अशोकारिष्ट के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

अशोकारिष्ट एक तरल आयुर्वेदिक औषधि है। इसमें लगभग 3 से 9% स्व-जनित मद्य सम्मिलित हो सकता है। यह महिला प्रजनन प्रणाली से संबंधित लगभग सभी प्रकार के रोगों में प्रभावशाली है। महिलायों के गर्भाशय सम्बंधित विकारों में यह एक उत्तम औषधि मानी गयी है।

अशोकारिष्ट डिम्बग्रंथि को सुदृढ़ कर मासिक धर्म के समय भारी प्रवाह को सामान्य करने में मदद करता है और दर्द को कम करता है। यह भूख में भी सुधार करता है। इसके अलावा, यह स्त्रियों में भूख की कमी और रक्तज अर्श में भी लाभप्रद है। इसका मुख्य संकेत भारी रक्तस्राव है। यह महिलायों में होने वाले भारी रक्तस्राव के सभी अंतर्निहित कारणों में प्रभावी है, सिवाय गर्भाशय कैंसर से होने वाले रक्तस्राव के।

अशोकारिष्ट भारी गर्भाशय रक्तस्राव, भारी मासिक धर्म, असंतुलित महिला हार्मोन, रजोनिवृत्ति ऑस्टियोपोरोसिस (menopausal osteoporosis), डिम्बग्रंथि पुटी (ovarian cyst) और गर्भाशय पोलिप (uterine polyp) जैसे स्त्री रोगों में उपयोगी है।

घटक – सामग्री

अशोकारिष्ट का प्रमुख घटक अशोक की छाल है। अशोकारिष्ट में निम्नलिखित घटक सम्मिलित हैं।

वानस्पतिक नाम सामान्य नाम
Saraca asoka Bark अशोक की छाल
Saccharum officinarum (Jaggery) गुड़
Woodfordia fruticosa flowers धातकी के फूल
Cyperus rotundus नागरमोथा की जड़
Zingiber Officinale अदरक प्रकंद
Nigella sativa कलौंजी
Berberis aristata दारुहरिद्र
Nymphaea stellata उत्पला के फूल
Emblica officinalis आमला या अमलाकी
Terminalia bellerica विभीतकी
Terminalia chebula हरीतकी
Mangifera indica Seeds आम बीज
Cuminum cyminum जीरा
Adhatoda vasica अडूसा
Santalum album चन्दन

औषधीय गुण

अशोकारिष्ट में निम्नलिखित उपचार के गुण हैं:

  1. दाह नाशक
  2. सौम्य एस्ट्रोजेनिक (estrogenic)
  3. वायुनाशी
  4. पाचन उत्तेजक
  5. हीमेटिनिक (हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाता है)
  6. मांस पेशियों को आराम देता है
  7. प्रतिउपचायक
  8. अडाप्टोजेनिक (Adaptogenic)
  9. कैंसर विरोधी

चिकित्सीय संकेत

अशोकारिष्ट निम्नलिखित स्वास्थ्य की स्थितियों में लाभप्रद है।

  1. कष्टार्तव
  2. गर्भाशय से अत्यधिक रक्तस्राव
  3. भारी मासिक धर्म
  4. रजोनिवृत्ति संबंधी ऑस्टियोपोरोसिस
  5. निम्न अस्थि खनिज घनत्व
  6. असंतुलित हार्मोन
  7. रक्त में टेस्टोस्टेरोन के स्तर में वृद्धि
  8. गर्भाशय पोलिप (कांचनार गुग्गुलु के साथ)
  9. डिम्बग्रंथि पुटी या पॉली-सिस्टिक डिम्बग्रंथि सिंड्रोम (PCOD) – चंद्रप्रभा वटी के साथ
  10. श्रोणि सूजन रोग (PID)

अशोकारिष्ट लाभ और उपयोग

अशोकारिष्ट डिम्बग्रंथि रोगों और गर्भाशय संबंधी विकारों में लाभप्रद है। इसका मुख्य कार्य महिला प्रजनन प्रणाली पर होता है और यह शरीर में हार्मोन के स्तर को संतुलित करता है। रजोनिवृत्ति में, यह स्त्री के शरीर में होने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया के अनुसार शरीर को उसके अनुकूल बनाता है। आइए हम अशोकारिष्ट के मुख्य स्वास्थ्य लाभों और औषधीय उपयोगों के बारे में चर्चा करें।

