जड़ी बूटी

आलू बुखारा के फायदे और नुकसान

आलू बुखारा एक बहुत ही स्वादिष्ट और पौष्टिक फल है। इसका स्वाद खाने में खट्टा मीठा होता है और अच्छी तरह पकने के बाद यह और भी स्वादिष्ट हो जाता है। आलू बुखारा की पैदावार पर्शिया, ग्रीस और अरब देशों में प्रमुख रूप से होती है। आलू बुखारा अधिकतर बुखारे की तरफ से आता है इस लिए भी इसे आलू बुखारा कहते है। यह प्लम, प्रून, डैमसन आदि नामों से भी जाना जाता है, लेकिन आलू बुखारा नाम सबसे अधिक प्रसिद्ध है। आलू बुखारा की लगभग 140 किस्में बाजार में मौसम के दौरान पायी जाती हैं। जैसे अंजीर, अंगूर, खुबानी का प्रयोग सुखे मेवे के रूप में किया जाता है वैसे ही आलू बुखारा का भी प्रयोग सूखे मेवे के रूप में किया जाता है।

आलू बुखारा शरीर में शक्ति बढाने के लिए बहुत ही उपयोगी है और किसी भी तरह की बीमारी में इसका उपयोग बहुत ही लाभदायक है। आलू बुखारा में भरपूर मात्रा में प्रतिउपचायक (एंटी ऑक्सीडेंट) हैं और साथ ही साथ हमारे शरीर के अच्छे स्वास्थ्य के लिए विटामिन ए, विटामिन बी, सी, जी, के, पोटेशियम, फास्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन भी है। बहुत काम कैलोरी होने के कारण वजन घटाने के लिए एक आदर्श भोजन है।

आयुर्वेद के अनुसार आलू बुखारा ग्राही, भेदक, उष्ण और कफ पित्त्नाशक होता है। आलू बुखारे को खाने से शरीर में रक्त की वृद्धि होती है। यह पेट की कब्ज के साथ साथ दस्त में भी लाभदायक है। आलू बुखारा पेट के रोगों को दूर करने के लिए बहुत ही लाभदायक फल है, इसको खाने से आँतों को बल मिलता है, पित्त को शांत करता है और बवासीर के रोगियों के लिए बहुत ही लाभदायक फल है।

इसमें उपस्थित विटामिन और खनिज हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, कम स्मृति, मधुमेह, ऑस्टियोपोरोसिस और कैंसर जैसी बीमारियों के उपचार में लाभदायक हैं।

आलू बुखारा के स्वास्थ्य लाभ

आलू बुखारा मुक्त कणों के हानिकारक प्रभाव को निष्क्रिय करता है और अस्थमा, गठिया, हृदय घात और कैंसर जैसे रोगों को रोकने में मदद करता है। इसमें उपस्थित सोर्बिटोल और आइसटिन जैसे यौगिक पाचन तंत्र से जुड़े रोगों में लाभ देते हैं। विभिन्न प्रकार के विटामिन उपस्थित होने के कारण यह नेत्र विकारों और त्वचा से सम्बन्धित रोगों को रोकता है। कम कैलोरी होने से यह वसा कम करने और वजन घटाने का एक उत्तम भोजन है और विटामिन बी-6 ह्रदय विकारों की संभावनाओं को कम करता है। विटामिन सी और आयरन रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है और रक्ताल्पता (एनीमिया) को रोकता है। आलू बुखारा ग्लाइसेमिक सूची में कम है इसलिए यह रक्त में शर्करा स्तर और मधुमेह की संभावना को कम करता है।

औषधीय उपयोग

आलू बुखारा स्वास्थ्य और सौंदर्य लाभ दोनों के लिए सालों से उपयोग में लाया जाता है। इसके कुछ महत्त्वपूर्ण लाभ निम्नलिखित हैं।

पाचनक्रिया

आलू बुखारा भोजन में तन्तु (फाइबर) के साथ सोर्बिटोल और इसटीन का एक अच्छा स्रोत है जो पाविहं ताँता को नियमित करने में मदद करता है। अनुसंधान अध्ययन के अनुसार, सूखा आलू बुखारा कब्ज जैसे पाचन विकार में अन्य उपाय जैसे इसबगोल की भूसी की तुलना में अधिक प्रभावी है। सोर्बिटोल और इसटीन का रेचक प्रभाव होता है और वे आंत में तरल पदार्थ के स्राव को प्रोत्साहित करते हैं जिससे पेट के माध्यम से कचरे की कुशल निस्तब्धता (फ्लशिंग) होती है।

