चंद्रप्रभा वटी

Chandraprabha Vati in Hindi

चंद्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati) को चंद्रप्रभा गुलिका और चंद्रप्रभा वाटिका भी कहा जाता है। यह एक अति उत्कृष्ट आयुर्वेदिक औषधि है जिसका प्रभाव गुर्दे, मूत्राशय, मूत्र पथ, अग्न्याशय, हड्डियों, जोड़ों और थायरॉयड ग्रंथि आदि अंगों पर पड़ता है। इसका प्रयोग इन अंगों से संबंधित रोगों के उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है। इसकी सिफारिश मधुमेह, पुरुषों की समस्याओं, महिलाओं की समस्याओं और मानसिक रोगों के इलाज के लिए भी की जाती है।

चंद्रप्रभा वटी मूत्रकृच्छ (पेशाब करने में परेशानी), मूत्राघात (पेशाब करने में रुकावट), गुर्दे की पथरी, बार बार पेशाब आना, मूत्र असंयम, प्रोस्टेट बढ़ने, पुरुष बांझपन, नपुंसकता, स्वप्न दोष, मधुमेह, कष्टार्तव (दर्दनाक माहवारी), चिंता, मानसिक तनाव, और डिप्रेशन जैसी समस्याओं में लाभ प्रदान करती है।

घटक द्रव्य एवं निर्माण विधि

चंद्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati) में निम्नलिखित घटक द्रव्यों है:

शुद्ध गुग्गुलू 96 ग्राम
शुद्ध शिलाजीत 96 ग्राम
मिश्री 48 ग्राम
लोह भस्म 24 ग्राम
काली निशोथ 12 ग्राम
दन्तीमूल 12 ग्राम
बंसलोचन या तबाशीर 12 ग्राम
तेजपत्र 12 ग्राम
दालचीनी 12 ग्राम
छोटी इलायची के बीज 12 ग्राम
कपूर 3 ग्राम
वच 3 ग्राम
नागरमोथा – मुस्तक 3 ग्राम
चिरायता 3 ग्राम
गिलोय – गुडूची 3 ग्राम
देवदारु 3 ग्राम
अतिविषा – अतीस 3 ग्राम
दारुहल्दी 3 ग्राम
हल्दी 3 ग्राम
पीपलामूल 3 ग्राम
चित्रक 3 ग्राम
धनिया 3 ग्राम
हरड़ 3 ग्राम
बहेड़ा 3 ग्राम
आमला – आंवला 3 ग्राम
चव्य 3 ग्राम
विडंग 3 ग्राम
गजपीपली 3 ग्राम
काली मिर्च 3 ग्राम
पिप्पली 3 ग्राम
शुंठी 3 ग्राम
स्वर्णमाशिक भस्म 3 ग्राम
स्वर्जिका क्षार (सज्जी क्षार) 3 ग्राम
यवक्षार 3 ग्राम
सैंधव लवण 3 ग्राम
सौवर्चल लवण 3 ग्राम
विड लवण 3 ग्राम

चंद्रप्रभा वटी निर्माण विधि

सभी द्रव्यों को कूटकर मिला लें। फिर थोड़ा थोड़ा घी डालकर कूटते जाए। जब सभी द्रव्य एक जीव हो जावे तो ५०० मिली ग्राम की गोलियाँ बना लें।

औषधीय कर्म (Medicinal Actions)

चंद्रप्रभा वटी में निम्नलिखित औषधीय गुण हैं।

  • अम्लत्वनाशक
  • संधिशोथहर
  • प्रतिउपचायक – एंटीऑक्सीडेंट
  • बल्य – शारीर और मन को ताकत देने वाला
  • रसायन – कायाकल्प करने वाला
  • पुष्टिकारक – पोषक
  • वृष्य – पौरष शक्ति वर्धक
  • नाड़ी बल्य – नसों के लिए टॉनिक
  • मेध्य – स्मृति एवं बुद्धि वर्धक
  • वेदनास्थापन – दर्द निवारक (पीड़ाहर)
  • शोथहर – सूजन काम करने वाला
  • प्रमेहघन – मूत्र रोग में हितकारी
  • अश्मरी भेदक – गुर्दे की पथरी की तोड़ने वाला
  • हृदयबल्य – दिल के लिए टॉनिक
  • रक्त शोधक
  • आरोग्यकर – स्वास्थ्यवर्धक

