अश्वगंधारिष्ट मुख्यतः बृहण और बल्य औषधि है जो शरीर और मन को ताकत देती है और शरीर के घटको को मजबूत बनाती है। यह शरीर में स्फूर्ति लाता है और वीर्य की शुद्धि और वृद्धि करता है। यह रक्त वाहिनियाँ (blood vessels), वातवाहिनियों (nerves) और सभी धातुओं को सबल बनाता है और हृदय, मस्तिष्क, फेफड़े, और मांसपेशियों को बल प्रदान करता है।

इस के इलावा यह दीपन गुण से अग्नि प्रदीप्त कर मन्दाग्नि दूर करती है और पाचन गुण से भोजन के पचने में सहायक है। यह उत्तम वातनाशक और वृष्य है जिस से इस का व्यवहार वातव्याधि और पुरषो के रोगों (ध्वजभंगता और नामर्दी) में किया जाता है। यह मानसिक रोग जैसे मष्तिष्क की निर्बलता, उन्माद, तनाव, अवसाद (डिप्रेशन), चिंता आदि में भी उपयोगी है। इस के इलावा यह अन्य बहुत से विकारों में लाभ देता है जैसे कि प्रमेह, शोष, बवासीर, मूर्छा, भ्रम, मृगी, हृदयरोग आदि। यह औषधि इन विकारों में लाभ के साथ साथ शरीर में स्फूर्ति एवं वीर्य की शुद्धि और वृद्धि करती है।

घटक द्रव्य  एवं निर्माण विधि

घटक द्रव्यों के नाममात्रा
असगंध2400 ग्राम
सफ़ेद मूसली960 ग्राम
मजीठ480 ग्राम
हरड़480 ग्राम
हल्दी480 ग्राम
दारुहल्दी480 ग्राम
मुलहठी480 ग्राम
रास्ना480 ग्राम
विदारीकंद480 ग्राम
अर्जुन की छाल480 ग्राम
नागरमोथा480 ग्राम
निसोत480 ग्राम
अनंतमूल सफ़ेद384 ग्राम
अनंतमूल काला384 ग्राम
सफ़ेद चन्दन384 ग्राम
लाल चन्दन384 ग्राम
बच384 ग्राम
चीते की छाल384 ग्राम
पानीलगभग 100 लीटर
धाय के फूल768 ग्राम
शहद9.6 किलो
सोंठ96 ग्राम
मिर्च96 ग्राम
पीपल96 ग्राम
दालचीनी192 ग्राम
तेजपत्ता192 ग्राम
इलायची192 ग्राम
नागकेशर96 ग्राम
प्रियंगु192 ग्राम

निर्माण विधि

अश्वगंधारिष्ट के घटक और निर्माण करने की विधि इस प्रकार है।

अश्वगंधारिष्ट के निर्माण के लिए सबसे पहले लें – असगंध लगभग 2400 ग्राम, सफ़ेद मूसली लगभग 960 ग्राम, मजीठ, हरड़, हल्दी, दारुहल्दी, मुलहठी, रास्ना, विदारीकंद, अर्जुन की छाल, नागरमोथा, निसोत प्रत्येक लगभग 480 ग्राम, और अनंतमूल सफ़ेद, अनंतमूल काला, सफ़ेद चन्दन, लाल चन्दन, बच, चीते की छाल प्रत्येक को लगभग 384 ग्राम लें।

इन सभी सामग्रियों को कूट लें और लगभग 100 लीटर पानी में उबालें। जब जल का आठवां हिस्सा रह जाए तो इसे आग से उतार कर छान लें।

ठन्डे होने के बाद इसे चीनी या मिटटी के पात्र में भर लें।

फिर इसमें धाय के फूल लगभग 768 ग्राम, शहद लगभग 9.6 किलो, त्रिकुट (सोंठ, मिर्च, पीपल) प्रत्येक लगभग 96 ग्राम, त्रिजात (दालचीनी, तेजपत्ता, इलायची) प्रत्येक लगभग 192 ग्राम, नागकेशर लगभग 96 ग्राम और प्रियंगु लगभग 192 ग्राम मिलाएं।

अच्छी तरह मिलाने के बाद इस पात्र को अच्छी तरह बंद करके दो महीने के लिए रख दें। इसके पश्चात इसे छान लें। अश्वगंधारिष्ट तैयार है।

औषधीय कर्म (Medicinal Actions)

