दिव्य अर्जुन क्वाथ ऐसी औषधि हैं, जो ह्रदय से सम्बंधित रोगों की रोकथाम के लिए उपयोगी हैं। इस औषधि में अर्जुन-छाल एक मुख्य घटक के रूप में पाया जाता हैं जिसका प्रयोग आयुर्वेद में प्राचीन समय से दिल की विमारियों के लिए किया जाता रहा हैं। इसके अलावा यह अर्जुन-छाल ह्रदय की मासपेशियों को मजबूत करती हैं और इसके सामान्य कामकाज में मदद करती हैं। इसके अलावा दिव्य अर्जुन क्वाथ औषधि खून को साफ करती हैं, उच्च कैलेस्ट्रोल और उच्च रक्तचाप को संतुलित रखने में भी लाभदायक हैं। यह औषधि पाउडर के रूप में मिलता हैं, जिसका काढ़ा बना कर सेवन किया जाता हैं।

दिव्य अर्जुन क्वाथ के मुख्य घटक

  1. अर्जुन छाल

लाभ एवं उपयोग

ह्रदय से सम्बंधित रोगों के लिए

ह्रदय के रोगों जैसे उच्च कोलोस्ट्रोल, उच्च रक्तचाप और हार्ट अटैक की रोकथाम के लिए दिव्य अर्जुन क्वाथ बेहतरीन औषधि हैं इसके अलावा इसमें मौजूद जड़ी-बूटियां ह्रदय की माँसपेशियों का पोषण करता हैं ताकि वो सही से काम कर सके।

कमजोर दिल के लिए

कमजोर दिल के रोगियों के लिए यह औषधि बहुत लाभदायक हैं।

हार्ट अटैक की रोकथाम के लिए

दिव्य अर्जुन क्वाथ धमनियों में जमी वसा को कम करने में मदद करता हैं जिससे हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती हैं।

इन सब लाभो के अलावा इसमें मौजूद अर्जुन छाल किडनी से पथरी को बाहर निकालने, दांतो को चमकाने या मजबूत बनाने और अगर इसका सेवन दूध में डाल कर किया जाये तो लगभग हर बीमारी में यह लाभदायक हैं।

औषधीय मात्रा निर्धारण एवं व्यवस्था

400 मिलीलीटर पानी में पाँच से दस ग्राम दिव्य अर्जुन क्वाथ पाउडर डालें और उसे पकाएं, इसे तब तक पकाएं जब तक की इस मिश्रण की मात्रा कम हो कर 100 मिलीलीटर न रह जाये। अब इस मिश्रण को छान लें और पिये। इसका सेवन दिन में दो बार खाली पेट करना चाहिए। 1) सुबह उठ कर खाली पेट 2) रात के खाने से एक घंटे पहले।

दुष्प्रभाव

अर्जुन क्वाथ पाउडर एक आयुर्वेदिक औषधि हैं और इसमें प्रयोग होने वाली जड़ी-बूटियां पूरी तरह से हर्बल हैं,इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नही हैं। इसका प्रयोग दिन में दो बार बताई गयी मात्रा में करना चाहिए और अगर इसके सेवन के बाद कोई समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर की राय लेनी चाहिए।

 

गर्भबती स्त्रियां या स्तनपान करने वाली माताए जिन्हें ह्रदय संबंधित कोई बीमारी है, उनके लिए भी इसका सेवन करना सुरक्षित हैं क्योंकि इस औषधि का कोई दुष्प्रभाव नही होता।

पूर्वापाय

  • ह्रदय के रोगियों के लिए रोजाना आठ घंटे की नींद लेना अतिआवश्यक हैं।
  • ह्रदय रोगियों को अपने खाने में वसा और नमक की मात्रा कम लेनी चाहिए।
  • नियमित रूप से कसरत और योग करना चाहिए।
आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श करें
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