अस्थि-सुषिरता (ऑस्टियोपोरोसिस)

सूखा आलू बुखारा खाने से उपचय (एनाबोलिक) और अस्थि-सुषिरता के विरोधी कार्य होते हैं जो स्वस्थ हड्डियों को बनाए रखने में सहायता करते हैं। आलू बुखारा में ऐसे तत्त्व होते हैं जिससे हड्डी के ऊतकों की गिरावट को रोकने में मदद मिलती है और महिलायें रजोनिवृत्ति के बाद अस्थि-सुषिरता (ऑस्टियोपोरोसिस) जैसे रोगों से बचती हैं। सूखे आलू बुखारा में पोटैशियम जैसे तत्त्व हड्डियों के ऊतकों को बनाने में मदद करते हैं, हड्डियों के घनत्व को बढ़ाते हैं और डिम्बग्रंथि हार्मोन की कमी की वजह से हड्डी को हानि से बचाते हैं। अनुसंधान ने बताया है कि सूखा आलू बुखारा खाने से उम्र बढ़ने के कारण कम हो गए हड्डियों के घनत्व को दुबारा पूर्वावस्था में लाया जा सकता है।

प्रतिउपचायक (एंटी ऑक्सीडेंट)

आलू बुखारा में विटामिन सी और प्रतिउपचायक गुण वाले पोषक तत्त्व होते हैं जो ऑक्सीजन कणों द्वारा होने वाली हानि से बचाते हैं। इसमें उपस्थित तत्त्व ऑक्सीडेटिव तनाव से होने वाली किसी भी चोट के विरुद्ध काम करते हैं।

मधुमेह

आलू बुखारा हाइपरग्लेसेमिक विरोधी प्रभाव डालता है और मधुमेह का मुकाबला करने में मदद करता है। अध्ययनों से पता चला है कि आलू बुखारा खाने से रक्त में ग्लूकोज और शरीर में ट्राइग्लिसराइड के स्तर में कमी पायी गई है। आलू बुखारा में उपस्थित तत्त्व इंसुलिन प्रतिरोध और शरीर में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए मदद करते हैं।

मोटापा

आलू बुखारे का अर्क मोटापा और मोटापे से जुड़ी जटिलताओं के उपचार के लिए मूल्यवान है। अध्ययन से पता चला है कि आलू बुखारा बायोएक्टिव यौगिकों की उपस्थिति के कारण उपापचयी सिंड्रोम से लड़ने में मदद करता है। आलू बुखारा में उपस्थित तत्त्व विभिन्न शारीरिक कोशिकाओं पर (वसा कोशिकाओं सहित) मोटापा विरोधी प्रभाव डालते हैं, और वे मोटापे से संबंधित समस्याएँ जैसे कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह और हृदय रोग को रोकने में मदद करते हैं।

तंत्रिका तंत्र

आलू बुखारा में विटामिन बी 6 होता है जो तंत्रिका तंत्र के सुचारू संचालन में तंत्रिका संकेतों और प्रसारण में मदद करता है। यह मस्तिष्क के सामान्य विकास में और स्वभाव को प्रभावित करने वाले हार्मोन के गठन में सहायता करता है। इन में उपस्थित एक एमिनो एसिड नींद, भूख और एकाग्रता में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संज्ञानात्मक स्वास्थ्य

अध्ययनों से पता चला है कि आलू बुखारा में उपस्थित तत्त्व उम्र से संबंधित संज्ञानात्मक हानि के खिलाफ संरक्षण प्रदान करने में प्रभावी रहे हैं। आलू बुखारा में उपस्थित तत्त्व सीखने और स्मृति कार्यों में सुधार करने के लिए मस्तिष्क संबंधी क्षेत्रों में सूजन को कम करने में मदद करते हैं। आलू बुखारा के नियमित प्रयोग से उम्र से संबंधित  अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसे रोगों को भी रोकने में मदद मिलती है।

स्वस्थ रक्तवसा (कोलेस्ट्रॉल) का स्तर

आलू बुखारा रक्त वसा (कोलेस्ट्रॉल) के स्तर को नियमित करने में मदद करता है। एक तुलनात्मक अध्ययन ने प्लाज्मा और जिगर (यकृत) कोलेस्ट्रॉल के स्तर को स्वस्थ बनाए रखने में अंगूर के रस के बाद आलू बुखारा लेने के प्रभाव को सिद्ध किया है।