अत्यार्तव, रक्तप्रदर और मेनोमेट्रोरजिया

  • अत्यार्तव असामान्य भारी या लम्बी अवधि की माहवारी है।
  • रक्तप्रदर में गर्भाशय से लम्बे समय तक और अधिक रक्त बहता है। ऐसा मासिक धर्म के कारण नहीं होता है। यह कुछ अन्य गर्भाशय रोगों की ओर संकेत करता है।
  • मेनोमेट्रोरजिया अत्यार्तव और रक्तप्रदर का संयोजन है। इस मामले में, माहवारी के बावजूद भारी रक्तस्राव होता है। यह सामान्य की जगह अनियमित होता है।

आयुर्वेद में, उपरोक्त तीनों स्थितियों के लिए अशोकारिष्ट एक सर्वोत्तमऔषधि है। यह स्वाभाविक रूप से रक्तस्राव को कम कर देता है और गर्भाशय के कार्यों को नियमित करता है। यह प्रभाव अशोकारिष्ट द्वारा स्त्री हॉर्मोन्स को प्रभावित करने के कारण होता है।

अगर ग्रीवा संबंधी कैंसर, गर्भाशय के कैंसर और गर्भाशय पोलिप सहित अन्य कारणों से रक्तस्राव होता है, तो शायद अकेले अशोकारिष्ट उचित लाभ नहीं दे पायेगा। अन्य संबंधित स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए कई अन्य औषधियां भी आवश्यक हो सकती हैं। इन आयुर्वेदिक उपचारों में चन्द्रप्रभा वटी, कांचनार गुग्गुल, चन्द्रकला रस आदि का उपयोग भी सम्मिलित है।

अत्यार्तव में, कुछ रोगियों को कब्ज भी होती है। इस मामले में, उन्हें अशोकारिष्ट के साथ दंतयारिष्ट की आवश्यकता भी होती है। यदि रोगी को पीड़ा अधिक हो रही हो तो अशोकारिष्ट के साथ गोक्षुरादि गुग्गुलु (Gokshuradi guggulu) भी दिया जाता है।

कष्टार्तव (पीड़ादायक ऋतुस्राव)

अशोकारिष्ट एक गर्भाशय टॉनिक है, जो गर्भाशय सम्बन्धी कार्यों में सुधार करता है और गर्भाशय के संकुचन को व्यवस्थित करता है। यह गर्भाशय को शक्ति प्रदान करता है, जो माहवारी के समय गर्भाशय के अस्तर को आसानी से हटाने में मदद करता है और गर्भाशय में होने वाली स्थानिक रक्ताल्पता को रोकता है। इस प्रकार, यह मासिक धर्म में होने वाली ऐंठन को कम कर देता है। अशोकारिष्ट माहवारी से पहले होने वाले सिरदर्द, मतली, पीठ के निचले हिस्से में होने वाले दर्द आदि को भी कम करता है।

अशोक की छाल (अशोकारिष्ट का मुख्य घटक) का बढ़े हुए प्रोस्टाग्लैंडीन (prostaglandin) पर प्रभाव अभी भी अज्ञात है, लेकिन फाइटोस्ट्रोगन्स (phytoestrogens), जो कि अशोक की छाल में पाया जाता है, प्रोस्टाग्लैंडीन के उत्पादन को व्यवस्थित करता है। प्राइमरी कष्टार्तव के मामलों में प्रोस्टाग्लैंडीन का स्तर बढ़ा हुआ पाया जाता है।

जब एक महिला को भारी रक्तस्राव के साथ ऐंठन वाला दर्द हो रहा हो, तो अशोकारिष्ट अकेले ही लाभदायक हो सकता है। यदि माहवारी अपर्याप्त या कम हो तो अशोकारिष्ट का उपयोग कम मात्रा में करना चाहिए यानी 5 मिली लीटर कुमार्यासव (20 मिलीलीटर खुराक में) के साथ दिन में दो बार। यदि दर्द गंभीर है, तो योगराज गुग्गुलू (500 मिलीग्राम) को भी इस संयोजन के साथ लिया जा सकता है।

यदि उदर में मृदुता हो, या बढ़े हुए पित्त के लक्षण जैसे बढ़ा हुआ रक्त स्राव, जलन, चक्कर, अति अम्लता आदि उपस्थित हों, तो कुमार्यासव का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, मासिक धर्म के रक्त प्रवाह में, अशोकारिष्ट की उचित खुराक के साथ प्रवाल पिष्टी, सूतशेखर रस या कामदुधा रस का उपयोग करना चाहिए।