दोष कर्म (Dosha Action)वात शामक
  • आक्षेपशमन – Anticonvulsant
  • निद्राजनन – नींद लाने वाली
  • वेदनास्थापन – पीड़ाहर (दर्द निवारक)
  • स्मरण शक्ति वर्धक
  • ह्रदय – दिल को ताकत देने वाला
  • रक्तभारशामक
  • शोथहर
  • क्षुधावर्धक – भूख बढ़ाने वाला
  • पाचन – पाचन शक्ति बढाने वाली
  • अनुलोमन
  • दीपन
  • अर्शोघ्न
  • प्रजास्थापन
  • गर्भाशयसंकोचक
  • वाजीकरण
  • शुक्रजनन
  • शुक्रस्तम्भन
  • शुक्रशोधन
  • शुक्रवर्धन
  • जीवनीय
  • वल्य
  • ओजोबर्धक
  • रसायन
  • श्रमहर
  • अंगमर्दप्रशमन
  • बृहण

चिकित्सकीय संकेत (Indications)

  • क्षीण प्रतिरोधक क्षमता में कमी
  • मानसिक दुर्बलता
  • स्मरण शक्ति की क्षति
  • उन्माद (विक्षिप्तता)
  • तनाव
  • चिंता
  • वातव्याधि
  • मिर्गी
  • अनिद्रा
  • डिप्रेशन (अवसाद)
  • हृदय की निर्बलता या कमजोरी
  • व्यसन या बुढ़ापे के माध्यम से पुरुष शक्ति कम होने पर
  • ध्वजभंगता
  • नामर्दी
  • प्रमेह

अश्वगंधारिष्ट लाभ एवं औषधीय प्रयोग (Benefits & Uses)

अश्वगंधारिष्ट में बल्य गुण है जिस से यह मन और शरीर को बल प्रदान करता है। इस के कुछ मुख्य लाभ और प्रयोग निम्नलिखित है।

मानसिक रोग

अश्वगंधारिष्ट मन को शांति देने वाला और मानसिक रोगों का शमन करने वाली उत्तम आयुर्वेदिक दवा है। इस का उपयोग स्त्रिओ में होने वाले हिस्टीरिया रोग में होता है। यह मानसिक कमजोरी, थकावट और तनाव के लिए अच्छी दवा है। यह मूर्छा और उन्माद आदि में भी लाभदायक है।

आमवात (Rheumatoid Arthritis)

आमवात आमविष से उत्पन होने वाली व्यादि है। इस में अश्वगंधारिष्ट शरीर में संचित आमविष को नष्ट करता है।  यह नए (acute) आमवात की उपेक्षा जीर्ण आमवात (पुराने रोग) में ज्यादा लाभदायक है।

मंदाग्नि और कमजोरी से उत्पन होने वाले रोगों में यह उत्तम औषधि है

यह आमाशय में अग्नि प्रदीप्त करता है और भूख बढ़ाता है। इस में पाचन गुण भी है जो पाचन शक्ति बढ़ाता है। मंदाग्नि और कमजोरी से उत्पन होने वाले रोगों में यह उत्तम औषधि है।

नपुंसकता (नामर्दी) या शक्तिहीनता

पुरुषों में शारीरिक दुर्बलता के कारण आयी नपुंसकता (नामर्दी) और शक्तिहीनता को दूर करता है। वीर्य की वृद्धि करता है और शारीरिक बल बढ़ाता है।

प्रसूता स्त्री की निर्बलता

यदि इस का प्रयोग प्रसूता स्त्री में दशमूलारिष्ट के साथ किया जाए तो यह शरीर में उत्पन हुई निर्बलता को दूर करता है और अन्य सूतिका रोगों से बचाता है।

मात्रा एवं सेवन विधि (Dosage)

अश्वगंधारिष्ट (Ashwagandharishta) की सामान्य औषधीय मात्रा व खुराक इस प्रकार है:

औषधीय मात्रा (Dosage)

बच्चे5 से 10 मिलीलीटर
वयस्क10 से 25 मिलीलीटर

सेवन विधि

अश्वगंधारिष्ट (Ashwagandharishta) को भोजन ग्रहण करने के पश्चात जल की सामान मात्रा के साथ लें।

दवा लेने का उचित समय (कब लें?)सुबह और रात्रि भोजन के बाद
दिन में कितनी बार लें?2 बार
अनुपान (किस के साथ लें?)बराबर मात्रा गुनगुना पानी मिला कर
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें)कम से कम 3 महीने और चिकित्सक की सलाह लें

दुष्प्रभाव (Side Effects)

यदि अश्वगंधारिष्ट (Ashwagandharishta) का प्रयोग व सेवन निर्धारित मात्रा (खुराक) में चिकित्सा पर्यवेक्षक के अंतर्गत किया जाए तो अश्वगंधारिष्ट के कोई दुष्परिणाम नहीं मिलते।

संदर्भ

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