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जड़ी बूटी

भृंगराज के लाभ, प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

भृंगराज (Bhringraj) एक सुप्रसिद्ध औषधि है जो यकृत विकारों और केश वर्धन में उसके उपयोग और लाभ के लिए जानी जाती है। यह त्वचा रोगों, खांसी, अस्थमा, नेत्र विकार और सिर के किसी भी हिस्से से संबंधित विकारों के लिए भी प्रभावी औषधि है। यह बालों की बढ़वार में सुधार करती है, बालों को झड़ने से रोकती है और समय से पहले बालों के पकने का उपचार करती है। यह त्वचा के…
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हरड़ (हरीतकी) के लाभ, प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

आयुर्वेद चिकित्सा में हरीतकी अमृत के समान एक बहुत ही प्रभावशाली औषधि मानी गयी है। इसका वानस्पतिक नाम Terminalia Chebula है और आम बोलचाल की हिंदी भाषा में इसे हरड़ या हर्रे भी कहते हैं। इसके अतिरिक्त आयुर्वेद साहित्य में इस औषधि को विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे विजया, कायस्था, अमृता, प्राणदा आदि। मुख्य रूप से हरीतकी के वृक्ष पांच हज़ार फ़ुट की…
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शिवलिंगी बीज

शिवलिंगी बीज एक आयुर्वेदिक औषधि हैं जिसका घटक सिर्फ एक बीज ही हैं और वो हैं ब्रयोनोप्सिस लेसिनियोसा का बीज जिसे समान्यतया शिवलिंगी कहा जाता हैं। शिवलिंगी बीज का प्रयोग पुरे देश में प्रजनन क्षमता बढ़ाने और स्त्रियों के रोग विकारो को दूर करने के लिए किया जाता हैं,इसका प्रयोग स्वस्थ बच्चे के जन्म के लिए भी किया जाता हैं। इसके अलावा  शिवलिंगी बीज लिवर,…
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जड़ी बूटियों के नाम

प्राचीन काल से ही जड़ी बूटियों का प्रयोग आयुर्वेद और अन्य चिकित्सा प्रणालियों में स्वास्थ्य लाभ के किया जाता रहा हैं। उनमें से हम कुछ विशेष जड़ी बूटियों के नाम की सूची यहाँ दे रहे हैं। जड़ी बूटियों के नामों की सूची जड़ी बूटियों के नाम की सूची हिंदी में निम्नलिखित हैं: अगरु अगस्त्य अग्निमन्थ अजमोदा अतसी अतिबला अतिविषा…
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उलट कम्बल

उलट कम्बल गर्भाशय संबंधी विकारो की रोकथाम के लिए उपयुक्त औषधि हैं। इसके अलावा इसका सेवन करने से गठिया, गठिये में होने वाले दर्द, कष्टार्तव, मधुमेह जैसी समस्याओं में फायदा होता हैं। उलट कम्बल से साइनसाइटिस से होने वाले सिरदर्द से भी राहत मिलती हैं। औषधीय भाग जड़ और जड़ की छाल उलट कम्बल (एब्रोमा ऑगस्टा) का महत्वपूर्ण औषधीय भाग हैं। इसकी जड़ों का…
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सौंफ (Saunf) के अद्भुत फायदे, प्रयोग, गुण-कर्म, सेवन विधि और दुष्प्रभाव के बारे में जानें

सौंफ (Saunf) भारत की एक प्रसिद्ध खाद्य योजक है जिसका प्रयोग न केवल भोजन में हालाँकि औषधि के रूप में भी किया जाता है। आयुर्वेद में इसके कई विशेष गुणों का वर्णन किया गया है। सौंफ को इंग्लिश में फेंनेल सीड (Fennel Seeds) कहा जाता है और यह Foeniculum Vulgare पौधे के यह बीज होते है। सौंफ़ सुगन्धित और स्वादिष्ट सूखे बीज होते हैं। यह शानदार स्वाद प्रदान…
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अलसी के बीज लाभ, उपयोग, मात्रा और दुष्प्रभाव

अलसी बीज, जिसको फ्लैक्स सीड्स (flax seeds) के नाम से भी जाना जाता है, हृदय रोग, पाचन रोग, कैंसर और मधुमेह में लाभप्रद होते हैं। अलसी के बीज दुनिया के प्रसिद्ध सुपर खाद्य पदार्थों में से एक है। यह बीज बहुत ही पौष्टिक होते हैं और कई बीमारियों को रोकने में मदद करते हैं। यह आवश्यक फैटी एसिड ओमेगा -3 से भरपूर होते हैं। अलसी बीजों में भरपूर मात्रा में…
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पुत्रजीवक बीज (Putrajeevak Beej)

पुत्रजीवक बीज (Putrajeevak Beej) आयुर्वेद में एक अद्भुद औषधि है जिसका प्रभाव गर्भकर है। इसका अर्थ है कि यह स्त्री को गर्भधारण करने में सहायक सिद्ध होती है और महिलायों के बाँझपन को दूर करती है। बांझपन की चिकित्सा के लिए आयुर्वेद में इसका प्रयोग प्राचीन काल से ही हो रहा है। जिन महिलायो को बार बार गर्भपात जैसी समस्या का सामना करना पड़ता हैं, उनके…
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रुद्रवंती (रुदंती) – Rudravanti (Rudanti)

रुद्रवंती (रुद्रवन्ती) को रुदंती भी कहा जाता है। यह आयुर्वेद में एक रसायन और क्षयकृमिनाशक माना जाता है। इस का प्रयोग क्षय रोग, कास, श्वास (asthma) और अन्य श्वसन प्रणाली की बीमारियों के उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है। यह आंतरिक शक्ति और शारीरिक शक्ति को बढ़ाता है। शरीर को बल प्रदान कर शारीरिक कमजोरी को दूर करता है। इसका मुख्य प्रभाव फेफड़ों पर…
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सफेद मूसली (Safed Musli)

सफेद मूसली (मुशली - Safed Musli) आयुर्वेद में एक बृहण और बल्य औषधि है जिसका  मतलब है यह शरीर को बल और ऊर्जा प्रदान करती है। यह शरीर के सामर्थ्य को बढ़ाती है और शरीर के लिए उत्तम पोषक औषधि है। यह पचने में भारी और शीतवीर्य आयुर्वेदिक हर्ब है। यह जीविनीय शक्ति की वृद्धि करती है और रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ाती है। इस का प्रयोग पुरुषों में अधिक किया जाता…
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