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भस्म एवं पिष्टी

भस्म और पिष्टी दोनों ही खनिजों, धातुओं या रत्नों के चूर्ण हैं। भस्म को निस्तापन द्वारा अर्थात आग में तपा कर बनाया जाता है, वहीं पिष्टी में अग्नि का प्रयोग नहीं होता है। इसीलिए भस्म की तुलना में पिष्टी का स्वभाव मृदु होता है।

हजरुल यहूद भस्म एवं हजरुल यहूद पिष्टी के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

हजरुल यहूद भस्म (जिसे संगे यहूद भस्म, बेर पत्थर भस्म, बदरशमा भस्म, हज़रुल यहूद भस्म या कैलक्लाइंड लाइम सिलिकेट के रूप में भी जाना जाता है) एक आयुर्वेदिक-निस्तापित औषधि है, जिसका उपयोग गुर्दे की पथरी, मूत्रकृच्छता और वृक्‍कशूल में किया जाता है। हजरुल यहूद की पिष्टी भी बनाई जाती है जिसे हजरुल यहूद पिष्टी या बेर पत्थर पिष्टी कहा जाता है।
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गोमेद मणि भस्म एवं गोमेद मणि पिष्टी

गोमेद मणि भस्म और गोमेद मणि पिष्टी का निर्माण गोमेद पत्थर से किया जाता है। दोनों के एक ही समान लाभ और औषधीय उपयोग होते हैं, लेकिन गोमेद मणि भस्म की तुलना में गोमेद मणि पिष्टी में अधिक सौम्य गुण हैं। गोमेद मणि भस्म को आग में तपा कर भस्म बनायी जाती है, जो इसके अवशोषण को भी बढ़ाता है। कफ-पित्त के मामलों में, गोमेद मणि भस्म अधिक उपयोगी है, लेकिन निरम…
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गोमेद पत्थर (गोमेद मणि)

गोमेद पत्थर: गोमेद पत्थर एक रत्न है जिसका उपयोग वैदिक ज्योतिष के साथ साथ आयुर्वेद में भी किया जाता है। वैदिक ज्योतिष में, इसका बहुत महत्व है क्योंकि यह राहु ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है और यह राहु की ऊर्जा और उसके प्रभाव को संतुलित करता है। जनवरी के महीने में पैदा हुए या कुंभ राशि राशि के लोग सफलता, धन, प्रसिद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और आध्यात्मिक लाभ…
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मुक्ता पिष्टी (मोती पिष्टी) एवं मुक्ता भस्म (मोती भस्म)

मुक्ता पिष्टी (मोती पिष्टी) एवं मुक्ता भस्म (मोती भस्म) एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है। यह शरीर में गर्मी को कम करता है और पाचन तंत्र में शीतलता लाता है। यह अम्ल स्राव को संतुलित करता है, इसलिए यह जठरांत्र और अम्ल अपच के आयुर्वेदिक प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण अंग है।
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अकीक भस्म एवं अकीक पिष्टी

अकीक भस्म (पिष्टी) एक खनिज आधारित आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका उपयोग सामान्य दुर्बलता, हृदय की कमजोरी, शरीर में अत्यधिक गर्मी, मानसिक रोगों, नेत्र रोगों और महिलाओं में गर्भाशय से होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव के उपचार में किया जाता है। अकीक बनाने के लिए मुख्य रूप से गोमेद रत्न को जड़ी बूटियों के रस में पीसकर, फिर तपाकर उसकी भस्म बनायी जाती है। यह मुख्य…
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अभ्रक भस्म

अभ्रक भस्म अभ्रक की जलाई हुई राख है जिसका उपयोग आयुर्वेद में श्वसन विकारों, यकृत और पेट की बीमारियों, मानसिक बीमारियों और मनोदैहिक विकारों के लिए किया जाता है। अभ्रक भस्म को निस्तापन की प्रक्रिया के द्वारा तैयार किया जाता है, जिसमें अभ्रक मुख्य घटक होता है और पौधों के रस, अर्क और काढ़ों का उपयोग किया जाता है। इस निस्तापन की प्रक्रिया को आयुर्वेद में…
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अविलतोलादि भस्म

अविलतोलादि भस्म गंजी या अविलतोलादि भस्म सहस्रयोगम में प्रस्तुत एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग कई अंतर्निहित कारणों से होने वाले जलोदर के उपचार में किया जाता है। अविलतोलादि भस्म में मूत्रवर्धक गुण होते हैं, इसलिए यह पेशाब को बढ़ाता है और शरीर में जमा द्रव को कम कर देता है। घटक अविलतोलादि भस्म के निर्माण में निम्नलिखित जड़ी-बूटियों को समान अनुपात…
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गोदंती भस्म के गुण, लाभ और औषधीय उपयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

गोदन्ती भस्म जिप्सम से बनाई गयी एक खनिज आधारित आयुर्वेदिक औषधि है। यह प्राकृतिक कैल्शियम और सल्फर सामग्री में समृद्ध है। आयुर्वेद (Ayurveda) के अनुसार, गोदन्ती भस्म तीव्र ज्वर (आयुर्वेद में इसे पित्तज ज्वर के रूप में भी जाना जाता है), सिरदर्द, जीर्ण ज्वर, मलेरिया, योनिशोथ, श्वेत प्रदर, गर्भाशय से अत्यधिक रक्तस्राव, सूखी खाँसी और रक्तस्राव के…
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ताम्र भस्म

प्रागैतिहासिक काल से ही, मनुष्य स्वास्थ्य और रोगों के उपचार के लिए दवाओं के विभिन्न स्रोतों का उपयोग कर रहा है। धातु और खनिजों का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा का एक प्रमुख भाग रहा है। ताम्र (तांबा) एक ऐसी ही धातु है जिसे विधिपूर्वक संसाधित और विषहरण करने पर यह कई रोगों में उपयोगी है। परन्तु अशुद्ध ताम्र भस्म बहुत ही हानिकारक है और इसे सख्ती से…
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त्रिवंग भस्म

त्रिवंग भस्म हर्बल और धातु सामग्री से बनी एक आयुर्वेदिक औषधि है। यह एक आयुर्वेदिक धातु युक्त निर्माण है जिसमें वंग (टिन), नाग (सीसा) और यशद (जस्ता) की बराबर मात्रा की भस्म होती है।त्रिवंग भस्म को नपुंसकता के लिए, स्वप्नदोष, मधुमेह, बार बार पेशाब आने पर, आवर्ती गर्भपात, लयूकोरिया, और बांझपन के लिए दिया जाता है। इसका मुख्य प्रभाव नसों, वृषण,…
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