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वटी गुटिका

अलग अलग प्रकार की औषधियों एवं जड़ी बूटियों को बारीक पीसकर शहद, चासनी, खांड़ आदि में मिलाकर या पानी, जड़ी बूटी स्वरस, काढ़े आदि में पकाकर जो गोलियां बनायी जाती हैं, उन्हें गुटिका या वटी कहा जाता है।

पुराने समय में यह हाथ से बनाई जाती थी जिससे गोलियां का आकार छोटा बड़ा हो सकता था। अब यह मशीन से बनाई जाती है और मात्रा भी प्रत्येक गोली की उचित होती है।

अग्निवर्द्धक बटी (Agni Vardhak Vati)

अग्निवर्द्धक वटी (Agni Vardhak Vati) पाचक अग्नि की वृद्धि करती है और भूख लगाती है। यह उन रोगियों के लिए लाभदायक है जिन को भूख नहीं लगती या पाचक रसों का उचित स्राव नहीं होता। पाचक रसों का उचित स्राव न होने से रोगी को खाना खाने के बाद पेट में भारीपन रहता है और डकार आते रहते है। यह उन रोगियों के लिए तो अमृत के समान काम करती है। इसके अलावा यह खुलकर…
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चंद्रप्रभा वटी

चंद्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati) को चंद्रप्रभा गुलिका और चंद्रप्रभा वाटिका भी कहा जाता है। यह एक अति उत्कृष्ट आयुर्वेदिक औषधि है जिसका प्रभाव गुर्दे, मूत्राशय, मूत्र पथ, अग्न्याशय, हड्डियों, जोड़ों और थायरॉयड ग्रंथि आदि अंगों पर पड़ता है। इसका प्रयोग इन अंगों से संबंधित रोगों के उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है। इसकी सिफारिश मधुमेह, पुरुषों की…
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गिलोय घन वटी घटक द्रव्य, औषधीय कर्म, उपयोग, लाभ, मात्रा तथा दुष्प्रभाव

गिलोय घन वटी (Giloy Ghan Vati) गिलोय के सत्व (extract) से बनाई जाती है। गिलोय चिकित्सकों के बीच एक लोकप्रिय जड़ी बूटी है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियों में भी किया जाता है। संस्कृत में, गिलोय को 'अमृता' कहते हैं, जो इसके औषधीय गुणों के कारण कहा जाता है। गिलोय सदा अमर रहने वाली बेल है और इसके अनगिनत लाभ हैं। नीम के पेड़ पर चढ़ी हुई…
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