चिकित्सीय संकेत

चंद्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati) स्वास्थ्य की निम्नलिखित रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है:

  • सामान्य दुर्बलता
  • शारीरिक कमजोरी
  • थकान
  • मूत्रकृच्छ (पेशाब करने में परेशानी)
  • मूत्राघात (पेशाब करने में रुकावट)
  • गुर्दे की पथरी
  • बार बार पेशाब आना
  • मूत्र असंयम
  • प्रोस्टेट बढ़ने
  • पुरुष बांझपन
  • नपुंसकता
  • स्वप्न दोष
  • मधुमेह
  • चिंता
  • मानसिक तनाव
  • डिप्रेशन – अवसाद
  • शराब पीने के कारण होने वाला उच्च रक्तचाप
  • हृदय की धड़कन बढ़ना
  • कब्ज
  • गठिया
  • पीठ दर्द
  • संधिवात
  • घुटने का दर्द (अश्वगंधा अर्क के साथ प्रयोग किया जाता है)
  • थकान के कारण पेशी का दर्द
  • कष्टार्तव (दर्दनाक माहवारी)
  • गर्भाशय से अत्यधिक खून बहना
  • गर्भाशय की रसौली और ग्रंथियां (कचनार गुगल के साथ)
  • अभ्यस्त गर्भपात
  • प्रोस्टेट बढ़ना (वरुण के साथ प्रयोग किया जाता है)
  • नपुंसकता (अश्वगंधा और कौंच पाक के साथ)
  • स्तंभन दोष (अश्वगंधा के साथ)
  • बार बार पेशाब आना
  • मूत्र असंयम
  • मूत्र में शर्करा
  • अल्बुमिन्यूरिया या प्रोटीनूरिया
  • गुर्दे (किडनी) की विफलता

चंद्रप्रभा वटी के औषधीय उपयोग और लाभ

हालांकि, चंद्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati) के चिकित्सीय संकेतों की एक लंबी सूची है। यहां, हम चंद्रप्रभा वटी के कुछ प्रमुख औषधीय उपयोगों और स्वास्थ्य लाभों पर चर्चा करेंगे।

सामान्य दुर्बलता और थकान

चंद्रप्रभा वटी सामान्य दुर्बलता कम करती है। यह शारीरिक शक्ति में वृद्धि के लिए एक संपूर्ण स्वास्थ्य टॉनिक के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसका यह प्रभाव लौह भस्म और शिलाजीत के कारण है। यह थकान को कम कर देती है और साथ ही शरीर को ताजगी प्रदान करती है। इसका सही प्रभाव तभी सामने आता है अगर इसे गाय के दूध के साथ लिया जाए।

मानसिक थकान और तनाव

मानसिक थकान और मानसिक तनाव को कम करने के लिए चंद्रप्रभा वटी फायदेमंद है। इसका यह प्रभाव इसके मुख्य तत्व शिलाजित के कारण होता है।

छात्र तनाव और स्मृति हानि: यह छात्रों को अध्ययन से संबंधित तनाव कम करने और स्मृति में सुधार करने में मदद करती है।

उच्च रक्तचाप

चंद्रप्रभा वटी में उच्च रक्तचापरोधी प्रभाव होते हैं। इसका मुख्य प्रभाव अत्यधिक शराब सेवन करने वाले लोगों में प्रकट होता है। शराब से रक्तचाप बढ़ सकता है और जिसका परिणाम सिरदर्द आदि हो सकता है। इन मामलों में चंद्रप्रभा वटी रक्तचाप को कम करने और ह्रदय को ताकत प्रदान करने में प्रभावी रूप से मदद करती है।

यह दिल की धड़कन को कम करती है और हृदय को बल देती है। इन स्वास्थ्य स्थितियों में इसके यह प्रभाव शिलाजीत और लौह भस्म के कारण हो सकते हैं।