नोट: हालांकि, कई आयुर्वेदिक चिकित्सक कष्टार्तव के लिए अशोकारिष्ट का उपयोग मुख्य उपाय के रूप में करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। वास्तव में, यह कष्टार्तव की एक सहायक औषधि है, जो हार्मोनल संतुलन बनाए रखने और प्रजनन अंगों को शक्ति प्रदान करने में सहायता करती है। कष्टार्तव की  चिकित्सा में आसव और अरिष्ट के अंतर्गत कुमार्यासव को प्राथमिक चिकित्सा के रूप में लिया जाता है, लेकिन यह बढ़े हुए या कुपित पित्त के लक्षणों के लिए विपरीत संकेत है।

कष्टार्तव
अशोकारिष्ट कुमार्यासव (Kumaryasava)
गर्भाशय के संकुचन को कम कर देता है, लेकिन कुमार्यासव के साथ तुलनीय नहीं है गर्भाशय के असामान्य संकुचन को कम कर देता है
नियमित प्रयोग से मासिक धर्म का रक्त प्रवाह कम हो सकता है मासिक धर्म के रक्त प्रवाह में सुधार करता है
मासिक स्राव को कम करता है मासिक स्राव बढ़ाता है
मुख्य रूप से गर्भाशय को ताकत प्रदान करता है ताकत प्रदान करने की क्रिया बहुत कम है

पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि सिंड्रोम (PCOS)

अशोकारिष्ट पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि सिंड्रोम (पीसीओएस) में लाभदायक है। इसके उपयोग की स्थितियां बहुत भिन्न हैं, इसलिए इसका उपयोग बहुत सावधानी के साथ करना चाहिए।

अगर आपकी माहवारी 7 दिन या उससे अधिक समय के लिए होती है और रक्तस्राव अधिक होता है, या माहवारी जल्दी शुरू हो गयी हो और मासिक स्राव नियमित या अनियमित हो, लेकिन समय से पहले आ गए हो तो अशोकारिष्ट लाभदायक है।

अत्यार्तव की स्थितियों जैसे भारी रक्तस्राव, लम्बे समय तक या अनियमित माहवारी में अशोकारिष्ट बहुत उपयोगी है। अशोकारिष्ट के साथ सुकुमार कषाय और चंद्र प्रभा वटी का सेवन भी करना चाहिए। सुकुमार कषाय और चन्द्रप्रभा वटी दोनों ही डिम्बग्रंथि के कार्यों को सुधारने में सहायता करते हैं।

यदि आपकी माहवारी अनियमित हो और नियत तिथि के बाद आती हो तो, अशोकारिष्ट विपरीत संकेत है। ऐसे मामले में, कुमार्यासव और चन्द्रप्रभा वटी के साथ सुकुमार कषाय बहुत उपयोगी है। ऐसे मामलों में, कुछ लोगों को अग्नितुंडी वटी या रज: प्रवर्तिनी वटी की आवश्यकता हो सकती है।

अशोकारिष्ट का अंतःस्रावी तंत्र पर भी प्रभाव होता है। अधिक बाल निकलने, मुहांसे और वजन बढ़ने का आम कारण हॉर्मोन का असंतुलन होता है। चंद्रप्रभा वटी के साथ अशोकारिष्ट का नियमित उपयोग हार्मोन के स्तर को सामान्य करने में मदद करता है और सभी पीसीओएस लक्षणों का उपचार करता है, लेकिन आपको इसके प्रयोग को अच्छे से सुनिश्चित कर लेना चाहिए।

हल्की सूजन अंडाशय को अधिक टेस्टोस्टेरोन स्रावित करने के लिए उत्तेजित कर सकती है, जिससे अधिक बाल उग सकते हैं। हल्की सूजन पीसीओएस के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कारक हो सकती है।

अशोकारिष्ट, कुमार्यासव, सुकुमार कषाय और चन्द्रप्रभा वटी हल्की सूजन को भी कम करते हैं, जिससे अंततः पीसीओएस के लक्षण कम हो जाते हैं और द्रव्य से भरी डिम्बग्रंथि कोशिकाओं का उपचार होता है।

अशोकारिष्ट और कुमार्यासव का प्रयोग रोगी की अवस्था के अनुसार भिन्न है, अत: इनका प्रयोग ध्यानपूर्वक करना चाहिए।

रजोनिवृत्ति ऑस्टियोपोरोसिस (Menopausal Osteoporosis)

महिलाओं में रजोनिवृत्ति के समय अस्थि खनिज की हानि होती है। इससे ऑस्टियोपोरोसिस भी हो सकता है। अशोकारिष्ट हार्मोन को सुव्यवस्थित करने में और रजोनिवृत्ति में होने वाले नए परिवर्तनों के अनुसार शरीर को अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह अस्थि खनिज नुकसान को रोकता है। अशोकारिष्ट में उपस्थित कैल्शियम अस्थि खनिज घनत्व को बनाए रखने में मदद करता है।

