आयुर्वेद

आयुर्वेद के अनुसार सर्वश्रेष्ठ नमक

सर्वश्रेष्ठ नमक कौन सा है 

दैनिक उपयोग के लिए सर्वश्रेष्ठ नमक अष्टांग संगह, आयुर्वेदिक प्राचीन शास्त्रीय पुस्तक, उन खाद्य पदार्थों का सारांश प्रदान करती है जिन्हें आप दैनिक आधार पर उपभोग कर सकते हैं। इस पुस्तक के अनुसार, शाली चावल, गेहूं, जौ, शशिका चावल, जीवन्ती, मूली, हरीतकी, आंवला, मुनक्का और किशमिश, मूंग दाल, शक्कर या आयुर्वेदिक चीनी, गाय का घी, बारिश का पानी, दूध, शहद, …

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उषापान के लाभ

Ushapan

सूर्योदय से पहले8 अंजलि मात्रा में पानी पीना आयुर्वेद में उषापान कहलाता है। उषापान में सुबह हमें कितना पानी पीना चाहिए और क्यों पीना चाहिए, इसके बारे में हमारे चैनल पर पाहिले से ही एक विडियो और इस वेबसाइट में लेख है। आप उसे भी जरुर देखें। इस लेख में उषापान के 5 मुख्य लाभों के बारे में जानेगें।

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सुबह हमें कितना पानी पीना चाहिए और कब पीना चाहिए और किस बर्तन में रखा पानी पीना चाहिए

How much water should I drink

इस लेख में जाने कि हमें सुबह कितना पानी पीना चाहिए और कब पीना चाहिए और किस बर्तन में रखा पानी पीना चाहिए । सुबह पानी पीना आयुर्वेद सूर्य उगने से पहले खाली पेट पानी पीने की सलाह देता है। उषापान दो शब्दों से बना हैं – उषा और पान। उषा का अर्थ होता है वह समह जब सूरज का …

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आयुर्वेदिक प्रकृति – आयुर्वेदिक शारीरिक प्रकार

Ayurvedic Body Constitution

आयुर्वेद में  शरीर को तीनों दोषों के अनुपात द्वारा निर्मित माना जाता है, जिसे कि आयुर्वेदिक प्रकृति (आयुर्वेदिक शारीरिक प्रकार) भी कहा जाता है। आयुर्वेद दोष की प्रबलता के आधार पर शारीरिक प्रकार को वर्गीकृत करता है। दोष तीन प्रकार के होते हैं, जिन्हें त्रिदोष के रूप में जाना जाता है – वात, पित्त और कफ। इन तीन दोषों के आधार पर, एक …

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वात प्रकृति, पित्त प्रकृति और कफ प्रकृति में अंतर

निम्नलिखित तालिका आपको वात शारीरिक प्रकार, पित्त शारीरिक प्रकार, और कफ शारीरिक प्रकार में अंतर जानने में मदद करेगी। विवरण वात प्रकृति पित्त प्रकृति कफ प्रकृति मस्तिष्क अस्थायी मन एवं विचार दिमाग पर काफी अच्छा नियंत्रण, कुछ हद तक स्थिर मन मन पर बेहतर नियंत्रण, स्थिर मन बुद्धिमत्ता बुद्धिमत्ता का अभाव या बुद्धि अच्छी तरह से संगठित नहीं होती है …

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सम प्रकृति के शारीरिक और मानसिक लक्षण एवं सामान्य समस्याऐं

शरीर में किसी भी प्रकार के गैर-प्रभुत्व और शरीर में प्रत्येक दोष के संतुलन और सामंजस्य को सम शरीर प्रकार कहा जाता है। इसको सम गठन, सम प्रकृति और सम वात पित्त कफ प्रकृति भी कहा जाता है। इस प्रकार के शरीर में, प्रत्येक दोष का समान अनुपात होता है और यह एक दूसरे के प्रभावों को विफल करता है, …

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कफ प्रकृति के शारीरिक और मानसिक लक्षण एवं सामान्य समस्याऐं

Kapha Body Type

शारीरिक गठन में कफ दोष की प्रबलता को कफ प्रकृति (कफज प्रकृति) या कफ शारीरिक प्रकार कहा जाता है। इसे कफ गठन के रूप में भी जाना जाता है। कफ प्रकृति के लक्षण कफ दोष के गुण आपकी शारीरिक और मानसिक विशेषताओं का निर्धारण करते हैं।

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पित्त प्रकृति के शारीरिक और मानसिक लक्षण एवं सामान्य समस्याऐं

Pitta Body Type

शारीरिक गठन में पित्त दोष की प्रबलता को पित्त प्रकृति (पित्तज प्रकृति) या पित्त शारीरिक प्रकार कहा जाता है। इसे पित्त गठन के रूप में भी जाना जाता है। पित्त प्रकृति के लक्षण पित्त दोष के गुण आपकी शारीरिक और मानसिक विशेषताओं का निर्धारण करते हैं।

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आयुर्वेदिक मापन

आयुर्वेदिक शास्त्रीय ग्रंथों ने प्राचीन प्रणाली में वजन और मापों का वर्णन किया है। बहुत से लोग अब उनके बारे में नहीं जानते हैं आपके संदर्भ के लिए, हम आयुर्वेदिक मीट्रिक्स और उनके आधुनिक मीट्रिक समकक्षों के बारे में जानकारी साझा कर रहे हैं।

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