गठिया और बढ़ा हुआ यूरिक एसिड

चंद्रप्रभा वटी शरीर से क्रिएटिनिन, यूरिया और यूरिक एसिड जैसे हानिकारक विषाक्त पदार्थों के विसर्जन को बढ़ाती है। यह गुर्दे के प्राकृतिक कार्यों को सुधारती है। यह बड़े हुए यूरिक एसिड को कम करती है। हालांकि, यूरिक एसिड उत्पादन पर इसका प्रभाव नहीं हो सकता है, लेकिन यह गुर्दे के माध्यम से यूरिक एसिड के उत्सर्जन को उत्तेजित करके यूरिक एसिड स्तर को कम कर सकती है। आम तौर पर, इसका उपयोग गोक्षुरादि गुगुल, गिलोय सत्व और पुनर्नवा चूर्ण या पुनर्नवारिष्ट के साथ यूरिक एसिड के उत्सर्जन में सुधार के लिए किया जाता है।

संधिवात

चंद्रप्रभा वटी निचली पीठ, रीढ़ की हड्डी में और घुटने के पुराने संधिवात में भी उपयोगी है। इसमें शक्तिशाली शोथहर और दर्द्निवारक गुण होते हैं। यह जोड़ों के विकारों में दर्द और सूजन को कम करती है।

रजोरोध और कष्टार्तव

हालांकि, चंद्रप्रभा वटी में हल्के आर्तवजनक प्रभाव होते हैं, लेकिन यह महिलाओं में हार्मोनल संतुलन को ठीक करती है, जो अंततः मासिक ना होने, कम मासिक होने और दर्दनाक मासिक जैसे समस्याओं को ठीक करती है।

इसमें सम्मिलित अदरक, काली मिर्च, पिप्पली, लोह भस्म आदि जैसे सामग्रियों के कारण इसमें आक्षेपनाशक क्रिया भी होती है। यह मासिक धर्म की अवधि के दौरान होने वाली मासिक धर्म की ऐंठन और पेट के निचले हिस्से के दर्द को भी कम कर देती है।

अत्यधिक गर्भाशय रक्तस्राव, रसौली और ग्रंथियां

गर्भाशय में अत्यधिक रक्तस्राव के कई कारण होते हैं, लेकिन सबसे सामान्य कारण गर्भाशय रसौली और ग्रंथियां है। चंद्रप्रभा वटी को कचनार गुगुल के साथ लेने से रसौली और ग्रंथियां का आकार कम होता है। हालांकि, अगर खून बहना ही मुख्य चिंता का विषय है, तो रक्तस्राव को रोकने के लिए अन्य दवाओं की भी आवश्यकता होती है। इन औषधियों में प्रवाल पिष्टी, मुक्ता पिष्टी, मोचरस, दारुहरिद्रा आदि शामिल हैं।

पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि सिंड्रोम (पी सी ओ एस)

चंद्रप्रभा वटी पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि रोग के लिए पसंदीदा औषधि है। यह सिस्ट को हटाती है और डिम्बग्रंथि के काम को सुचारू बनाती है। इसे अशोकारिष्ट और कचनार गुग्गुल के साथ लेने से हार्मोन पर प्रभाव दिखाई देते हैं।

वास्तव में चंद्रप्रभा वटी प्रजनन प्रणाली के सभी अंगों और श्रोणि के अंगों के लिए टॉनिक है। यह बेहतर और अधिक कुशलतापूर्वक कार्य करने के लिए अन्य औषधियों की सहायता करती है। इसलिए, प्रजनन विकारों के साथ जुड़े हर मामले में इसकी सिफारिश की जाती है। यह पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि रोग के लिए बहुत अच्छा उपाय है। विपुल मासिक धर्म या भारी रक्तस्राव के लिए आयुर्वेद में सबसे अच्छे संयोजन में शामिल हैं:

  • चंद्रप्रभा वटी
  • अशोकारिष्ट
  • कामदुधा रस
  • मूसली खादिरादि क्वाथ

यदि मासिक स्राव अनियमित, कमजोर और रोगी को मासिक धर्म कम हो, तो अशोकारिष्ट सही विकल्प नहीं होगा। यदि यह आवश्यक है, तो इसे कुमार्यासव के संयोजन में लिया जाना चाहिए। अन्यथा, निम्न संयोजन इस मामले में अच्छी तरह से काम करता है।

  • चंद्रप्रभा वटी
  • कुमार्यासव
  • सुकुमारम कश्यम
  • कांचनार गुग्गुल

कुछ रोगी इस संयोजन में अच्छी प्रतिक्रिया नहीं देते, और फिर उन्हें मासिक स्राव लाने के लिए अग्नितुंडी वटी की भी आवश्यकता पड़ेगी। हालांकि, इसका उपयोग केवल थोड़े समय के लिए किया जाना चाहिए और मासिक धर्म आने के दौरान इसे बंद कर देना चाहिए।

