अमृतादि गुग्गुलु (Amritadi Guggulu) एक गुगुल आधारित हर्बल औषधि है। आयुर्वेदिक चिकित्सक इसका उपयोग वातरक्त, बवासीर, त्वचा रोग, घाव, संधिशोथ, नासूर, कमजोर पाचन शक्ति और कब्ज के लिए करते हैं।

घटक द्रव्य (Ingredients)

त्रिफला के अतिरिक्त गिलोय (जिसे अमृता भी कहा जाता है) और गुगुल इसकी दो प्रमुख सामग्रियां हैं। अमृतादि गुग्गुलु में निम्नलिखित घटक होते हैं।

  1. शुद्ध गुग्गुलु – Commiphora wightii
  2. अमृता (गिलोय) – Tinospora cordifolia
  3. अमला (अमलाकी) – Amla
  4. बिभीतकी
  5. हरीतकी
  6. दंति मूल
  7. काली मिर्च
  8. अदरक
  9. पिप्पली
  10. वायविडंग
  11. दालचीनी

औषधीय कर्म (Medicinal Actions)

अमृतादि गुग्गुलु में निम्नलिखित औषधीय गुण होते हैं।

प्राथमिक क्रिया

  • यूरिकोसुरिक एजेंट
  • सूजन नाशक
  • पीड़ाहर
  • जीवाणुरोधी
  • रोगाणुरोधी
  • उदर कृमि नाशक
  • वातहर
  • सौम्य रेचक

सहायक क्रिया

  • पाचन उत्तेजक
  • मधुमेह नाशक
  • प्रतिउपचायक

चिकित्सकीय संकेत (Indications)

अमृतादि गुग्गुलु निम्नलिखित रोगों में सहायक है।

  1. गठिया या यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ स्तर
  2. बवासीर
  3. नालव्रण
  4. मुँहासे
  5. घाव
  6. त्वचा रोग
  7. वजन कम होना
  8. फोड़े (आंतरिक फोड़े)
  9. यकृत विकार

अमृतादि गुग्गुलु लाभ और उपयोग

अमृतादि गुग्गुलु (Amritadi Guggulu) में यूरिकोसुरिक गुण होते हैं जिसके लिए यह गठिया, संधिशोथ और यूरिक एसिड के बढे हुए स्तर में लाभदायक होता है। तथापि यह मोटापे और  त्वचा रोगों के लिए भी लाभदायक है। यहां इसके कुछ मुख्य लाभ और औषधीय उपयोग बताये गए हैं।

प्रमुख लाभ

  • अमृतादि गुग्गुलु यूरिक एसिड को कम कर देता है और जोड़ों पर यूरिक एसिड के संचय को रोकता है।
  • यह संधिशोथ में जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करता है।
  • यह पाचन में सुधार करता है और भोजन के कुअवशोषण से उत्पन्न एएमए, विषाक्त पदार्थों को कम करता है।
  • जीवाणुरोधी और रोगाणुरोधी गुणों के कारण, यह मवाद वाले मुहांसों या लालिमा और हल्के दर्द वाले मुहांसों को कम करने में भी मदद करता है।
  • इसके घटकों में मोटापा नाशक गुण होते हैं, इसलिए यह मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए भी लाभदायक हो सकता है।

गठिया और बढ़ा हुआ यूरिक एसिड स्तर

अमृतादि गुग्गुलु युरीकोसुरिक गुणों के कारण गुर्दों के माध्यम से यूरिक एसिड के उत्सर्जन को बढ़ाता है। यह अपशिष्ट को छानने और यूरिक एसिड और अन्य विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए गुर्दों के विकारों पर काम करता है। यह गुर्दे के कार्यों में सुधार करता है। यह यूरिक एसिड पथरी के गठन को रोकता है।

लगभग 70% यूरिक एसिड गुर्दे के माध्यम से उत्सर्जित हो जाता है और पेट के माध्यम से 30% यूरिक एसिड समाप्त हो जाता है। इसलिए, उच्च यूरिक एसिड स्तरों से यकृत कार्य भी संबद्ध होता है। यकृत के विकारों से पेट में यूरिक एसिड के उन्मूलन में कमी आती है। अमृतादि गुग्गुलु यकृत पर भी कार्य करता है और यकृत कार्यों में सुधार करता है।

