आयुर्वेद में आम एक महत्वपूर्ण कारक है। यह पोषण नाली, कोशिका और उत्तकों में कम पाचन अग्नि के कारण शरीर में पैदा होता है। आम शरीर की प्रणालियों को रोक सकता है, जिनसे कई बीमारियां होती । आम को विषाक्त कणों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो शरीर में कमजोर पाचन या चयापचय के कारण होता है।

आयुर्वेद के अनुसार, भोजन का उचित तरीके से पचना मानव शरीर में सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक है। इस मामले में, जो भोजन पूरी तरह और सही तरीके से नहीं पचता, उससे  एक विषैला अवशेष बनता है और उसे आमविष (विषैले तत्व) में परिवर्तित किया जा सकता है और इसे शरीर की कोशिकाओं में अच्छे से प्रवेश कराया जाता है। “आम और आमविशा”का संचय शरीर के लिए हानिकारक होता है।

आहार नली में आम का बनना

जब आहार नली में पाचन अग्नि कम होती है ,जिनमे पेट और आंतें भी शामिल है तो यह भोजन के कणों का अपर्याप्त और बहुत कम पचने को बढ़ावा देती है और कुछ भोजन के कण बिना पचे ही रह जाते हैं, जिन्हे आम कहा जाता है।

हालांकि, इस प्रकार की आम केवल पाचन बीमारियों जैसे कि अपच, भूख न लग्न, कुअवशोषण  आदि का परिणाम है। यह रक्त या लसीका में अवशोषित नहीं होता।

आम विष

जब आम आगे आहार नली में चयापचय करता है तो यह जहरीले पदार्थ पैदा करता है, जिसे आमविश कहते हैं।  आंते इस आमविश को रक्त या लसीका में अवशोषित कर सकते हैं। यह दोष, धातु और मल (व्यर्थ पर्दार्थ) के साथ मिक्स हो सकते हैं, जिससे कई रोग होने की संभावना रहती है।

धातुस (टिश्यू और सेल) में आम का बनना

कोशिकाएं और उत्तक आगे पोषक तत्वों (प्रमुख और मामूली पोषक तत्वों सहित) को अवशोषित करते है और उनका प्रयोग उनकी ऊर्जा की आवश्यकता, विकास और उन्नति के लिए करते है।

हर कोशिका और ऊतक में एक चयापचय शक्ति है, जिसे आयुर्वेद में धातु-अग्नि कहा जाता है। जब यह धातु-अग्नि(चयापचय शक्ति) कमजोर हो जाती है तो यह पोषक तत्वों के अनुचित प्रसंस्करण को बढ़ावा देती है। कोशिकाओं और उत्तकों में कमजोर चयापचय के कारण,  कोशिकाओं और उत्तकों के प्रत्येक स्तर में आम बनती है, जिसे धातुओं में कमजोरी आती है।

इसके अलावा, यह आम कोशिकाओं के बीच सूचना प्रवाह सहित सूक्ष्म चैनलों को भी रोक सकता है, जिससे बीमारियां होती है। यह बीमारियां शरीर के सबसे कमजोर भाग पर में सकती है, जहाँ आम आसानी से जमा हो सकता है।

गर विष

शरीर में बाहरी या पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थों के जैव संचय को गर्विशा कहा जाता है।  इससे प्रदूषण के कारण होने वाली कई बीमारियां भी होती हैं।

आम के लक्षण और प्रभाव

शरीर में आम के संचय होने से निम्नलिखित लक्षण और प्रभाव होते हैं।

  1. ऊर्जा या ताकत में कमी
  2. शरीर में भारीपन महसूस करना
  3. आलस्य
  4. खट्टी डकार
  5. अत्यधिक लार निकलना
  6. अतिरिक्त बलगम होना
  7. भूख न लग्न
  8. थकान
  9. मल त्याग और उन्मूलन में गड़बड़ी

अन्य लक्षण, जो शरीर में आम के होने को बता सकते हैं, इस प्रकार हैं:

  1. कम भूख
  2. सांसों की बदबू
  3. जमी हुई जीभ
  4. सामान्यीकृत शरीर में दर्द (धीमा दर्द)
  5. अधिक दु: ख के साथ अवसाद का होना

आम की उत्पति कैसे रोकें

शरीर में आम की उत्पति को कम करने एवं रोकने के लिए, निम्नलिखित चीजों का ध्यान रखना चाहिए:

  1. ज़्यादा खाना खाने से बचें।
  2. पैक और संरक्षित खाद्य पदार्थ, संसाधित खाद्य पदार्थ, जमे हुए खाद्य पदार्थ और जंक फूड न खाएं।
  3. भोजन से पहले 30 मिनट पहले और भोजन के 2 घंटे बाद तक पानी न पीएं।
  4. संतुलित आहार लें, जिसमें सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ विशेष रूप से सब्जियां और फलों शामिल हों।
  5. हर भोजन में सभी छह स्वाद (मिठाई, नमक, खट्टा, कड़वा, तीखा और कसैला) शामिल करें।
  6. हमेशा दूसरा भोजन करने से पहले पहले भोजन को अच्छे से पचने दें यानी तभी खाएं जब आपको भूख लगी हो।
  7. खाने को बहुत धीमे या बहुत तेज़ न खाएं।
  8. आसानी से पचने योग्य भोजन को ही चुनें।

एक स्वस्थ भोजन आम के संचय से पूर्ण इलाज के लिए एक बुनियादी कदम है।

संदर्भ

  1. Ama Dosha in Ayurveda – AYURTIMES.COM
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