बार बार होने वाले गर्भपात

चंद्रप्रभा वटी एक महान गर्भाशय टॉनिक है। आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, कमजोर गर्भाशय के कारण अभ्यस्त गर्भपात होता है। इसलिए, चंद्रप्रभा वाटी का उपयोग अश्वगंधा चूर्ण के साथ गर्भाशय को ताकत देने के लिए प्रयोग किया जाता है।

बढ़ा हुआ प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि)

प्रोस्टेट हाइपरट्रोफी (पौरुष ग्रंथि) के कारण मूत्र संबंधी परेशानी को कम करने में चंद्रप्रभा वटी अच्छी तरह से काम करती है। यह बढ़े हुए प्रोस्टेट ग्रंथि के आकार को भी कम करने में सहायक है। यह वरुण के साथ प्रयोग करने में बहुत अधिक प्रभावकारी होती है।

अल्पशुक्राणुता, नपुंसकता और स्तंभन दोष

चंद्रप्रभा वटी पुरुषों के सभी प्रजनन अंगों पर काम करती है और इनके प्राकृतिक कार्यों में सुधार करती है। अल्पशुक्राणुता में यह शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाती है, शारीरिक शक्ति बढ़ाती है और शारीरिक कमजोरी कम करती है। इसे आम तौर पर अश्वगंधा चूर्ण और कौंच पाक के साथ प्रयोग किया जाता है।

बार-बार पेशाब आना और मूत्र असंयम

चंद्रप्रभा वटी मूत्र आवृत्ति और मूत्र असंयम कम कर देती है। हालांकि, इसका बार बार पेशाब आने पर कोई सीधा प्रभाव नहीं है, लेकिन यह इन समस्याओं के मूल कारण को ठीक करती है और इन समस्याओं का सामना करने में मदद करती है।

अल्बुमीनुरिया (प्रोटीनूरिया)

मधुमेह रोगियों में, मधुमेह गुर्दे की क्षति का सबसे पहला संकेत माइक्रोएल्ब्यूमीनुरिया है। एल्ब्यूमीनुरिया के अन्य कारण गर्मी या ठंड की अनावृत्ति, भावनात्मक तनाव, बुखार और ज़ोरदार व्यायाम आदि हैं। इनमें से अधिकतर कारणों में, मूत्र में प्रोटीन की हानि कम करने और इलाज करने के लिए कामदुधा रस के साथ चंद्रप्रभा वटी दी जाती है। यदि आप मधुमेह के रोगी हैं, तो आपको नियमित रूप से रक्त शर्करा का स्तर जांचना चाहिए और इसे अच्छे नियंत्रण में रखना चाहिए।

ग्लाइकोसुरिया (मूत्र में शर्करा)

चंद्रप्रभा वटी ग्लाइकोसुरिया (मूत्र में शर्करा की उपस्थिति) के लिए एक उत्कृष्ट औषधि है। मधुमेह विरोधी दवाओं के साथ या नीचे बताये गए हर्बल संयोजन के साथ, यह मूत्र में असामान्य ग्लूकोज की उपस्थिति को कम करने के लिए यह अच्छे परिणाम दिखाती है। निम्नलिखित संयोजन से रक्त शर्करा का स्तर काफी कम होता है।

चंद्रप्रभा वटी 1 ग्राम
आमला चूर्ण 1 ग्राम
हल्दी 1 ग्राम
नीम की आंतरिक छाल 1 ग्राम
चिरायता 500 मिलीग्राम

गुर्दे की पुरानी बीमारी

जैसा कि हमनें गठिया के मामले में चर्चा की है, चंद्रप्रभा वटी क्रिएटिनिन, रक्त यूरिया और यूरिक एसिड में रक्त स्तर को कम करती है। एक दिन में दो बार 1 ग्राम खुराक रक्त में क्रिएटिनिन के स्तर की वृद्धि को रोकने में मदद करती है।

गुर्दे में पथरी

चंद्रप्रभा वटी में अश्मरी भेदक गुण हैं, इसलिए यह गुर्दे की पथरी के गठन को कम कर देती है और गुर्दे में पथरी के गठन को रोकने में मदद करती है।