इसके अलावा, अशांत चयापचय के कारण भी शरीर में यूरिक एसिड का उत्पादन अधिक हो जाता है। इसके कारण, शरीर में अपने उत्सर्जन की तुलना में अधिक यूरिक एसिड जमा हो जाता है। अमृतादि गुग्गुलु चयापचय संबंधी विकारों को भी ठीक करता है और यूरिक एसिड का उत्पादन कम करता है। हालांकि, अमृतादि गुग्गुलु धीमी गति से काम करता है। अधिक लाभ के लिए, रोगी को इसे गिलोय के काढ़े के साथ लेना चाहिए।

जब रोगी में गठिया के निम्नलिखित एक या अधिक लक्षण हों तो अमृतादि गुग्गुलु अच्छी तरह से काम करता है।

  • पैरों में जलन या गर्मी की सनसनी – गिलोय सत्व (Giloy Satva) और गंधक रसायन (Gandhak Rasayana) के साथ
  • एडी का दर्द
  • पैर में संवेदनशीलता – जहां रोगी संवेदनशीलता और एड़ी के दर्द के कारण चलने में कठिनाई की शिकायत करे
  • पैर के पंजों में दर्द
  • संवेदनशीलता या गर्मी की सनसनी के साथ जोड़ों में सूजन
  • संबद्ध कब्ज
  • उंगलियों में दर्द
  • हथेलियों और पैरों में अत्यधिक पसीना आना

अमृतादि गुग्गुलु खुराक

हालांकि, प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में अमृतादि गुग्गुलु की प्रतिदिन 10 ग्राम की खुराक बताई गई है, जो की एक उच्चतम खुराक है, लेकिन अब आयुर्वेदिक चिकित्सक दिन में दो या तीन बार केवल 500 मिलीग्राम से 2000 मिलीग्राम तक खुराक का उपयोग करते हैं। हमने पाया है की शरीर के वजन के अनुसार निम्नलिखित खुराक लगभग सभी रोगियों के लिए उपयुक्त है।

आयु वर्ग  खुराक
बच्चे (पुरुष)10 से 20 मिलीग्राम प्रति किलो शरीर का वजन
बच्चे (महिला)7.5 से 15 मिलीग्राम प्रति किलो शरीर का वजन
वयस्क पुरुष15 से 30 मिलीग्राम प्रति किलो शरीर का वजन
वयस्क महिला12.5 से 25 मिलीग्राम प्रति किलो शरीर का वजन

कुछ परिस्थितियों में, आपका चिकित्सक खुराक को कम या ज्यादा कर सकता है। सामान्य रूप से, कमजोर रोगियों या कमजोर पाचन शक्ति वाले लोगों को कम मात्रा की आवश्यकता हो सकती है। शारीरिक रूप से मजबूत, अच्छे पाचन वाले या मोटे लोगों को उच्च खुराक की आवश्यकता हो सकती है।

अमृतादि गुग्गुलु के दुष्प्रभाव

अधिकांश लोगों के लिए अमृतादि गुग्गुलु को संभवतः सुरक्षित और अच्छी तरह से सहनीय समझा जाता है। यहां कुछ संभावित प्रतिकूल प्रभाव दिए गए हैं जो दुर्लभ मामलों में हो सकते हैं।

  • ढीला मल (केवल अधिक खुराक के कारण हो सकता है)
  • सिरदर्द (केवल प्रतिदिन 10 ग्राम से अधिक मात्रा में खुराक लेने के कारण हो सकता है)

यदि आपको अमृतादि गुग्गुलु में प्रयुक्त किसी भी घटक से एलर्जी हो, तो आपको इसे नहीं लेना चाहिए। अन्यथा, इससे खुजली और त्वचा पर चकत्ते पड़ सकते हैं।

संदर्भ

  1. Amritadi Guggulu – AYURTIMES.COM
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