दिव्य मधुनाशिनी वटी मधुमेह की रोकथाम के लिए एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है। दिव्य मधुनाशिनी वटी मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए बाजार में उपलब्ध सबसे असरदार कुदरती उपाय है। इसके सेवन से खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित रहती है। इस औषधि को नियमित रूप से लेने से मधुमेह के रोगी के स्वास्थ्य में सुधार होता है और नसों, हृदय, रक्त वाहिकाओं, आंखों और गुर्दे की रक्षा होती है इसके अलावा यह मधुमेह के रोगियों को होने वाली समस्याओ जैसे तनाव, थकावट,  कमज़ोरी, अधिक प्यास लगना, आँखों की रौशनी का कम होना, बार बार पेशाब आना, खारिश या वजन का कम होना इत्यादि से राहत देती है।

दिव्य मधुनाशिनी वटी के घटक

दिव्य मधुनाशिनी वटी निम्नलिखित घटको को मिल कर बनाया जाता है

घटक द्रव्यमात्रा
शिलाजीत 50 मिलीग्राम
अश्वगंधा 21 मिलीग्राम
गुड़मार 21 मिलीग्राम
नीम 26 मिलीग्राम
हरड़ छोटी 15 मिलीग्राम
गिलोय 15 मिलीग्राम
कुटज 35 मिलीग्राम
गोखरू 15 मिलीग्राम
बहेड़ा 15 मिलीग्राम
आंवला 15 मिलीग्राम
सप्तरंगी 15 मिलीग्राम
मेथी 21 मिलीग्राम
हल्दी 16 मिलीग्राम
चिरायता 21 मिलीग्राम
जामुन गुठली 42 मिलीग्राम
कुटकी 42 मिलीग्राम
काली जीरी 21 मिलीग्राम
बेलपत्र 15 मिलीग्राम
कचूर 15 मिलीग्राम
वासा 21 मिलीग्राम
बड़जटा 15 मिलीग्राम
कीकरफली 21 मिलीग्राम

लाभ एवं प्रयोग

दिव्य मधुनाशिनी वटी  में सभी घटकों का मधुमेह पर प्रभाव पड़ता है। प्रत्येक घटक के प्रभाव का प्रदर्शन करने के लिए यहाँ कुछ महत्वपूर्ण लाभ लिखे है।

मधुमेह के रोगियों के लिए लाभदाय

दिव्य मधुनाशिनी वटी मधुमेह के उपचार के लिए सबसे अच्छा उपाय है, यह खून में शुगर की मात्रा कम करने में मदद करती है, जिससे मधुमेह नियंत्रित रहती है। यह औषधि मधुमेह के रोगियो को होने समस्यायों जैसे की प्यास लगना, थकावट, खुजली, आँखों की कम रौशनी इत्यादि में भी राहत देती है। मधुमेह में होने वाले अचानक वजन कम को भी यह नियंत्रित करती है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए

दिव्य मधुनाशिनी वटी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में लाभदायक है और आत्मविश्वास को भी बढ़ाने में सहायक है। यह तांत्रिक तंत्र को भी मजबूत बनाती है। मधुमेह के दौरान किडनी, लिवर ,आँखों और बाकि सेहत के विकारो को भी यह औषधि दूर करती है।

दिव्य मधुनाशिनी वटी में मौजूद घटको के लाभ

दिव्य मधुनाशिनी वटी में मौजूद घटक  स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है जैसे गुड़मार और नीम खून को साफ करते है और शक्कर की मात्रा को भी नियंत्रित करने में सहायक है। बेहड़ा और हरड़ पाचन शक्ति को सही बनाये रखते है, गिलोय और आमला रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और दिमाग को तेज़ करते है। काली जीरी कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह दोनों को नियंत्रित करती हैं और जोड़ो के दर्द में भी राहत देती है। मधुमेह के रोगियों के घाव जल्दी नही भरते पर इस औषधि में मौजूद हल्दी इस समस्या से भी राहत पहुंचाती हैं और घाव जल्दी भरते है।

संदर्भ

  1. Divya Madhunashini Vati published on Ayurtimes.com
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