हृदय स्वास्थ्य

आलू बुखारा का उपयोग हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। अनुसंधान ने साक्ष्य का समर्थन प्रदान किया है कि नियमित रूप से सूखा आलू बुखारा खाने से सेवन धमनियों में रक्त की तरलता को बढ़ावा मिलता है, इससे धमनीकलाकाठिन्य (अथेरोस्क्लेरोसिस) के विकास, दिल के दौरे, हृदय संबंधी विकार और हृदय घात की संभावनाओं में कमी आती है।

कैंसर

आलू बुखारे के अर्क को कैंसर के उपचार में लाभदायक सिद्ध किया गया है। अध्ययनों से पता चला है कि आलू बुखारे में उपस्थित तत्त्व घातक कैंसर कोशिकाओं और उसके विकास में बाधक तत्वों की जिसमें लीवर कैंसर के तत्त्व भी है मदद करता है। वे उन तत्वों से परिपूर्ण हैं जो शरीर की सामान्य स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाने के बिना स्तन कैंसर की कोशिकाओं के खिलाफ एक उपचारात्मक प्रभाव देता हैं।

प्रतिरक्षा प्रणाली

आलू बुखारा उच्च विटामिन सी सामग्री की उपस्थिति के कारण शरीर की प्रतिरक्षा को मजबूत बनाने में फायदेमंद होता है। यह संक्रमण और सूजन के खिलाफ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देता है। अनुसंधानों से पता चला है कि इसमें वो घटक हैं जो ट्यूमर कोशिकाओं के मेटास्टेसिस में बाधा पहुँचाने, और विभिन्न रोगों को रोकने में महत्वपूर्ण हैं।

खून का जमना

आलू बुखारे में विटामिन K होता है जो खून को सामान्य रूप से जमने में मदद करता है और हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है। शरीर में विटामिन K की कमी से चोट लगाने पर अधिक खून बहता है और हड्डियां कमजोर होती हैं।

त्वचा की देखभाल

आलू बुखारा अन्य ऑक्सीडेंट के साथ विटामिन C से भरपूर होता है जो स्वस्थ, उज्ज्वल और युवा त्वचा को बनाए रखने में मदद करता है। आलू बुखारा में उम्र बढ़ने के विरोधी पोषक तत्वों (एंटी एजिंग न्यूट्रिएंट्स) की उपस्थिति के कारण यह चेहरे के काले धब्बों और झुर्रियों को काम करने में मदद करता है। आलू बुखारा के अर्क को त्वचा की देखभाल करने वाले विभिन्न उत्पादों जैसे फेस पैक और फेस वाश आदि में प्रयोग किया जाता है।

गर्भावस्था

आलू बुखारा और उसके उत्पादों में कई विटामिन और खनिज बहुतायत में होते हैं, जिसके कारण यह गर्भावस्था के दौरान फायदेमंद होता है। इसके लाभदायक घटक मां और गर्भस्थ शिशु की नेत्र दृष्टि, हड्डियों और ऊतकों के विकास, और (सेलुलर) कोशिका स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इसमें फाइबर होते हैं जो कब्ज को रोकते हैं और पाचन बेहतर बनाते हैं। संतुलित आहार के एक भाग के रूप आलू बुखारे को शामिल करने से विभिन्न संक्रमणों से लड़ने में मदद मिलती है और समग्र स्वास्थ्य बना रहता है।

इलेक्ट्रोलाइट संतुलन

आलू बुखारा में पोटैशियम प्रचूर मात्रा में है जो एक इलेक्ट्रोलाइट है और कोशिकाओं और शरीर के ऊतकों के कुशल संचालन के लिए आवश्यक है। पोटेशियम युक्त आलू बुखारा खाने से मांसपेशियों में संकुचन और शरीर का अम्ल-क्षार संतुलन नियंत्रित रहता है।

चिंता

आलू बुखारा नियमित खाने से व्यग्रता कम होती है। अध्ययन से यह साक्ष्य सामने आये हैं कि आलू बुखारा में ऑनसिओल्य्टिक प्रभाव और क्लोरोजेनिक एसिड के कारण एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो ऑक्सीडेटिव तनाव के कारण होने वाले चिंता से संबंधित व्यवहार और नुक्सान के उपचार में मदद करते हैं।

