बीजीआर 34 शुगर ( मधुमेह) के लिए

भारत में ५० लाख से आधिक लोग टाइप-२ मधूमेह रोग से ग्रसित हैं l भारत को मधूमेह की राजधामनी के नाम से भी जाना जाता है l सामान्य शब्दों में टाइप-१ मधूमेह इन्सुलिन के अपर्याप्त उत्पादन एवम स्त्राव के कारन होता है जबकि टाइप-२ मधूमेह इन्सुलिन के दोषपूर्ण प्रतिक्रिया के कारन होता है l आधुनिक मधूमेह औषिधियों के दुष्प्रभाव एवम विषक्ता चर्चा का विषय है l भारतीय वैज्ञानिक एक लम्बे समय से मधूमेह के सस्ते एवम प्रभावी उपचार के लिए गहन अनुसंधान में व्यस्त हैं l  बीजीआर ३४ भारतीय अनुसंधानकर्ताओं के सफलता का उदाहरण है l

सीएसआईआर (वैज्ञानिक एवम औषिधि अनुसंधान परिषद्, भारत) की दो प्रयोगशालाएँ सीएसआईपी–एनबीआरआई (राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ) तथा सीएसआईआर – सीआईऍमऐपी (केंद्रीय औषिधिय एवं सगंध पौधा संसथान,लखनऊ) ने संयुक्त रूप से मधूमेह के लिए आर्युवेदिक औषिधि बीजीआर ३४ की खोज की हैं l भारत सरकार ने बीजीआर ३४ को मधूमेह के उपचार के लिए अनुमोदित किया है l वर्तमान में ये बाज़ार में टेबलेट के रूप में उपलब्ध हे l बीजीआर ३४ के उत्पादन का लाइसेंस अमिल फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया है l

बीजीआर ३४ टेबलेट मुख्यतः अर्युवेदिक पौधों, जिनका उपयोग पहले से मधूमेह के उपचार में किया जाता था, के मिश्रण से बनाया गया हे l इन मिश्रण को मधूमेह तथा ब्लड सुगर के नियंत्रण में प्रभावी माना गया है तथा चिकित्सयी समर्थन एवम स्वीकृति दी गयी हे l

बीजीआर ३४ नामोलेखन

१.बी – ब्लड

२ जी – ग्लूकोस

३ आर – रेगुलेटर

सामग्री एवम सरंचना –

बीजीआर ३४ का मुख्य घटक दारुहल्दी हे l दारुहल्दी एक महत्वपूर्ण ब्लड ग्लूकोस नियंत्रक तथा इन्सुलिन स्त्राव के प्रोह्त्साहक के रोप में जाना जाता हे l

बीजीआर ३४ के मुख्य घटक निम्नलिखित है।

संघटक का नाम मात्रा
दारुहल्दी सत्त 1150 मिलीग्राम
विजयसार सत्त 400 मिलीग्राम
गुडमार सत्त 400 मिलीग्राम
मंजिष्ठा सत्त 375 मिलीग्राम
मेथी सत्त 350 मिलीग्राम
गिलोय – Tinospora Cordifolia सत्त 350 मिलीग्राम
दारुहल्दी चूर्ण 75 मिलीग्राम
विजयसार चूर्ण 25 मिलीग्राम
गुडमार चूर्ण 25 मिलीग्राम
मंजिष्ठा चूर्ण 25 मिलीग्राम
मेथी चूर्ण 25 मिलीग्राम
गिलोय – Tinospora Cordifolia चूर्ण 25 मिलीग्राम
शुद्ध शिलाजीत 10 मिलीग्राम

बीजीआर के ३४ सक्रिय घटक

बीजीआर 34 में 34 सक्रिय सिधांत तथा फोटोकेमिकाल्स सम्मिलित हैं, जिनका अध्यन एवम उपयोग मधूमेह विरोधी प्रभाव के लिया किया जाता है l

दारुहल्दी (Berberis Aristata)

फाईटोकेमिकल                 प्रक्रिया
बेर्बेरिन (BERBERINE ) प्रबल DPP4 अवरोधक
बेर्बमिने (BERBAMINE) ब्लड ग्लूकोस नियंत्रक
पलमटिन् (PALMATINE) ब्लड ग्लूकोस नियंत्रक
डी हाएड्रो चीलेन्तिफ़ोलिन् (DEHYDROCHEILANTHIFOLINE) इन्सुलिन सत्रावक
6 ओक्सो बेर्बीन् (6-OXO BERBERINE ) ग्लूकोस सम्स्थापक नियंत्रक
कोलम्बमीन् (COLUMBAMINE) इन्सुलिन सत्रावक
जट्रोरिप्फिज़िन् (JATRORRHIZINE) इन्सुलिन सत्रावक

मंजिष्ठा (Rubia Cordifolia)