ध्यान देने के लिए

कुछ मामलों में, जब अशोकारिष्ट का उपयोग अकेले किया जाता है, तो इसके परिणामस्वरूप मासिक धर्म में देरी हो जाती है। ऐसे मामलों में, खुराक को 20 मिलीलीटर से घटाकर 10 मिलीलीटर किया जाना चाहिए और इसे कुमार्यासव के साथ लिया जाना चाहिए।

खुराक

औषधीय मात्रा (Dosage)

वयस्क 15 मिलीलीटर से 20 मिलीलीटर
अधिकतम संभावित खुराक 60  मिलीलीटर

सेवन विधि

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) खाना खाने के तुरंत बाद लें
दिन में कितनी बार लें? दो या तीन बार
अनुपान (किस के साथ लें?) समान मात्रा में पानी के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

अशोकारिष्ट की सहौषध

हालांकि, जल अशोकारिष्ट के लिए उत्तम सहौषध है, लेकिन रोगानुसार कुछ औषधियां अशोकारिष्ट के साथ ली जा सकती हैं।

रोग सहायक उपचार
अत्यार्तव चन्द्रप्रभा वटी
रक्तप्रदर चंद्रप्रभा वटी, मुलेठी और आमलकी रसायन
मेनोमेट्रोरजिया (Menometrorrhagia) चंद्रप्रभा वटी, मुलेठी और आमलकी रसायन
कष्टार्तव योगराज गुग्गुलु
कब्ज के साथ कष्टार्तव दंतयारिष्ट
रजोनिवृत्ति के लक्षण सारस्वतारिष्ट
पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि सिंड्रोम (PCOS) चन्द्रप्रभा वटी, सुकुमार कषाय

सावधानी और दुष्प्रभाव

अधिकतर महिलाओं के लिए अशोकारिष्ट संभवतः सुरक्षित और सहनीय है। इस उपचार को लेने के बाद कुछ महिलाओं को जलन का एहसास हो सकता है, लेकिन यह दुष्प्रभाव केवल उन्हीं महिलाओं को होता है जिनको अम्लता या सीने में जलन की शिकायत होती है।

अशोकारिष्ट के दुष्प्रभाव

अशोकारिष्ट का सबसे आम दुष्प्रभाव माहवारी में देरी होना है।

  • माहवारी में देरी
  • मासिक धर्म ना होना
  • मासिक धर्म के रक्तस्राव में कमी

गर्भावस्था

अशोकारिष्ट का हार्मोन के स्तर पर प्रभाव पड़ता है, जो गर्भावस्था में प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसलिए, गर्भवती महिलाओं को अशोकारिष्ट टॉनिक का उपयोग करने से बचना चाहिए। हम इसे गर्भावस्था में संभवतः असुरक्षित मानते हैं।

स्तनपान

स्तनपान कराने वाली माताऐं भारी रक्तस्राव, ल्यूकोरिया या कोई भी अन्य बीमारी होने पर अशोकारिष्ट ले सकती हैं। इसका माताओं और स्तनपान करने वाले बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके आलावा, इसमें कैल्शियम की अच्छी मात्रा होती है और यह हड्डियों और जोड़ों के स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देता है।

उत्पादक

  • डाबर अशोकारिष्ट
  • बैद्यनाथ अशोकारिष्ट
  • झंडू
  • सांडू
  • पतंजलि

अशोकारिष्ट के बारे में पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मैं ऋतुस्राव के समय अशोकारिष्ट ले सकती हूँ? क्या यह मासिक धर्म को प्रभावित करता है?

हाँ, मासिक धर्म के समय अशोकारिष्ट का उपयोग किया जा सकता है। अशोकारिष्ट का उपयोग करने का मुख्य उद्देश्य गर्भाशय को शक्ति प्रदान करना और उसके कार्यों को सामान्य करना है। इसके द्वारा मासिक धर्म पर नकारात्मक रूप से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

क्या मैं अनियमित और अल्प अवधि के मासिक धर्म के लिए अशोकारिष्ट का उपयोग कर सकती हूं?