आँख की मैक्यूला का व्यपजनन (मैकुलर डिजनरेशन)

आलू बुखारा में विटामिन A और बीटा कैरोटीन होता है जो स्वस्थ आंखों की दृष्टि बनाए रखने और उम्र से संबंधित धब्बेदार अध: पतन (मैकुलर डिजनरेशन) को रोकने में फायदेमंद होते हैं। इसमें उपस्थित कैरोटेनॉयड्स लुटेइन और जेक्सनथिन रेटिना के धब्बेदार ऊतकों में रहते हैं और पराबैंगनी विकिरण की वजह से होने वाले नुक्सान के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं।

कोशिका स्वास्थ्य

आलू बुखारा में आवश्यक लोहा और तांबा होता है जो लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायता, रक्त शुद्धि और स्वस्थ संचलन में मदद करता है। इसमें उपस्थित तांबा एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है और तंत्रिका स्वास्थ्य और कोलेजन के गठन में आवश्यक है। तांबा युक्त आलू बुखारा खाने से शरीर में लोहे के अवशोषण में और एनीमिया और ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसे विभिन्न रोगों से बचने में मदद मिलती है।

श्‍लैष्मिक ज्‍वर (इन्फ्लुएंजा)

जापानी आलू बुखारा इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होने वाले संक्रमण के खिलाफ प्रभावी रहा है। अध्ययनों से पता चला है कि जापानी आलू बुखारा के रस में लेक्टिन की तरह के अणु होते हैं जो इन्फ्लूएंजा A वायरस की वजह से होने वाले संक्रमण के इलाज में मदद करते हैं।

वजन घटाना

लिवरपूल विश्वविद्यालय द्वारा किए गए शोध से पता चलता है कि आलू बुखारा को वजन नियंत्रण आहार के रूप में खाने से वजन नियंत्रित रहता है।

आलू बुखारा के दुष्प्रभाव

आलू बुखारा के इतने अधिक स्वास्थ्य लाभ होने के साथ साथ इसके कुछ दुष्प्रभाव और नुकसान नीचे वर्णित हैं:

यदि आप गुर्दे या पित्ताशय की पथरी के रोग से पीड़ित हैं तो आपको इसे खाने से बचना चाहिए क्योंकि इसमें ऑसेल्टेक्स उच्च मात्रा में होते हैं जो इस रोग की स्थिति को और ख़राब कर सकते हैं।

इसे बहुत अधिक मात्रा में खाने से पेट की सूजन, गैस बनना और पाचन तंत्र से सम्बंधित अन्य परेशानियां हो सकती हैं।

अधिक मात्रा में सूखा आलू बुखारा खाने से बचना चाहिए क्योंकि इसमें न्यूरोटॉक्सिन नामक रसायन होता है जिससे न्यूरोपैथी, प्रजनन आदि समस्याओं पर प्रभाव पड़ता है।

यदि आपका शरीर अम्लीय फल के लिए उपयुक्त नहीं है, तो आपको आलू बुखारा नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें अम्लीय सामग्री उच्च मात्रा में होती है।

दवाओं के साथ हस्तक्षेप

आलू बुखारा का अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह आपकी किसी विशेष दवा के साथ हस्तक्षेप कर सकता है। आलू बुखारा रक्त शर्करा के स्तर को कम कर देता है, यह उन लोगों के लिए अनुशंसित नहीं है जिनकी सर्जरी होने वाली हो।

परंतु नियमित मात्रा में आलू बुखारा का सेवन आप कर सकते हैं और यह लाभ ही देगा।

 

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Dr. Jagdev Singh

डॉ जगदेव सिंह (B.A.M.S., M.Sc. Medicinal Plants) आयुर्वेदिक प्रैक्टिशनर है। वह आयुर्वेद क्लिनिक ने नाम से अपना आयुर्वेदिक चिकित्सालय चला रहे हैं।उन्होंने जड़ी बूटी, आयुर्वेदिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक आहार के साथ हजारों मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया है।आयुर टाइम्स उनकी एक पहल है जो भारतीय चिकित्सा पद्धति पर उच्चतम स्तर की और वैज्ञानिक आधार पर जानकारी प्रदान करने का प्रयास कर रही है।

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