वटी गुटिका

बिल्वादि गुलिका के घटक द्रव्य, प्रयोग एवं लाभ, मात्रा, दुष्प्रभाव

बिल्वादि गुलिका - Vilwadi Gulika

विल्वादि गुलिका (जिसे विल्वादि अगद, विल्वादि वटी, बिल्वादि गुटिका भी कहते हैं) विभिन्न घटकों से बनी एक आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका उपयोग साँप काटने, बिच्छू के डंक, मकड़ी के काटने, चूहे के काटने, आंत्रशोथ, हैजा, अपच और बुखार के उपचार में किया जाता है। आम तौर पर, यह मानव शरीर में किसी भी अंतर्निहित कारण या पशु मूल के जहरीले …

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कांकायन वटी (कांकायन गुटिका)

कांकायन वटी - Kankayan Vati (Kankayan Gutika)

कांकायन वटी (Kankayan Vati या Kankayan Gutika) बादी बवासीर के लिए एक सर्वोत्तम आयुर्वेदिक दवा है। यह बवासीर के मस्से के आकार को कम कर देती है और कब्ज को राहत देता है। इस औषधि के उपयोग से मस्से सूख जाते हैं और बवासीर में होने वाली कब्ज के कारण मल त्याग में जो तकलीफ होती है, वो भी दूर …

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अर्शोघ्नी वटी (Arshoghni Vati)

अर्शोघ्नी वटी (Arshoghni Vati)

अर्शोघ्नी वटी (Arshoghni Vati) बवासीर एक सामान्य आयुर्वेदिक दवा है।  यह औषधि दोनों प्रकार की बवासीर (खूनी और बादी) के लिए बहुत अच्छी दवा है। हालांकि खूनी बवासीर के उपचार के लिए यह ज्यादा में फायदेमंद है। इसके प्रयोग से 1 से 3 दिनों में रक्तस्राव बंद हो जाता है। यदि इस वटी का सेवन नियमित रूप से किया जाए …

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अग्निवर्द्धक बटी (Agni Vardhak Vati)

अग्निवर्द्धक वटी- Agni Vardhak Vati

अग्निवर्द्धक वटी (Agni Vardhak Vati) पाचक अग्नि की वृद्धि करती है और भूख लगाती है। यह उन रोगियों के लिए लाभदायक है जिन को भूख नहीं लगती या पाचक रसों का उचित स्राव नहीं होता। पाचक रसों का उचित स्राव न होने से रोगी को खाना खाने के बाद पेट में भारीपन रहता है और डकार आते रहते है। यह …

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चंद्रप्रभा वटी

चंद्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati in Hindi)

चंद्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati) को चंद्रप्रभा गुलिका और चंद्रप्रभा वाटिका भी कहा जाता है। यह एक अति उत्कृष्ट आयुर्वेदिक औषधि है जिसका प्रभाव गुर्दे, मूत्राशय, मूत्र पथ, अग्न्याशय, हड्डियों, जोड़ों और थायरॉयड ग्रंथि आदि अंगों पर पड़ता है। इसका प्रयोग इन अंगों से संबंधित रोगों के उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है। इसकी सिफारिश मधुमेह, पुरुषों की समस्याओं, महिलाओं …

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गिलोय घन वटी घटक द्रव्य, औषधीय कर्म, उपयोग, लाभ, मात्रा तथा दुष्प्रभाव

गिलोय घन वटी

गिलोय घन वटी सभी प्रकार के बुखार में फद्येमंद होती है। खासकर इसका प्रयोग रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने के लिए किया जाता है। चरक संहिता में गिलोय को मेध्य रसायन माना है। रसायन होने के कारण यह बुद्धिवर्धक और आयुवर्धक है। इसका प्रयोग चिरकालीन और जीर्ण रोगावस्था में अधिक होता है। और इन रोगों में यह अच्छा प्रभाव डालती …

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