अशोकारिष्ट कम मासिक प्रवाह वाले मासिक धर्म या अल्प अवधि के मासिक धर्म (जिसे हाइपोमानोराया भी कहा जाता है) के लिए उपयुक्त औषधि नहीं है। मासिक धर्म प्रवाह को सुधारने और अनियमित मासिक धर्म का उपचार करने के लिए सबसे उपयुक्त औषधि कुमार्यासव है। दोषों और अंतर्निहित कारणों के अनुसार कुमार्यासव के साथ अन्य औषधियों की भी आवश्यकता हो सकती है।

हालाँकि, यदि आपकी माहवारी अनियमित है, लेकिन जब वो समय से पहले आती है, तो भारी रक्तस्राव और आपको पेट में दर्द होता है और कमजोरी का अनुभव होता है, तो अशोकारिष्ट का उपयोग चन्द्रप्रभा वटी और अन्य आयुर्वेदिक औषधियों के साथ दोषों के विश्लेषण के अनुसार किया जा सकता है।

क्या हम अशोकारिष्ट का उपयोग करते हुए गर्भ धारण कर सकते हैं? या क्या मुझे गर्भवती होने की योजना बनाते समय इसका उपयोग रोकना पड़ेगा?

यदि अशोकारिष्ट का उपयोग महिला बांझपन में हार्मोन के स्तर को संतुलित करने के लिए किया जाता है, तो गर्भावस्था के लिए योजना बनाते समय इसे लिया जा सकता है, लेकिन गर्भधारण की पुष्टि के तुरंत बाद इसे बंद कर देना चाहिए। अशोकारिष्ट में प्रयुक्त जड़ी-बूटियों की मात्रा भ्रूण के विकास और गर्भावस्था को प्रतिकूल रूप से प्रभावित नहीं करती है।

क्या सामान्य मासिक धर्म वाली स्त्री अशोकारिष्ट का उपयोग टॉनिक के रूप में कर सकती है?

हाँ, स्वस्थ महिलाओं द्वारा इसका उपयोग टॉनिक के रूप में किया जा सकता है। अशोकारिष्ट एक अच्छा गर्भाशय टॉनिक है और गर्भाशय की मांसपेशियों को ताकत प्रदान करता है, लेकिन किसी विशिष्ट उद्देश्य या रोग के बिना किसी भी औषधि का उपयोग करने की सलाह नहीं दी जाती है।

क्या अशोकारिष्ट महिलाओं में अनचाहे बालों या बालों के अत्यधिक विकास को रोकता है?

महिलाओं में अवांछित बालों या अत्यधिक बाल वृद्धि के कई कारण हो सकते हैं। महिलाओं में अतिरोमता का आम कारण पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि सिंड्रोम (पीसीओएस) है। अधिवृक्क ग्रंथि विकार भी बालों के अत्यधिक विकास में एक भूमिका निभा सकते हैं। किसी उपचार पर निर्भर ना होते हुए अंतर्निहित कारणों का इलाज करना सही उपचार होता है।

अशोकारिष्ट के पीसीओएस पर काम करने की संभावना है (शर्त लागू है – ऊपर पीसीओएस अनुभाग में पढ़ें), लेकिन शायद यह अकेले लाभदायक ना हो। अत: चन्द्रप्रभा वटी, शिवा गुटिका, वंग भस्म, कांचनार गुग्गुलु आदि की भी आवश्यकता हो सकती है। पीसीओएस के आयुर्वेदिक उपाय दोष और मामलों के अनुसार भिन्न हो सकते हैं, इसलिए उचित उपचार के लिए एक अच्छे आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करना ठीक रहेगा।

क्या अशोकारिष्ट अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूबों के लिए उपयोगी है?

अकेले अशोकारिष्ट अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूबों में मदद नहीं कर सकता है। वास्तव में फैलोपियन ट्यूब रुकावट के लिए सबसे अच्छा उपचार उत्तर बस्ती है।

क्या अशोकारिष्ट चॉकलेट पुटी (chocolate cyst) को हटाने / घटाने में लाभदायक है?

अंडाशय की चॉकलेट पुटी अन्तर्गर्भाशय-अस्थानता (endometriosis) के कारण होती है। चन्द्रप्रभा वटी के साथ अशोकारिष्ट अन्तर्गर्भाशय-अस्थानता और पुटी में सहायता करती है।

क्या 13 से 16 वर्ष की आयु की युवा लड़कियों को समय पूर्व और भारी मासिक धर्म के लिए अशोकारिष्ट लेना चाहिए?

हां, किसी भी आयु में अशोकारिष्ट लिया जा सकता है।

क्या अशोकारिष्ट हार्मोनल असंतुलन में मदद करता है?

हां, अशोकारिष्ट हार्मोनल असंतुलन के लिए बहुत उपयोगी है।

सूचना स्रोत (Original Article)

  1. Ashokarishta – AYURTIMES.COM

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