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आयुर्वेदिक दवाइयाँ

भृंगराजासव के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

भृंगराजासव पेट और यकृत पर क्रिया करके भूख बढ़ाता है। यह यकृत कार्यों में सुधार करता है और चयापचय दर को बढ़ाता है। यह शरीर को पोषण और ताकत प्रदान करता है। यह दुर्बलता, भूख की कमी और खाँसी के मामलों (आयुर्वेद के अनुसार पांच प्रकार की खाँसी) में उपयोगी है। इसका नियमित उपयोग समय पूर्व बालों के सफ़ेद होने में मदद कर सकता है।
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कुक्कुटाण्डत्वक भस्म के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

कुक्कुटाण्डत्वक भस्म एक आयुर्वेदिक-निस्तापित औषधि है जिसका निर्माण मुर्गी के अण्डों के छिलकों से किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, कुक्कुटाण्डत्वक भस्म सबसे अच्छा कैल्शियम पूरक है। अण्डों के छिलकों को चंगेरी के रस के साथ संसाधित किया जाता है और फिर भस्म बनाने के लिए उसका निस्तापन किया जाता है।
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पनविरलादि भस्म के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

पनविरलादि भस्म गंजी (पनविरलादि भस्मम) सहस्रयोगम में शोफ और जलोदर के उपचार के लिए वर्णित एक आयुर्वेदिक औषधि है। अवितोलादि भस्म (Aviltoladi Bhasma) के समान, पनविरलादि भस्म (Panaviraladi Bhasma) में मूत्रवर्धक क्रिया होती है और दोनों में कुछ घटक समान होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, यह एक क्षार नियमन है, जो मूत्राधिक्य को प्रेरित करता है और शरीर में द्रव…
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यशद भस्म के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

यशद (जसद) भस्म (Yashad/Jasad Bhasma) एक खनिज आधारित और प्रतिरक्षा-संशोधक आयुर्वेदिक औषधि है। यह आयुर्वेदिक जस्ता पूरक भी है जिसका उपयोग जस्ते की कमी, धीमी गति से घाव भरने, बच्चों के अवरुद्ध विकास और दस्त में किया जाता है।यशद भस्म प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रोत्साहन देता है और बार बार होने वाली सर्दी और कान के संक्रमण का उपचार करने में मदद कर सकता…
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टंकण भस्म (सुहागा) के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

टंकण भस्म (सुहागा) एक निस्तापित आयुर्वेदिक यौगिक है जिसका निर्माण सुहागा पाउडर से किया जाता है। आयुर्वेद में टंकण भस्म का उपयोग बलगम वाली खांसी, श्वास सम्बन्धी विकारों, घरघराहट वाली ब्रोंकाइटिस, पेट दर्द, कष्टार्तव, बालों में रूसी, दुर्गन्ध युक्त श्वास और दुर्गन्धयुक्त मूत्र के उपचार के लिए किया जाता है।
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स्वर्ण माक्षिक भस्म के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

स्वर्ण माक्षिक भस्म (Swarna Makshik Bhasma in Hindi) में लोहा और तांबा जैसे पोषक तत्व शामिल हैं। ये पोषक तत्व शरीर में कई जैविक कार्यों के लिए आवश्यक हैं। लोहा और तांबा दोनों लाल रक्त कोशिकाओं (एरिथ्रोसाइट्स) को बनाने के लिए आवश्यक हैं। तांबा शरीर में लोहे के अवशोषण में मदद करता है और लोहा हीमोग्लोबिन के गठन के लिए आवश्यक है।स्वर्ण माक्षिक भस्म…
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श्रृंग भस्म के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

श्रृंग भस्म एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग कफ निस्सारक के रूप में किया जाता है। श्रृंग भस्म के कफ निस्सारक गुण सभी आधुनिक/एलोपैथिक कफ निस्सारक औषधियों के साथ तुलनीय है। श्रृंग भस्म फुफ्फुसावरणशोथ, निमोनिया, इंफ्लुएंजा (श्‍लैष्मिक ज्‍वर), बलगम वाली खांसी, आम सर्दी, सीने में दर्द, हृद्‍शूल, जीर्ण ज्वर, तपेदिक में ज्वर, हड्डियों के विकार, सूखा रोग,…
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प्रवाल पिष्टी एवं प्रवाल भस्म के गुण, लाभ और औषधीय उपयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

आयुर्वेदिक चिकित्सा में प्रवाल पिष्टी का उपयोग उसके चिकित्सीय लाभ और औषधीय मूल्य के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। हिंदी और आयुर्वेद में प्रवाल को मूंगा कहा जाता है। हालांकि, आयुर्वेद में मूंगा कैल्शियम चूर्ण का सीधे उपयोग नहीं किया जाता है। मूंगा कैल्शियम चूर्ण को खाने योग्य गुलाब जल के साथ संसाधित किया जाता है और खरल करके महीन चूर्ण बनाया जाता…
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कपर्दक भस्म (वराटिका भस्म) के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

कपर्दक भस्म (जिसे कपर्दिका भस्म, कोरी भस्म, वराटिका भस्म और कौड़ी भस्म के नाम से भी जाना जाता है) एक आयुर्वेदिक निस्तापित निर्माण है जिसे पेट की बीमारियों जैसे पेट दर्द, शीघ्रकोपी आंत्र सिंड्रोम, सूजन, पक्वाशय संबंधी अल्सर, भूख ना लगने, आंतों की गैस आदि में उपयोग किया जाता है।
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कहरवा पिष्टी (तृणकान्तमणि पिष्टी) के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

कहरवा पिष्टी (जिसे तृणकांत मणि पिष्टी भी कहते हैं) एक आयुर्वेदिक खनिज है जिसे उसके हेमोस्टेटिक गुणों के कारण रक्तस्राव विकारों में उपयोग किया जाता है।कहरवा पिष्टी ताप विकार, पेचिश, गुदा रक्तस्राव, दस्त, गर्भाशय से अत्यधिक रक्तस्राव, भारी मासिक धर्म और पेट की सूजन संबंधी बीमारियों में लाभकारी है।
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