दिव्य कायाकल्प वटी (Divya Kayakalp Vati)

Patanjali Kayakalp Vati

दिव्य कायाकल्प वटी (Divya Kayakalp Vati or  Patanjali Kayakalp Vati) त्वचा संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए एक आयुर्वेदिक प्रोप्राइटरी औषधि है। त्वचा की सुरक्षा करने का सर्वोत्तम दवा है और यह सभी तरह के त्वचा रोगों की में लाभदायक है। खासकर यह  खाज-खुजली, फोड़े फुंसियां, एक्जिमा, दाद आदि के इलाज के लिए उपयुक्त होती है।

पतंजलि कायाकल्प वटी के नियमित सेवन से मुँहासे और दाग-धब्बे भी दूर हो जाते हैं। इसमें मौजूद जड़ी-बूटियां त्वचा की कोशिकाओं को आवश्यक खनिज और विटामिन प्रदान कर के त्वचा का पोषण करती हैं। इस औषधि से हानिकारक और विषैले प्रदार्थ शरीर से बाहर निकलते हैं जिससे खून साफ़ होता हैं और त्वचा साफ़ और चमकदार बनती हैं।

दिव्य कायाकल्प वटी के घटक

दिव्य कायाकल्प वटी में निम्नलिखित घटक द्रव्यों है:

घटक द्रव्य मात्रा
पनवाड़ 18.75  मिलीग्राम
दारुहल्दी 37.50  मिलीग्राम
करंज 6.25   मिलीग्राम
आंवला 37.50  मिलीग्राम
गिलोय 18.75  मिलीग्राम
कुटकी 6.25   मिलीग्राम
सत्यानाशी 12.50  मिलीग्राम
रस माणिक्य 6.25  मिलीग्राम
हल्दी 18.75 मिलीग्राम
खैर (खदिर) 25.00 मिलीग्राम
नींब (नीम) 25.00 मिलीग्राम
मंजीठ (मंजिष्ठा) 6.25 मिलीग्राम
चिरायता 18.75 मिलीग्राम
द्रोणपुष्पी 6.25 मिलीग्राम
कत्था 6.25 मिलीग्राम

औषधीय कर्म (Medicinal Actions)

कायाकल्प वटी में निम्नलिखित औषधीय गुण है:

चिकित्सकीय संकेत (Indications)

कायाकल्प वटी निम्नलिखित व्याधियों में लाभकारी है:

  • त्वचा के रोग
  • त्वचा और रूप की हानि
  • कुष्ठ रोग
  • त्वचा के दाग धब्बे
  • त्वचा के रोगों की रोकथाम के लिए
  • खाज-खुजली
  • फोड़े फुंसियां
  • एक्जिमा
  • दाद
  • मुँहासे

लाभ एवं प्रयोग 

दिव्य कायाकल्प वटी में सभी घटकों का त्वचा संबंधी रोगों पर प्रभाव पड़ता है। प्रत्येक घटक के प्रभाव का प्रदर्शन करने के लिए यहाँ कुछ महत्वपूर्ण लाभ लिखे हैं।

मुँहासे के इलाज के लिए

कायाकल्प वटी मुँहासे के उपचार के लिए अत्यधिक प्रभावी औषधि है। मृत कोशिकाओं के वसामय ग्रंथि के भर जाने से वसामय ग्रंथि के बढ़ जाती है जो मुँहासे को उत्पन करती है। इस में जीवाणु संक्रमण हो जाने के कारण यह लाल, मवाद से भर जाता है और सूज जाता है। कायाकल्प वटी लालिमा और सूजन कम करती है और इसमें मंजूद घटक जीवाणुरोधी है जो मवाद का नाश करते है जिस से मुँहासे  ठीक होने लगते है। यह

यह रक्त की शुद्धि भी करता है और शरीर संचित विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। यह मुँहासे बनने की प्रक्रिया को मंद करता है वा रोकता है।

खून साफ़ करने के लिए

दिव्य कायाकल्प वटी शरीर के दूषित और हानिकारक प्रदार्थो (Chemicals) को शरीर से बाहर निकलने में सहायता करती हैं, जिससे खून साफ़ होता हैं जो त्वचा को साफ़ और चमकदार बनाती हैं और मुँहासे और दाग धब्बो से भी छुटकारा मिलता हैं। दिव्य कायाकल्प वटी में मौजूद जड़ी-बूटियां त्वचा का कायाकल्प करती हैं जिससे पुराने से पुराने दाग-धब्बे भी दूर होते हैं।

त्वचा को निखारने  के लिए

दिव्य कायाकल्प वटी आँखों के नीचे होने वाले डार्क सर्कल्स (dark circles) दूर करने में सहायक हैं, इसके अलावा त्वचा में बढ़ती उम्र के साथ होने वाले दागो को भी यह दूर करती हैं। यह औषधि झुर्रियों को कम करने के लिए भी एक असरदार औषधि हैं।

त्वचा को ताज़ा रखने के लिए

दिव्य कायाकल्प वटी में मौजूद कई घटक जैसे नीम, करग और तुलसी एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं, जो न केवल त्वचा को साफ़ करती हैं और इसे निखारने में भी सहयोग देती हैं बल्कि इसके इस्तेमाल से त्वचा स्वस्थ और ताज़ा दिखती हैं। इसमें हल्दी होती हैं जो एंटी ऑक्सीडेंट के साथ साथ एंटीसेप्टिक प्रदार्थ भी हैं और हल्दी त्वचा के आंतरिक और बाहरी दोनों तरह के रोगों का इलाज़ करने में उपयोगी हैं।

एकिज्मा के उपचार में लाभदायक

दिव्य कायाकल्प वटी में पनवाड़ होता हैं जिससे त्वचा रोग जैसे फोड़े, खुजली और एक्जिमा जैसी बिमारियों का उपचार होता हैं।

मात्रा एवं सेवन विधि (Dosage)

दिव्य कायाकल्प वटी (Divya Kayakalp Vati) की सामान्य औषधीय मात्रा  व खुराक इस प्रकार है:

औषधीय मात्रा (Dosage)

बच्चे 1 गोली
वयस्क 2 गोली

सेवन विधि

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) सुबह और शाम
दिन में कितनी बार लें? 2 बार
अनुपान (किस के साथ लें?) गुनगुने पानी के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

दुष्प्रभाव (Side Effects)

यदि कायाकल्प वटी का प्रयोग व सेवन निर्धारित मात्रा (खुराक) में चिकित्सा पर्यवेक्षक के अंतर्गत किया जाए तो कायाकल्प वटी के कोई दुष्परिणाम नहीं मिलते। अधिक मात्रा में कायाकल्प वटी के साइड इफेक्ट्स की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

इसमें रस माणिक्य है जो आर्सेनिक (संखिया) का योग है। इसलिए इसका प्रयोग चिकित्सा पर्यवेक्षक के अंतर्गत सीमित अवधि तक ही करना हितकर माना जाये गया।

संदर्भ