पॉलीसिस्टिक गुर्दे रोग (पी के डी)

कचनार गुगुल के साथ चंद्रप्रभा वटी पॉलीसिस्टिक गुर्दे रोग (पी के डी) में मदद करती है। इस प्रयोग करने से कुछ ही दिनों बाद प्रभाव दिखाई देने लगते हैं।

सिस्टिटिस (मूत्राशयशोध)

मूत्राशय की सूजन या सूजन आमतौर पर मूत्र पथ के संक्रमण (यूटीआई) के कारण होती है। इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे ड्रग्स, शुक्राणुनाशक जेली का प्रयोग, स्त्री स्वच्छता स्प्रे या कैथीटेराइजेशन इत्यादि।

मूत्राशयशोध के कारण गन्दा मूत्र, बदबूदार मूत्र, बार बार मूत्र आना, जलन या श्रोणीय बेचैनी आदि लक्षण होते हैं। चंद्रप्रभा वटी इन सभी लक्षणों को कम करती है। चंदनादि वटी और चन्दनासव के साथ चंद्रप्रभा वटी मूत्राशयशोध का उपचार करने के लिए लाभदायक है।

मात्रा एवं सेवन विधि (Dosage)

आयुर्वेद के शास्त्रीय ग्रंथों में लिखी गयी चंद्रप्रभा वटी की खुराक एक दिन में दो बार या तीन बार 1000 मिलीग्राम से 2000 मिलीग्राम है। एक ग्राम से कम देने पर यह कम प्रभाव दर्शाती है।

औषधीय मात्रा (Dosage)

बच्चे 1 गोली (500 मिलीग्राम)
वयस्क 2 गोली (1000 मिलीग्राम)

सेवन विधि

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) मूत्र, गर्भाशय, प्रजनन अंग संबंधित रोगों में खाना खाने के 1/2 घंटे पहिले लें या अन्य रोगों में खाना खाने के बाद लें।
दिन में कितनी बार लें? 2 बार – सुबह और शाम
अनुपान (किस के साथ लें?) गुनगुने पानी या दूध के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

आप के स्वास्थ्य अनुकूल चंद्रप्रभा वटी की उचित मात्रा के लिए आप अपने चिकित्सक की सलाह लें।

चंद्रप्रभा वटी के दुष्प्रभाव (Side Effects)

यदि चंद्रप्रभा वटी का प्रयोग व सेवन निर्धारित मात्रा (खुराक) में चिकित्सा पर्यवेक्षक के अंतर्गत किया जाए तो चंद्रप्रभा वटी के कोई दुष्परिणाम नहीं मिलते। अधिक मात्रा (6 ग्राम प्रतिदिन से अधिक) में चंद्रप्रभा वटी के साइड इफेक्ट्स की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

गर्भावस्था और स्तनपान

चंद्रप्रभा वटी पूरक खुराक (500 मिलीग्राम दिन में दो बार) में संभवतः सुरक्षित है, लेकिन चिकित्सीय खुराक (1000 मिलीग्राम दिन में दो बार) की सुरक्षा के लिए कोई वैज्ञानिक मूल्यांकन उपलब्ध नहीं हैं।

सावधानी

चंद्रप्रभा वटी में लोहे की उपस्थिति के कारण, आपको इसे निम्नलिखित रोगों में नहीं लेना चाहिए।

  • पेट का अल्सर
  • अल्सरेटिव कोलाइटिस
  • लौह अधिभार
  • थैलेसीमिया

दवाओं का पारस्परिक प्रभाव

लौह की उपस्थिति (लौह भस्म) के कारण, आपको इसे आधुनिक दवाइयों के साथ नहीं लेना चाहिए।

  1. बिस्फोस्फॉनेट्स
  2. लेओडोपा
  3. लेवोथ्रोक्सिन
  4. मैथिडाडो
  5. मायकोफेनोलेट मोफ्सेटील
  6. पेनिसिलमिन
  7. टेट्रासाइक्लिन एंटीबायोटिक दवाएं
  8. क्विनोलोन एंटीबायोटिक

चंद्रप्रभा वटी उपरोक्त औषधितों के अवशोषण और प्रभावशीलता को कम कर सकती है।

संदर्भ

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