मुँहासे (Acne) के लक्षण, कारण, जाँच और निदान

किसी की त्वचा में मुँहासों की स्थिति तब बनती है जब त्वचा के रोम छिद्रों में तेल और मृत कोशिकाऐं जम जाती हैं। आम तौर पर यह देखा गया है कि मुँहासे चेहरे, गर्दन, छाती, पीठ और कंधे पर होते हैं। मुँहासों का उपचार करने के बाद भी यह लगातार होते रहते हैं। इनके उपचार की गति बहुत धीमी होती है, और उपचार किये गए स्थान के अलावा दूसरी जगह भी नए मुँहासे पनपने लगते हैं।

आम तौर पर यह देखा गया है कि यह किशोरावस्था में अधिक होते हैं। आजकल के खान पान और प्रदूषण के कारण इनको किशोरों के अलावा छोटे बच्चों में भी देखा गया है।

मुँहासे होने से किशोर भावात्मक रूप से भी प्रभावित होते हैं और इससे त्वचा पर निशान भी पड़ जाते हैं। इसलिए इनके लक्षण प्रकट होते ही इनका उपचार शुरू कर देना चाहिए, जिससे की किशोरों की सुंदरता पर प्रभाव ना पड़े और वे भावात्मक रूप से प्रभावित ना हों।

मुँहासों के लक्षण

किसी की त्वचा पर मुँहासों के लक्षण उस की स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करते हैं।

  • व्हाइटहेड्स – बंद रोम छिद्र
  • ब्लैकहैड्स – यह रोम छिद्र खुले हुए होते हैं और इनमें जमा तेल हवा के प्रभाव में भूरे रंग का हो जाता है
  • छोटे लाल संवेदनशील दाने
  • पिम्पल्स – छोटी फुंसियां जिनके सिरे पर मवाद होता है
  • त्वचा की सतह के नीचे बड़ी, ठोस, दर्दनाक गांठें
  • त्वचा की सतह के नीचे बड़ी, मवाद से भरी, दर्दनाक गांठें

इन सभी स्थितियों में यदि घरेलु उपचार से लाभ ना हो रहा हो तो किसी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। यदि तब भी लाभ न मिले तो किसी त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

सामान्यतः बाजार में उपलब्ध क्रीम आदि का प्रयोग स्वयं न करें, क्योंकि गुणवत्ता का स्तर ना होने के कारण दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। इस प्रकार के स्तरहीन उत्पादों से आपको नुक्सान हो सकता है, जिसके लक्षण हैं चेहरे पर लालिमा, खुजली आदि।

यदि इन उत्पादों के प्रयोग से आपको अधिक कष्ट हो जैसे आँखों, चेहरे, होठों पर सूजन, चक्कर आना, सांस लेने में परेशानी या गले में खिंचाव तो तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क करें।

मुँहासों के कारण

मुँहासों के मुख्य रूप से चार कारण होते हैं।

तेल का बनना

आम तौर पर मुँहासे आपके चेहरे, गर्दन, छाती, पीठ और कंधों पर होते हैं। इन जगहों की त्वचा में तेल की (वसामय) ग्रंथियां अधिक होती हैं। जब त्वचा के रोम छिद्रों में तेल और मृत त्वचा कोशिकाऐं जम जाती हैं तो मुँहासे हो जाते हैं।

बालों के कूप तेल की ग्रंथियों से जुड़े होते हैं। ये ग्रंथियां आपके बालों और त्वचा को चिकना रखने के लिए एक तैलिये पदार्थ (सीबम) का स्राव करती हैं। सीबम आपके बालों से होता हुआ आपके रोम छिद्रों तक जाकर आपकी त्वचा में जम जाता है।

मृत त्वचा कोशिकाऐं

जब आपका शरीर अतिरिक्त मात्रा में सीबम और मृत त्वचा कोशिकाओं करता है, तो यह दोनों रोम छिद्रों में जाकर जम जाते हैं। ये मिलकर एक डाट का काम करते हैं और ऐसे वातावरण का निर्माण करते हैं जहां बैक्टीरिया पनप सकता है। इससे इन छिद्रों में संक्रमण हो जाता है और इनमें सूजन आ जाती है।

भरे हुए रोम छिद्र

भरे हुए रोम छिद्रों की दीवारों में सूजन आने लगती है, वे बंद हो जाते हैं और व्हाइटहेड बन जाते हैं। कई बार रोम छिद्र खुले रह जाते हैं, और बाहरी हवा के प्रभाव से ब्लैकहेड बन जाते हैं। ब्लैकहैड देखने में ऐसे लगते हैं जैसे इन रोम छिद्रों में गन्दगी फंसी हुई हो। लेकिन वास्तव में, इन रोम छिद्रों में तेल और बैक्टीरिया भरा होते है जो बाहरी हवा के प्रभाव में आने से भूरे रंग का हो जाता है।

