुटिका)

कांकायन वटी (Kankayan Vati या Kankayan Gutika) बादी बवासीर के लिए एक सर्वोत्तम आयुर्वेदिक दवा है। यह बवासीर के मस्से के आकार को कम कर देती है और कब्ज को राहत देता है। इस औषधि के उपयोग से मस्से सूख जाते हैं और बवासीर में होने वाली कब्ज के कारण मल त्याग में जो तकलीफ होती है, वो भी दूर हो जाती है। बवासीर के साथ साथ अग्निमांद्य और पाण्डु रोग में भी लाभ…
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अर्शोघ्नी वटी (Arshoghni Vati)

अर्शोघ्नी वटी (Arshoghni Vati) बवासीर एक सामान्य आयुर्वेदिक दवा है।  यह औषधि दोनों प्रकार की बवासीर (खूनी और बादी) के लिए बहुत अच्छी दवा है। हालांकि खूनी बवासीर के उपचार के लिए यह ज्यादा में फायदेमंद है। इसके प्रयोग से 1 से 3 दिनों में रक्तस्राव बंद हो जाता है। यदि इस वटी का सेवन नियमित रूप से किया जाए तो बवासीर जड़ से नष्ट हो जाता है और बादी के बढ़े…
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अग्निवर्द्धक बटी (Agni Vardhak Vati)

अग्निवर्द्धक वटी (Agni Vardhak Vati) पाचक अग्नि की वृद्धि करती है और भूख लगाती है। यह उन रोगियों के लिए लाभदायक है जिन को भूख नहीं लगती या पाचक रसों का उचित स्राव नहीं होता। पाचक रसों का उचित स्राव न होने से रोगी को खाना खाने के बाद पेट में भारीपन रहता है और डकार आते रहते है। यह उन रोगियों के लिए तो अमृत के समान काम करती है। इसके अलावा यह खुलकर…
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मुँहासे (Acne) के लक्षण, कारण, जाँच और निदान

किसी की त्वचा में मुँहासों की स्थिति तब बनती है जब त्वचा के रोम छिद्रों में तेल और मृत कोशिकाऐं जम जाती हैं। आम तौर पर यह देखा गया है कि मुँहासे चेहरे, गर्दन, छाती, पीठ और कंधे पर होते हैं। मुँहासों का उपचार करने के बाद भी यह लगातार होते रहते हैं। इनके उपचार की गति बहुत धीमी होती है, और उपचार किये गए स्थान के अलावा दूसरी जगह भी नए मुँहासे पनपने…
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अमृतारिष्ट के घटक द्रव्य, प्रयोग एवं लाभ, मात्रा और सेवन विधि

अमृतारिष्ट (Amritarishta or Amrutharishtam) जीर्ण ज्वर की एक महत्वपूर्ण औषधि है। यह टाइफाइड बुखार के जीर्ण होने पर इसका प्रयोग कारण उत्तम होता है और ज्वर को दूर करने में अत्यन्त सहायक सिद्ध होता है। यह रोगी की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है और कई तरह के संक्रमण रोगों से बचाता है। आम तौर पर, इसका प्रयोग बुखार के बाद होने वाली दुर्बलता में किया…
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