कांकायन वटी (कांकायन गुटिका)

कांकायन वटी (Kankayan Vati या Kankayan Gutika) बादी बवासीर के लिए एक सर्वोत्तम आयुर्वेदिक दवा है। यह बवासीर के मस्से के आकार को कम कर देती है और कब्ज को राहत देता है। इस औषधि के उपयोग से मस्से सूख जाते हैं और बवासीर में होने वाली कब्ज के कारण मल त्याग में जो तकलीफ होती है, वो भी दूर हो जाती है। बवासीर के साथ साथ अग्निमांद्य और पाण्डु रोग में भी लाभ…
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अर्शोघ्नी वटी (Arshoghni Vati)

अर्शोघ्नी वटी (Arshoghni Vati) बवासीर एक सामान्य आयुर्वेदिक दवा है।  यह औषधि दोनों प्रकार की बवासीर (खूनी और बादी) के लिए बहुत अच्छी दवा है। हालांकि खूनी बवासीर के उपचार के लिए यह ज्यादा में फायदेमंद है। इसके प्रयोग से 1 से 3 दिनों में रक्तस्राव बंद हो जाता है। यदि इस वटी का सेवन नियमित रूप से किया जाए तो बवासीर जड़ से नष्ट हो जाता है और बादी के बढ़े…
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अग्निवर्द्धक बटी (Agni Vardhak Vati)

अग्निवर्द्धक वटी (Agni Vardhak Vati) पाचक अग्नि की वृद्धि करती है और भूख लगाती है। यह उन रोगियों के लिए लाभदायक है जिन को भूख नहीं लगती या पाचक रसों का उचित स्राव नहीं होता। पाचक रसों का उचित स्राव न होने से रोगी को खाना खाने के बाद पेट में भारीपन रहता है और डकार आते रहते है। यह उन रोगियों के लिए तो अमृत के समान काम करती है। इसके अलावा यह खुलकर…
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मुँहासे (Acne) के लक्षण, कारण, जाँच और निदान

किसी की त्वचा में मुँहासों की स्थिति तब बनती है जब त्वचा के रोम छिद्रों में तेल और मृत कोशिकाऐं जम जाती हैं। आम तौर पर यह देखा गया है कि मुँहासे चेहरे, गर्दन, छाती, पीठ और कंधे पर होते हैं। मुँहासों का उपचार करने के बाद भी यह लगातार होते रहते हैं। इनके उपचार की गति बहुत धीमी होती है, और उपचार किये गए स्थान के अलावा दूसरी जगह भी नए मुँहासे पनपने…
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अमृतारिष्ट के घटक द्रव्य, प्रयोग एवं लाभ, मात्रा और सेवन विधि

अमृतारिष्ट (Amritarishta or Amrutharishtam) जीर्ण ज्वर की एक महत्वपूर्ण औषधि है। यह टाइफाइड बुखार के जीर्ण होने पर इसका प्रयोग कारण उत्तम होता है और ज्वर को दूर करने में अत्यन्त सहायक सिद्ध होता है। यह रोगी की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है और कई तरह के संक्रमण रोगों से बचाता है। आम तौर पर, इसका प्रयोग बुखार के बाद होने वाली दुर्बलता में किया…
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चंद्रप्रभा वटी

चंद्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati) को चंद्रप्रभा गुलिका और चंद्रप्रभा वाटिका भी कहा जाता है। यह एक अति उत्कृष्ट आयुर्वेदिक औषधि है जिसका प्रभाव गुर्दे, मूत्राशय, मूत्र पथ, अग्न्याशय, हड्डियों, जोड़ों और थायरॉयड ग्रंथि आदि अंगों पर पड़ता है। इसका प्रयोग इन अंगों से संबंधित रोगों के उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है। इसकी सिफारिश मधुमेह, पुरुषों की…
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गाजर का अर्क

गाजर का अर्क (Gajar Ka Ark – Carrot Distillate) गाजर, गावजवाँ,  गावजवाँ के फूल, सफ़ेद चन्दन, तोदरी लाल और बहमन सफ़ेद से बनाया जाता है। यह हृदय के लिये हितकारी है और दिल को बल प्रदान करता है। यह दिल की धड़कन की वृद्धि को कम करता है। शरीर को बल देता है और निर्बलता दूर करता है। यह भूख को बढ़ाता है और मूत्र को साफ करता है। यह श्वसन सम्बंधित विरकारों को दूर…
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किरातादि अर्क

किरातादि अर्क (Kiratadi Arq) का प्रयोग ज्वर (बुखार) के इलाज के लिए किया जाता है। यह बुखार कम करने अर्थात उतारने के काम आता है।  यह अर्क विषमज्वर, एक दिन के बाद आने वाला ज्वर, दो दिन के बाद आने वाला ज्वर, तीन दिन के बाद आने वाला ज्वर और चार दिन के बाद आने वाला ज्वर आदि में प्रयोग किया जाता है। इसको प्रवाल पिष्टी के साथ मिलकर दिया जाता है। यह दोनों…
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पेट सफा

पेट सफा (Pet Saffa) एक आयुर्वेदिक रेचक दवा है जो कब्ज के इलाज के लिए उपयोगी है। यह कब्ज के कारण होने वाली बीमारियों की रोकथाम के इलाज के लिए भी प्रयोग किया जाता है। आम तौर पर, बवासीर, सख्त मल, गुदा में दरार या परिकर्तिका (anal fissure), आदि कब्ज के कारण रोगों होने वाले रोग है। इन सब रोगों के उपचार के लिए पेट सफा उत्तम औषधि है। इसके इलाबा इस में…
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सौंफ के अद्भुत फायदे, प्रयोग, गुण-कर्म, सेवन विधि और दुष्प्रभाव के बारे में जानें

सौंफ एक बहुत सुगन्धित द्रव्य है और इसमें उड़नशील तेल पाया जाता है जो इसके औषधीय गुणों के लिए उत्तरदायी है। यह भोजन में एक विशिष्ट सुगंध लाता है जिस के कारण इसका अक्सर भारतीय खाना पकाने में इस्तेमाल किया जाता है। सौंफ़ बीज स्वाद में मधुर किंचित कटु और तिक्त है। इसमें कई पोषक तत्व, खनिज और विटामिन है जो स्वास्थ्य लाभदायक है। यह अपचन को दूर करती है और…
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