दिव्य मेधा वटी (Divya Medha Vati)

दिव्य मेधा वटी एक आयुर्वेदिक औषधि है जो दिमाग, नसों एवं ज्ञान इंद्रियों पर काम करती है।  यह स्मरणशक्ति व बुद्धि वर्धक दवा है। यह औषधि ऐसी जड़ी-बूटियों का मिश्रण है जो याददाश्त को इसके साथ साथ एकाग्रता को भी बढाती है, इसलिये दिव्य मेधा वटी बड़ों के साथ साथ बच्चो के लिए भी बहुत लाभदायक है। इसके साथ ही दिव्य मेधा वटी पुरानी सिर दर्द, घबराहट और नींद से संबंधित रोगों के उपचार के लिए भी उपयोगी है।

दिव्य मेधा वटी के घटक (Ingredients)

दिव्य मेधा वटी निम्नलिखित घटको को मिला कर बनाई गयी हैं:-

घटक द्रव्य मात्रा
ब्राह्मी 54.7 मिलीग्राम
शंखपुष्पी 54.7 मिलीग्राम
वच 43.7 मिलीग्राम
उस्तेखदूस 43.7 मिलीग्राम
गाजवाँ 17 मिलीग्राम
मालकांगनी 43.7 मिलीग्राम
जटामांसी 43.7 मिलीग्राम
सौंफ 19.2 मिलीग्राम
अश्वगंधा 43.7 मिलीग्राम
प्रवाल पिष्टी – Praval Pishti 17 मिलीग्राम
जहरमोहरा पिष्टी – Jaharmohar Pishti 19.3 मिलीग्राम
मोती पिष्टी – Moti Pishti 11.25 मिलीग्राम
ब्राह्मी सत्त 11.25 मिलीग्राम
ज्योतिष्मती सत्त 43.7 मिलीग्राम
वच सत्त 54.6 मिलीग्राम
शंखपुष्पी सत्त 11.25 मिलीग्राम

औषधीय कर्म (Medicinal Actions)

  • निद्राजनन – नींद लाने वाली
  • आक्षेपशमन –
  • मेध्य – बुद्धिवर्धक और मेधावर्धक
  • स्मरण शक्ति वर्धक
  • शोथहर
  • कण्ठघ – स्वर (आवाज़) साफ या ठीक करने वाली
  • क्षुधावर्धक – भूख बढ़ाने वाला
  • पाचन – पाचन शक्ति बढाने वाली

चिकित्सकीय संकेत (Indications)

  1. अनिद्रा
  2. चिंता
  3. डिप्रेशन (अवसाद)
  4. तनाव
  5. माइग्रेन
  6. मिर्गी
  7. सिर दर्द
  8. स्मरण शक्ति की क्षति

मेधा वटी के लाभ एवं प्रयोग (Benefits & Uses)

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में अक्सर लोग तनाव, चिंता और अवसाद का शिकार हो जाते है। इन रोगों से बचने के लिए पतंजलि दिव्य फार्मेसी ने एक आयुर्वेदिक औषधि का निर्माण किया हैं जो न केवल इन रोगों की रोकथाम के लिए उपयोगी हैं बल्कि दिमाग के लिए भी बहुत लाभदायक है। इस औषधि का नाम हैं-दिव्य मेधा वटी।

मानसिक रोग

दिव्य मेधा वटी एक ऐसी औषधि हैं जिसे तनाव, चिंता और अवसाद जैसी बिमारियों को दूर करने के लिए प्रयोग किया जाता हैं। इस औषधि में ऐसी जड़ी-बूटियां हैं जो दिमाग को शांत करती हैं और इन रोगों से मुक्ति पाने में सहायक हैं इसके अलावा यह होने वाली घबराहट, चिड़चिड़ापन और दिमाग से संबंधित अन्य रोगों को भी दूर करती है।

स्मरण शक्ति की क्षति

इस औषधि के लगातार सेवन से याददाश्त और एकाग्रता बढ़ती हैं और जिन लोगों को भूलने की बीमारी हैं, उनके लिए भी यह लाभदायक है। यह बच्चो की यादाश्त बढाती हैं और बृद्ध लोगो को इस उम्र में आकर जो भूलने की बीमारी हो जाती हैं, उससे भी छुटकारा दिलाती हैं।

नींद से जुड़ी समस्याओं

नींद से जुड़ी समस्याओं को भी दिव्य मेधा वटी दूर करती हैं जैसे की अनिद्रा इसके अलावा यह औषधि पुरानी सिर दर्द और माइग्रेन जैसे रोगों में भी बहुत उपयोगी है।

किसी बीमारी या चोट लगने के बाद जिन लोगो को मस्तिष्क संबधी रोग हो जाते हैं, उनके उपचार और रोकथाम के लिए यह औषधि बहुत ही लाभदायक है।

इस औषधि का सबसे बड़ा फायदा यह हैं कि इस का कोई दुष्प्रभाव नही हैं, इसलिए इसका सेवन हर उम्र के लोग कर सकते है।

मात्रा एवं सेवन विधि (Dosage)

दिव्य मेधा वटी की मात्रा आपके स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। मेधा वटी की सामान्य खुराक इस प्रकार है:

औषधीय मात्रा (Dosage)

बच्चे 1 गोली
वयस्क 2 गोली

सेवन विधि

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) सुबह और शाम
दिन में कितनी बार लें? 2 बार
अनुपान (किस के साथ लें?) गुनगुने पानी या दूध के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) कम से कम 3 महीने

आप के स्वास्थ्य अनुकूल मेधा वटी की उचित मात्रा के लिए आप अपने चिकित्सक की सलाह लें।

दिव्य मेधा वटी की एक या दो गोलियों का सेवन दिन में दो बार करना चाहिए, इस औषधि को सुबह नाश्ते से पहले खाली पेट दूध के साथ या नाश्ते के बाद पानी के बाद ले सकते हैं या फिर रात के खाने के बाद दूध या पानी अपनी इच्छानुसार किसी के भी साथ ले सकते हैं। इसका सेवन जितना चाहे उतने लंबे समय तक किया जा सकता हैं, इसकी कोई समय सीमा नही हैं। इसके रोजाना सेवन से फायदा होता है ।

दुष्प्रभाव (Side Effects)

दिव्य मेधा वटी (Metha Vati) का निर्माण 100% हर्बल जड़ी-बूटियों से किया गया हैं इसलिए सामान्य मात्रा में लेने पर इसका कोई दुष्प्रभाव नही हैं।

अधिक मात्रा में लेने पर यह कुछ लोगों में पेट में जलन कर सकती है।

इसका सेवन हर उम्र  के लोग कर सकते हैं खास कर बच्चो और बृद्ध लोगो के लिए यह बहुत लाभदायक हैं क्योंकि यह दिमाग को तेज़ करती हैं।  इसके सेवन से अगर कोई समस्या होती है तो डॉक्टर की राय लेना आवश्यक हैं। गर्भवती महिलाये और स्तनपान कराने वाली माताएं भी इसका आसानी से प्रयोग क़र सकती हैं, इसका शरीर पर कोई नुकसान नही हैं।

संदर्भ


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