आसव अरिष्ट

अहिफेनासव का दस्त और मरोड़ रोकने के लिए कैसे प्रयोग करें

Diarrhea

अहिफेनासव एक आयुर्वेदिक औषधि जो दस्त और मरोड़ को तुरंत रोकने में सहयाक होती है। इस वीडियो में, आप जानेंगे कि Ahiphenasava क्या है। इसके उपयोग और लाभ क्या होते हैं? इसमें ingredients कौन से है और इसकी खुराक और दुष्प्रभाव (साइड ईफ्फेक्ट्स) क्या होते हैं। Reference Ahiphenasava Ingredients, Benefits, Dosage & Side Effects

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अभयारिष्ट का बवासीर, कब्ज और पेट रोगों में कैसे प्रयोग करें

अभयारिष्ट कब्ज, बवासीर, पेट के रोग, और पेट की सफाई के लिए बहुत ही अच्छी दवा है। आइए इस विडियो में बात करते हैं कि हम कब्ज, बवासीर, पेट के रोग, और पेट की सफाई के लिए अभयारिष्ट का उपयोग कैसे कर सकते हैं। और अभयारिष्ट के लाभ, उपयोग और खुराक क्या हैं। यह कैसे विषाक्त पदार्थों को कम करता …

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आरग्वधारिष्ट के फायदे, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

आरग्वधारिष्टम प्राकृतिक किण्वन प्रक्रिया के माध्यम से बनाई गयी अरिष्ट श्रेणी (Arishta Category) में वर्गीकृत एक आयुर्वेदिक और हर्बल औषधि है। यह औषधि त्वचा रोग, आंत्र कृमि, श्वित्र (leucoderma) और खाँसी में उपयोगी है। यह व्रण, घाव और फोड़े फुंसियों से आरोग्य प्राप्ति की गति को तेज करती है। यह रक्त का विषहरण करती है और शरीर में आम (विषाक्त …

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अयस्कृति के फायदे, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

अयस्कृति आमतौर पर केरल में मूत्र संबंधी विकार, रक्तस्राव, ल्यूकोडर्मा (leucoderma), त्वचा विकार, भूख की कमी, कृमि संक्रमण, रक्ताल्पता, शीघ्रकोपी आंत्र विकार के लक्षण, कुअवशोषण विकार और मोटापे के उपचार के लिए प्रयोग की जाने वाली एक आयुर्वेदिक औषधि है। अयस्कृति का मुख्य प्रभाव वात दोष और कफ दोष पर पड़ता है। यह वसा दहन को उत्प्रेरित करके शरीर में  …

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अशोकारिष्ट के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

अशोकारिष्ट एक तरल आयुर्वेदिक औषधि है। इसमें लगभग 3 से 9% स्व-जनित मद्य सम्मिलित हो सकता है। यह महिला प्रजनन प्रणाली से संबंधित लगभग सभी प्रकार के रोगों में प्रभावशाली है। महिलायों के गर्भाशय सम्बंधित विकारों में यह एक उत्तम औषधि मानी गयी है। अशोकारिष्ट डिम्बग्रंथि को सुदृढ़ कर मासिक धर्म के समय भारी प्रवाह को सामान्य करने में मदद करता …

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अहिफेनासव के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

अहिफेनासव का उपयोग गंभीर अतिसार (दस्त) के उपचार में किया जाता है। यह हैजा में बार बार आने वाले पतले मल की आवृत्ति को कम करने में मदद करता है। घटक द्रव्य (संरचना) घटक द्रव्य मात्रा संशोधित मद्यसार 400 भाग शुद्ध अहिफेन 16 भाग नागरमोथा 4 भाग इन्द्रयव 4 भाग इलायची 4 भाग

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भृंगराजासव के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

भृंगराजासव - Bhringrajasava

भृंगराजासव पेट और यकृत पर क्रिया करके भूख बढ़ाता है। यह यकृत कार्यों में सुधार करता है और चयापचय दर को बढ़ाता है। यह शरीर को पोषण और ताकत प्रदान करता है। यह दुर्बलता, भूख की कमी और खाँसी के मामलों (आयुर्वेद के अनुसार पांच प्रकार की खाँसी) में उपयोगी है। इसका नियमित उपयोग समय पूर्व बालों के सफ़ेद होने में मदद कर सकता है।

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अरविन्दासव घटक द्रव्य, प्रयोग एवं लाभ, मात्रा, दुष्प्रभाव

अरविन्दासव के लाभ

अरविन्दासव (Arvindasava या Aravindasavam) आसव श्रेणी में वर्गीकृत एक आयुर्वेदिक औषधि हैं। शिशुओं और बच्चों में पाचन टॉनिक के रूप में प्रयोग किया जाता है। अरविन्दासव विशेष रूप से बच्चों के विभिन्न रोगों का नाश करता है, उन्हें पुष्ट और निरोगी बनाता है, उनकी भूख बढ़ाता है और उनके गृहदोष और मानसिक समस्याएं दूर करता है। यह बच्चों की शारीरिक …

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अमृतारिष्ट के घटक द्रव्य, प्रयोग एवं लाभ, मात्रा और सेवन विधि

अमृतारिष्ट (Amritarishta or Amrutharishtam)

अमृतारिष्ट (Amritarishta or Amrutharishtam) जीर्ण ज्वर की एक महत्वपूर्ण औषधि है। यह टाइफाइड बुखार के जीर्ण होने पर इसका प्रयोग कारण उत्तम होता है और ज्वर को दूर करने में अत्यन्त सहायक सिद्ध होता है। यह रोगी की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है और कई तरह के संक्रमण रोगों से बचाता है। आम तौर पर, इसका प्रयोग बुखार के …

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अंगूरासव (Angoorasava)

अंगूरासव

अंगूरासव (Angoorasava) भूख को बढ़ाता है। बल्य गुण के कारण शरीर को ताकत देता है और वीर्य की वृद्धि करता है। यह सुखी खांसी, दमा, शारीरिक दुर्बलता, भूख की कमी, कब्ज, पित्त वृद्धि से होने वाला सिरदर्द, भ्रमि (सिर चकराना), नींद की कमी या अनिद्रा आदि में लाभदायक है। घटक द्रव्य एवं निर्माण विधि अंगूरासव (Angoorasava) में निम्नलिखित घटक द्रव्यों …

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