फाईटोकेमिकल                 प्रक्रिया
रुबिअडिन् (RUBIADIN) ग्लूकोज की वृद्धि की परिधीय उपयोग के कारण इंसुलिन प्रभाव को संभावित करना
पुर्पुरिन (PURPURIN) गहन एंटी ओक्सिदेंत्न क्रिया
जेन्थओपुरिन (XANTHOPURIN) गहन एंटी ओक्सिदेंत्न क्रिया
मंजिस्तीं (MANJISTIN) प्रभावी प्रतिरक्षा प्रभाव
सुडोपुरिन (PSEUDOPURIN) प्रभावी प्रतिरक्षा प्रभाव

मेथी (Trigonella Foenum-Graecum)

फाईटोकेमिकल                 प्रक्रिया
4 हाईड्रो आयीसोल्युसिन् (4HYDROXY ISOLEUCINE) इन्सुलिनोत्रोपिक क्रिया
गेलेक्टो मेनोन् (GALACTOMANNAN) ग्लूकोस सम्स्थापक नियंत्रक
अल्फ़ा टेकोफ़ेरोल् (ALPHA-TOCOPHEROL) ग्लाईको जाईलटे हिमोग्लोबीन् लेवेल् को कम् कारना
फ़ेनू ग्रीकाईन् (FENUGREEKINE) ब्लड ग्लूकोस के स्तर को मेटाबोलिज्म लेवल कम करके बनाये रखना
स्कोपोलेटीन् (SCOPOLETIN) ब्लड ग्लूकोस नियंत्रक
ट्रिगोनीलिन् (TRIGONELLINE)             ब्लड ग्लूकोस नियंत्रक

विजयसार (Pterocarpus Marsupium)

फाईटोकेमिकल                 प्रक्रिया
टेर्सो स्ट्य्लीबएन् (PTEROSTILLBENE) पैंक्रियास बीता कोशिका का रेग्रनुँलाशन
मार्सुपीन् (MARSUPIN) इन्सुलोजेनिक
टेरो सुपीन् (PTEROSUPIN) इन्सुलोजेनिक
लिक्विईटगेरीन् (LIQUIRTIGENIN) इन्सुलोजेनिक
एपिकटेचीन् ( EPICATECHIN) प्रो इन्सुलिन को इन्स्य्लिने में परिवर्तित करना
क़ुअर्सिटीन् (QUERCITIN) ब्लड ग्लूकोस रेगुलेटर
माईर्सीटीन् (MYRCETIN) ब्लड ग्लूकोस रेगुलेटर
आईसो लीक्वीट्रिजेन् (ISOLIQUIRTIGENIN) एंटी-ह्य्पेर्गल्य्समिक

गिलोय

फाईटोकेमिकल                 प्रक्रिया
पाल्मेटाईन् (PALMATINE ) इन्सुलिन मिमिकिंग प्रभाव
जट्रोप्रिजिन् (JATRORRHIZINE) इन्सुलिन मिमिकिंग प्रभाव
मग्नोफ़्लिरीन् (MAGNOFLORINE) इन्सुलिन मिमिकिंग प्रभाव

गुड़मार

फाईटोकेमिकल                 प्रक्रिया
जीम्नेमिक् एसीड् (GYMNEMIC ACID) ग्लूकोस अवशोषणको विलम्ब करना, अग्नाशय कोशिका को पुनः बनाना, incretine गतिविधि को modulate करना
गूर् मरीन् (GURMARIN) इन्क्रेताईं अनुकरण क्रिया,ग्लूकोस अवशोषण में विलम्ब करना,स्वाद कलिकाओं की मीठा तथा करवा पहचानने की क्षमता से हस्तक्षेप करना
जिम्ने मेग्नीन् (GYMNEMAGENIN) एंटीओक्स्कसिदेंत, ग्लूकोस सम्स्थापक नियंत्रक
डाई ह्य्ड्रोक्सी जीम्नमिक् ट्राए एसेटेट् (DIHYDROXY GYMNEMIC TRIACETATE) इन्सुलिन सत्रावक
आईसो कुइनोलीन् (ISOQUINOLINE) इन्सुलिन सत्रावक

औषधीय कर्म (Medicinal Actions)

बीजीआर 34 में निम्नलिखित औषधीय गुण है:

प्रमुख उपचारात्मक गुण

  • मधुमेह नियंत्रक
  • मधुमेहहर
  • रक्त शर्करा नियंत्रक
  • रक्त शर्करा की वृद्धि को रोकने वाला
  • प्रतिउपचायक – एंटीऑक्सीडेंट
  • ह्रदय – दिल को ताकत देने वाला
  • प्रभावी DDP-4 अवरोधक
  • शोथहर (Anti-inflammatory)
  • एडेप्टोजेनिक्(Adaptogenic)

बीजीआर 34 ग्लूकोज की संस्थापन को नियंत्रित करता है, समर्थक इंसुलिन से इंसुलिन बनाता है, और रक्त में एचबीए 1 सी का स्तर कम करने में मदद करता है।

बीजीआर 34 मधुमेह में लाभ

बीजीआर 34 दवा अग्न्याशय क्रिया में सुधार करती है। कोशिकाओं को नुकसान से बचाती है तथा भोजन से ग्लूकोज के अवशोषण में देरी कर मधुमेह को नियमित करने में मदद करता है।

संदर्भ

  1. BGR 34 – AYURTIMES.COM
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