बैक्टीरिया

पिम्पल उभार लिए हुए लाल धब्बे होते हैं जिनके मध्य में सफ़ेद होता है जो कि रोम छिद्रों के बैक्टीरिया द्वारा संक्रमित होने के कारण होते हैं। रोम छिद्रों के अंदर तेल, मृत कोशिकाओं और बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण जो सूजन होती है, उससे आपकी त्वचा के नीचे गांठें बन जाती हैं। त्वचा के अन्य छिद्र जो पसीना निकालने के लिए होते हैं, अक्सर उनमें मुँहासे नहीं होते हैं।

मुँहासों को बदतर करने वाले कारक

ऐसे कई कारण होते हैं जिन से मुंहासों की समस्या और खराब हो जाती है। इनमें से मुख्य कारण हैं :

हॉर्मोन का असंतुलन

जब लड़के और लड़कियां तरुण अवस्था में होते हैं तो उनके अंदर एण्ड्रोजन नामक हॉर्मोन बढ़ जाते हैं, जिससे वसामय ग्रंथियां फैल जाती हैं और अधिक मात्रा में सीबम बनाने लगता है। गर्भावस्था के समय और खाने वाले गर्भ निरोधकों के उपयोग से भी हॉर्मोन असंतुलित हो जाते हैं, परिणामस्वरूप अधिक मात्रा में सीबम बनने लगते है। यदि कम मात्रा में एण्ड्रोजन हॉर्मोन स्त्रियों में बनता है तो यह मुंहासों की स्थिति को और बदतर बनाता है।

कुछ निश्चित दवाओं के उपयोग से

जिन दवाओं में कॉर्टिकॉस्टिरॉइड्स, एण्ड्रोजन या लिथियम होता है, वे मुंहासों की स्थिति को खराब कर सकती हैं।

आहार (भोजन)

शोध से यह पता चला है कि डेयरी उत्पादों और कार्बोहाइड्रेट समृद्ध खाद्य पदार्थ जैसे रोटी, बैलल्स और चिप्स आदि से मुंहासे हो सकते हैं। एक अन्य शोध से यह भी पता चला है कि चॉकलेट खाने से भी मुंहासों में वृद्धि होती है। प्रश्न यह उठता है कि क्या मुँहासे से ग्रसित रोगियों को विशिष्ट आहार प्रतिबंधों का पालन करने की आवश्यकता होती है।

तनाव

तनाव से भी मुंहासों की स्थिति बदतर होने की संभावना होती है।

मुंहासों के मिथक

ऐसा मना जाता है कि निम्न कारणों का भी मुंहासों की स्थिति पर प्रभाव पड़ता है।

चिकनाईयुक्त भोजन

यह मिथक है कि चिकनाईयुक्त भोजन करने से मुंहासों पर असर पड़ता है, परन्तु यह सही नहीं है। परन्तु ऐसी जगह पर काम करने से जहाँ पर वातावरण तैलीय हो, इन पर असर पड़ता है, क्योंकि वातावरण में मौजूद तेल त्वचा पर जम कर रोम छिद्रों को बंद कर देता है। इससे त्वचा में खुजली होने लगती है और मुंहासे बनने लगते हैं।

गन्दी त्वचा

मुंहासे गन्दगी के कारण नहीं होते हैं। दरअसल त्वचा को जोर से रगड़ने से या किसी कठोर साबुन से धोने से या रसायन वाले पदार्थों से मुँह धोने से त्वचा पर असर पड़ता है और मुंहासों की स्थिति खराब हो जाती है। अपनी त्वचा पर से तेल, मृत कोशिकाऐं या अन्य गन्दगी सावधानीपूर्वक साफ़ करनी चाहिए।

प्रसाधन सामग्री

यह जरूरी नहीं है कि सौंदर्य प्रसाधन सामग्री आपके मुँहासों का कारण बनती है। यदि आप तेल-मुक्त श्रृंगार का उपयोग करते हैं जो रोम छिद्रों को बंद नहीं करता है और साथ ही आप प्रतिदिन अपने मेकअप को साफ़ करते हैं, तो कोई भी दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। तेल-मुक्त श्रृंगार सामग्री मुंहासों के उपचार की दवाओं में हस्तक्षेप नहीं करती है।

मुंहासे होने के जोखिम के कारण

मुंहासे होने के जोखिम के मुख्य कारण हैं।

हॉर्मोन में बदलाव

किशोरों, लड़कियों और महिलाओं में हॉर्मोन परिवर्तन एक आम बात है। जो व्यक्ति ऐसी दवाओं का उपयोग कर रहे हैं कॉरटेकोस्टेरोइड, एण्ड्रोजन या लिथियम शामिल है, इनसे भी हॉर्मोन में बदलाव होता है।

