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जड़ी बूटी

काली जीरी के लाभ एवं उपयोग, गुण और काली जीरी के नुकसान

काली जीरी का प्रयोग अजवायन और मेथी के साथ वजन कम करने और पाचन क्रिया को ससूधारने के लिए लोकप्रिय है। इसका उपयोग त्वचा रोगों के उपचार के लिए किया जाता है। यह खुजली को कम करने में मदद करती है। इसे रक्त शोधक ​​माना जाता है क्योंकि यह रक्त से विषाक्त पदार्थों को निकालता है। काली जीरी पेट की क्रिमियो के लिए एक उत्कृष्ट आयुर्वेदिक औषधि हैं। यह क्षुधा को…
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मुलेठी के फायदे एवं उपयोग, गुण और मुलेठी के नुकसान

आयुर्वेद में मुलेठी को यष्टिमधु भी कहते हैं। यह भारतीय औषधियों, घरेलू उपचार, लोक औषधि और आयुर्वेद में प्रयुक्त होने वाली एक महत्वपूर्ण जड़ी बूटी है। मुलेठी अति अम्लता, व्रण, सामान्य दुर्बलता, जोड़ों के दर्द और कुछ अन्य रोगों में प्रयुक्त की जाती है। इसके औषधीय गुणों के कारण यह इन रोगों में लाभकारी होती है। यह एक अच्छी दाह नाशक और पीड़ाहर औषधि है। यह…
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अगरु (अगर) के लाभ, प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

अगरु (Agaru) को अगर भी कहा जाता हैं। आयुर्वेद में इसका प्रयोग श्वसनीशोध,अस्थमा, घाव, आंतों की कीड़े, मुँह की बदबू, भूख न लगना,आंत्र गैस, हृदय की कमजोरी, गठिया, लगातार हिचकी आना, एनरेसिस, कैल्यूरिया, ठण्ड के साथ बुखार और पुरुष प्रजनन तंत्र के रोगों के इलाज़ के लिए किया जाता हैं।
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आलू बुखारा के फायदे और नुकसान

आलू बुखारा एक बहुत ही स्वादिष्ट और पौष्टिक फल है। इसका स्वाद खाने में खट्टा मीठा होता है और अच्छी तरह पकने के बाद यह और भी स्वादिष्ट हो जाता है। आलू बुखारा की पैदावार पर्शिया, ग्रीस और अरब देशों में प्रमुख रूप से होती है। आलू बुखारा अधिकतर बुखारे की तरफ से आता है इस लिए भी इसे आलू बुखारा कहते है। यह प्लम, प्रून, डैमसन आदि नामों से भी जाना जाता है,…
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शंखपुष्पी के स्वास्थ्य लाभ

शंखपुष्पी (Shankhpushpi) का वनस्पति नाम “कोनोवुल्लूस प्लूरिकालिस (Convolvulus Pluricaulis)” है। यह अपने चिकित्सीय गुणों के कारण आयुर्वेद में प्रयोग होने वाली एक बहुत महत्वपूर्ण जड़ी बूटी है। यह औषधि मानसिक शक्ति और स्मृति को बढ़ाने, एकाग्रता में सुधार करने और याद करने की क्षमता में वृद्धि करने में फायदेमंद है। चिकित्सकीय रूप से, शंखपुष्पी अनिद्रा…
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अडूसा (वासा)

अडूसा जिसे वासा भी कहा जाता है एक आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है। इस पौधे का प्रयोग खांसी, अस्थमा, साँस की तकलीफ, नाक बंद होना, रक्तस्राव संबंधी विकार, एलर्जी, श्वसन प्रणाली के संक्रमण, गर्भाशय से अत्यधिक रक्तस्राव, माहवारी  में अत्यधिक खून बहना, और नाक से खून बहना आदि समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है।
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भृंगराज के लाभ, प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

भृंगराज (Bhringraj) एक सुप्रसिद्ध औषधि है जो यकृत विकारों और केश वर्धन में उसके उपयोग और लाभ के लिए जानी जाती है। यह त्वचा रोगों, खांसी, अस्थमा, नेत्र विकार और सिर के किसी भी हिस्से से संबंधित विकारों के लिए भी प्रभावी औषधि है। यह बालों की बढ़वार में सुधार करती है, बालों को झड़ने से रोकती है और समय से पहले बालों के पकने का उपचार करती है। यह त्वचा के…
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हरड़ (हरीतकी) के लाभ, प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

आयुर्वेद चिकित्सा में हरीतकी अमृत के समान एक बहुत ही प्रभावशाली औषधि मानी गयी है। इसका वानस्पतिक नाम Terminalia Chebula है और आम बोलचाल की हिंदी भाषा में इसे हरड़ या हर्रे भी कहते हैं। इसके अतिरिक्त आयुर्वेद साहित्य में इस औषधि को विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे विजया, कायस्था, अमृता, प्राणदा आदि। मुख्य रूप से हरीतकी के वृक्ष पांच हज़ार फ़ुट की…
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शिवलिंगी बीज

शिवलिंगी बीज एक आयुर्वेदिक औषधि हैं जिसका घटक सिर्फ एक बीज ही हैं और वो हैं ब्रयोनोप्सिस लेसिनियोसा का बीज जिसे समान्यतया शिवलिंगी कहा जाता हैं। शिवलिंगी बीज का प्रयोग पुरे देश में प्रजनन क्षमता बढ़ाने और स्त्रियों के रोग विकारो को दूर करने के लिए किया जाता हैं,इसका प्रयोग स्वस्थ बच्चे के जन्म के लिए भी किया जाता हैं। इसके अलावा  शिवलिंगी बीज लिवर,…
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जड़ी बूटियों के नाम

प्राचीन काल से ही जड़ी बूटियों का प्रयोग आयुर्वेद और अन्य चिकित्सा प्रणालियों में स्वास्थ्य लाभ के किया जाता रहा हैं। उनमें से हम कुछ विशेष जड़ी बूटियों के नाम की सूची यहाँ दे रहे हैं। जड़ी बूटियों के नामों की सूची जड़ी बूटियों के नाम की सूची हिंदी में निम्नलिखित हैं: अगरु अगस्त्य अग्निमन्थ अजमोदा अतसी अतिबला अतिविषा…
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