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आयुर्वेदिक दवाइयाँ

हिमालय लिव 52 के लाभ एवं औषधीय मात्रा

लिव 52 (Himalaya Liv 52) यकृत रोग (liver disorders) में लाभकारी औषधि है। यह यकृत की क्रिया को सुधारने वाली औषधि है। इसमें कुछ क्षुधा वर्धक जड़ी बूटियाँ मिली हुई हैं जो पाचन और भूख में सुधार करने में मदद करती हैं। यह यकृत के लगभग सभी प्रकार के विषाक्त पदार्थों के खिलाफ रक्षात्मक कार्रवाई करती हैं और शराब पीने वाले लोगों के यकृत की रक्षा करती है।…
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हिमालय पाइलेक्स टैबलेट्स – बवासीर के लिए अच्छी दवा

हिमालय पाईलेक्स, हिमालय ड्रग कंपनी द्वारा निर्मित एक आयुर्वेदिक औषधि है। दो प्रकार के उत्पाद उपलब्ध हैं - पाईलेक्स गोलियाँ और पाईलेक्स मरहम। पाईलेक्स गोलियाँ को बवासीर के प्रबंधन के लिए दिया जाता है और पाईलेक्स मरहम का उपयोग खुजली, असुविधा और दर्द को कम करने के लिए किया जाता है।
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हिमालय टेन्टेक्स फोर्ट के लाभ, औषधीय मात्रा, सेवन विधि एवं दुष्प्रभाव

टेन्टेक्स फोर्ट हिमालय कंपनी का एक कामोद्दीपक दवा है जो क्षमता और प्रदर्शन को बढ़ाने में मदद करता है। टेन्टेक्स फोर्ट में प्राकृतिक जड़ी बूटियाँ और आयुर्वेदिक खनिज (भस्म) हैं जो इसके कामोद्दीपक गुणों के लिए जिम्मेदार होते हैं। यह पुरुषों में कामेच्छा उत्तेजक के रूप में काम करता है और समग्र प्रदर्शन को बेहतर बनाता है। भावनात्मक तनाव हाईपोथेलेमिक…
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हिमालय कॉन्फीडो टेबलेट

हिमालय कॉन्फीडो टेबलेट (Himalaya Confido Tablet) एक आयुर्वेदिक प्रोप्राइटरी औषधि है जिसका उपयोग शीघ्र पतन, वीर्यपात और स्वप्न दोष के प्रबंधन के लिए किया जाता है। इन रोगों से पीड़ित लोगों के लिए यह गैर-हार्मोन चिकित्सा है। कॉन्फीडो ताकत प्रदान करने के साथ-साथ प्रदर्शन के साथ जुड़ी चिंता और निर्वहन प्रक्रिया (Discharge process) को भी नियंत्रित करता…
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एम 2 टोन सिरप और एम 2 टोन टेबलेट (M2 Tone Syrup and Tablet)

एम 2 टोन सिरप और एम 2 टोन टेबलेट (M2 Tone Syrup and Tablet) आयुर्वेदिक औषधि है जिसे मासिक अनियमितताओं, भारी रक्तस्राव, गर्भाशय की शिथिलता, अनार्तव (Amenorrhea), डिंबक्षरण (anovulation) और बांझपन के लिए उपयोग किया जाता है। एम 2 टोन गोलियों और सिरप के रूप में उपलब्ध है। दोनों में लगभग सभी घटक समान हैं और समान लाभ प्रदान करते हैं। चरक फार्मा…
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कुमकुमादि तैल के घटक द्रव्य, लाभ एवं उपयोग विधि

कुमकुमादि तैल (कुंकुमादि तैलम्) त्वचा की चमक और रंगत में सुधार करता है। इसका उपयोग एक मॉइस्चराइजर (Moisturizer) के रूप में भी किया जा सकता है। यह लगभग हर प्रकार की त्वचा के लिए उपयुक्त है, विशेष रूप से शुष्क त्वचा के लिए बहुत ही लाभप्रद है। यह त्वचा की चमक बढ़ाता है और साथ ही काले धब्बे, काले घेरे, निशान, और हाइपरपिगमेंटेशन (hyperpigmentation) को…
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बिल्वादि गुलिका के घटक द्रव्य, प्रयोग एवं लाभ, मात्रा, दुष्प्रभाव

विल्वादि गुलिका (जिसे विल्वादि अगद, विल्वादि वटी, बिल्वादि गुटिका भी कहते हैं) विभिन्न घटकों से बनी एक आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका उपयोग साँप काटने, बिच्छू के डंक, मकड़ी के काटने, चूहे के काटने, आंत्रशोथ, हैजा, अपच और बुखार के उपचार में किया जाता है। आम तौर पर, यह मानव शरीर में किसी भी अंतर्निहित कारण या पशु मूल के जहरीले पदार्थ के कारण विकसित…
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कर्पूरादि तैलम् घटक द्रव्य, लाभ, एवं उपयोग विधि

कर्पूरादि तैलम् (Karpooradi Thailam), जो कर्पूरादि तेल या कर्पूरादि थैलम के नाम से भी जाना जाता है, एक मालिश के उपयोग में आने वाला आयुर्वेदिक तेल (Ayurvedic massage oil) है। इसका उपयोग ऐंठन, दर्द, अकड़न और सुन्नपना को कम करने के लिए किया जाता है। इसमें कपूर और तिल का तेल होता है। मांसपेशियों की ऐंठन, अकड़न के साथ शरीर में दर्द, जोड़ों में दर्द, गर्दन…
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अजमोदादि चूर्ण के लाभ, प्रयोग, घटक द्रव्य, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

अजमोदादि चूर्ण विभिन्न अवयवों से बनी औषधि है जिसका उपयोग संधिशोथ (Rheumatoid Arthritis),  गृध्रसी (Sciatica), पीठ दर्द और कफ विकारों के उपचार के लिए किया जाता है। इसमें शक्तिशाली दाहक विरोधी गुण हैं। यह जोड़ों की सूजन और जोड़ों के विकारों के कारण होने वाले तेज दर्द को कम करता है। यह आम दोष के पाचन और निष्कासन को भी प्रेरित करता है। इसलिए, यह आयुर्वेद…
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अग्निमुख चूर्ण के गुण-कर्म, प्रयोग, लाभ, मात्रा और दुष्प्रभाव

अग्निमुख चूर्ण का प्रयोग अग्नि वर्धक औषधि के रूप में किया जाता है। अग्निमुख चूर्ण मंदाग्नि में अच्छा काम करता है। भूख लगाता है और पेट की वायु का नाश करता है। इसका प्रयोग वात और कफ प्रधान विकार में करना ही हितकर है। इस औषधि के गरम वीर्य होने से इसका प्रयोग पित्त प्रधान रोगों में न करना ही उचित माना जाता है। क्योंकि यह पित्त को बढ़ाता है और शरीर में…
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