अनुवांशिक

अनुवांशिकता भी मुंहासों में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि आप के माता-पिता को भी मुंहासों की समस्या थी, तो बात की बहुत संभावना होती है कि आप भी इस समस्या से ग्रसित हो सकते हैं।

चिकनाईयुक्त या तैलीय पदार्थ

जब आपकी त्वचा किसी चिकनाईयुक्त या तैलीय पदार्थ के संपर्क में आती है तो मुंहासे विकसित हो सकते हैं। या आप किसी ऐसे वातावरण में काम करते हों जहाँ तेल या चिकनाई हो जैसे रसोईघर तो भी आपको मुंहासे होने की संभावना होती है।

त्वचा पर दबाव या घर्षण

आपकी त्वचा पर दबाव या घर्षण कई कारणों से हो सकता है जैसे टेलीफोन, सेलफोन, हेलमेट, तंग कॉलर और बैकपैक। इन कारणों से भी मुंहासों की समस्या हो सकती है।

तनाव

तनाव के कारण मुंहासे नहीं होते हैं परन्तु यदि आपको पहले से ही मुंहासे हैं तो यह तनाव इनकी स्थिति को और गंभीर बना देता है।

मुंहासों की रोक-थाम

किसी कुशल विशेषज्ञ डॉक्टर से उचित उपचार लेने के बाद आप के मुंहासों की समस्या में सुधार आता है। आराम मिलने के बाद भी आप को अपने उपचार को जारी रखना चाहिए और फिर से नए मुंहासे ना निकलें, इसके लिए कुछ जरूरी रोक थाम की भी आवश्यकता होती है। इस उपचार के साथ साथ आप मौखिक गर्भ निरोधकों को लेना जारी रख सकते हैं। अपनी त्वचा की देख्भाल के लिए डॉक्टर की सलाह का पालन करें और नीचे दिए गए टिप्स का भी पालन करें।

मुंहासों से ग्रसित त्वचा को दिन में केवल दो बार धोयें

त्वचा को धोने से उसमें जमा अतिरिक्त तेल और मृत कोशिकायें निकल जाती हैं। परन्तु बहुत अधिक धोने से त्वचा में जलन होने लगती है। संक्रमित क्षेत्र को किसी सौम्य और तेल मुक्त प्रसाधन के साफ़ करें और त्वचा की देख भाल के लिए जल आधरित उत्पादों का उपयोग करें।

अतिरिक्त तेल सोखने के लिए निश्चित क्रीम या जेल

अपनी त्वचा से अतिरिक्त तेल सोखने के लिए निश्चित क्रीम या जेल का उपयोग करें। ऐसे पदार्थों का उपयोग करें जिनमें सक्रिय संघटक के रूप में बेंज़ोयल पेरोक्साइड या सैलिसिलिक एसिड हो।

बिना तेल वाले सौंदर्य प्रसाधन का उपयोग

ऐसे सौंदर्य प्रसाधन का उपयोग करें जिसमें तेल की मात्रा न हो जिससे की आपकी त्वचा के रोम छिद्र अवरुद्ध ना हों।

रात्रि में सोने से पहले मेकअप साफ़ करें

यदि आप मेकअप लगा कर ही सो जायेंगे तो रात भर आप की त्वचा के रोम छिद्र बंद रहेंगे। जिससे मुंहासों के होने की सम्भावना प्रबल होती है। नियमित रूप से आप साबुन युक्त पानी और सौम्य क्लीन्ज़र से अपने मेकअप को साफ़ करें।

ढीले-ढाले कपडे पहनें

चुस्त और कसे हुए कपडे आपकी त्वचा में गर्मी और नमी को रोकते हैं, जिससे आपकी त्वचा में परेशानी और जलन होने लगती है। जहाँ तक संभव हो आप अपनी त्वचा के साथ घर्षण को रोकें, वो चाहे कसी हुई पट्टियों, बैकपैक्स, हेलमेट, टोपी और स्पोर्ट्स उपकरण के कारण हो।

अधिक श्रम के बाद स्नान करें

जब भी आप किसी भी प्रकार का अधिक श्रम करें तो उसके बाद आपको स्नान करना चाहिए, इससे आप के शरीर का अतिरिक्त तेल और पसीना निकल जायेगा जो मुंहासों का कारण बन सकता है।

समस्या ग्रसित क्षेत्र को छूने से बचें

मुंहासों से ग्रसित त्वचा को बार बार छूना नहीं चाहिए क्योंकि इससे मुहांसो के फैलने और अधिक मुंहासे होने की प्रबल संभावना होती है।

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