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आसव अरिष्ट

आरग्वधारिष्ट के फायदे, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

आरग्वधारिष्टम प्राकृतिक किण्वन प्रक्रिया के माध्यम से बनाई गयी अरिष्ट श्रेणी (Arishta Category) में वर्गीकृत एक आयुर्वेदिक और हर्बल औषधि है। यह औषधि त्वचा रोग, आंत्र कृमि, श्वित्र (leucoderma) और खाँसी में उपयोगी है। यह व्रण, घाव और फोड़े फुंसियों से आरोग्य प्राप्ति की गति को तेज करती है। यह रक्त का विषहरण करती है और शरीर में आम (विषाक्त पदार्थों…
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अयस्कृति के फायदे, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

अयस्कृति आमतौर पर केरल में मूत्र संबंधी विकार, रक्तस्राव, ल्यूकोडर्मा (leucoderma), त्वचा विकार, भूख की कमी, कृमि संक्रमण, रक्ताल्पता, शीघ्रकोपी आंत्र विकार के लक्षण, कुअवशोषण विकार और मोटापे के उपचार के लिए प्रयोग की जाने वाली एक आयुर्वेदिक औषधि है। अयस्कृति का मुख्य प्रभाव वात दोष और कफ दोष पर पड़ता है। यह वसा दहन को उत्प्रेरित करके शरीर में  वसा…
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अशोकारिष्ट के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

अशोकारिष्ट एक तरल आयुर्वेदिक औषधि है। इसमें लगभग 3 से 9% स्व-जनित मद्य सम्मिलित हो सकता है। यह महिला प्रजनन प्रणाली से संबंधित लगभग सभी प्रकार के रोगों में प्रभावशाली है। महिलायों के गर्भाशय सम्बंधित विकारों में यह एक उत्तम औषधि मानी गयी है। अशोकारिष्ट डिम्बग्रंथि को सुदृढ़ कर मासिक धर्म के समय भारी प्रवाह को सामान्य करने में मदद करता है और दर्द…
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अहिफेनासव के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

अहिफेनासव का उपयोग गंभीर अतिसार (दस्त) के उपचार में किया जाता है। यह हैजा में बार बार आने वाले पतले मल की आवृत्ति को कम करने में मदद करता है। घटक द्रव्य (संरचना) घटक द्रव्य मात्रा संशोधित मद्यसार 400 भाग शुद्ध अहिफेन 16 भाग नागरमोथा 4 भाग इन्द्रयव 4 भाग इलायची 4 भाग
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भृंगराजासव के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

भृंगराजासव पेट और यकृत पर क्रिया करके भूख बढ़ाता है। यह यकृत कार्यों में सुधार करता है और चयापचय दर को बढ़ाता है। यह शरीर को पोषण और ताकत प्रदान करता है। यह दुर्बलता, भूख की कमी और खाँसी के मामलों (आयुर्वेद के अनुसार पांच प्रकार की खाँसी) में उपयोगी है। इसका नियमित उपयोग समय पूर्व बालों के सफ़ेद होने में मदद कर सकता है।
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अरविन्दासव घटक द्रव्य, प्रयोग एवं लाभ, मात्रा, दुष्प्रभाव

अरविन्दासव (Arvindasava या Aravindasavam) आसव श्रेणी में वर्गीकृत एक आयुर्वेदिक औषधि हैं। शिशुओं और बच्चों में पाचन टॉनिक के रूप में प्रयोग किया जाता है। अरविन्दासव विशेष रूप से बच्चों के विभिन्न रोगों का नाश करता है, उन्हें पुष्ट और निरोगी बनाता है, उनकी भूख बढ़ाता है और उनके गृहदोष और मानसिक समस्याएं दूर करता है। यह बच्चों की शारीरिक और मानसिक…
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अमृतारिष्ट के घटक द्रव्य, प्रयोग एवं लाभ, मात्रा और सेवन विधि

अमृतारिष्ट (Amritarishta or Amrutharishtam) जीर्ण ज्वर की एक महत्वपूर्ण औषधि है। यह टाइफाइड बुखार के जीर्ण होने पर इसका प्रयोग कारण उत्तम होता है और ज्वर को दूर करने में अत्यन्त सहायक सिद्ध होता है। यह रोगी की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है और कई तरह के संक्रमण रोगों से बचाता है। आम तौर पर, इसका प्रयोग बुखार के बाद होने वाली दुर्बलता में किया…
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अंगूरासव (Angoorasava)

अंगूरासव (Angoorasava) भूख को बढ़ाता है। बल्य गुण के कारण शरीर को ताकत देता है और वीर्य की वृद्धि करता है। यह सुखी खांसी, दमा, शारीरिक दुर्बलता, भूख की कमी, कब्ज, पित्त वृद्धि से होने वाला सिरदर्द, भ्रमि (सिर चकराना), नींद की कमी या अनिद्रा आदि में लाभदायक है। घटक द्रव्य एवं निर्माण विधि अंगूरासव (Angoorasava) में निम्नलिखित घटक द्रव्यों है:…
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अभयारिष्ट (Abhayarishta)

अभयारिष्ट (Abhayarishta) आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण दवा है जो ज्यादातर कब्ज और बवासीर के इलाज के लिए प्रयोग की जाती है।  यह जठराग्नि को प्रदीप्ति करता है और साथ ही भूख भी बढ़ाता है। इसका प्रयोग उदर रोग में भी किया जाता है। यह कब्ज और सख्त मल के कारण होने वाली परिकर्तिका रोग (anorectal fissure) में भी लाभकर है। बवासीर और परिकर्तिका  का मुख्य कारण…
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लोध्रासव (Lodhrasava or Lodhrasavam)

लोध्रासव (Lodhrasava or Lodhrasavam) का प्रयोग विशेषतः स्तंभनार्थ किया जाता है। यह रक्त का स्तंभन करता है इस लिए यह स्त्रियों में रक्तप्रदर, गर्भाशय से होने वाला असामान्य रक्तस्राव और माहवारी समय होने वाला भारी रक्तस्राव आदि में किया जाता है। इसका स्तंभन कार्य होने से यह श्वेतप्रदरह (leucorrhea) में भी लाभ करता है। लोध्रासव कफ पित्त शामक है और…
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