दिव्य उदरामृत वटी (Divya Udaramrit Vati) के नाम से ही पता चल रहा है कि यह औषधि पेट से संबंधित रोगों के लिए ही बनाई गयी हैं। यह गैस्ट्रिक समस्याओं कि रोकथाम के लिए लाभदायक और प्रसिद्ध औषधि हैं।  इस में मौजूद घटक पेट के अम्लता को कम  करते है इसके अलावा यह अपच, पीलिया, एनीमिया, ज्वर, दस्त और पाचन से जुड़े हुए अन्य रोगों की रोकथाम के लिए भी उपयोगी हैं। यह पाचन तंत्र के कार्यों में सुधार लाती है और भूख बढ़ाती है। दिव्य उदरामृत वटी का प्रयोग पुरानी कब्ज और पेट में दर्द  में भी किया जाता है।

दिव्य उदरामृत वटी के घटक

दिव्य उदरामृत वटी निम्नलिखित घटको को मिल कर बनाया जाता हैं:-

घटक द्रव्यमात्रा
भूमि आमला12.50 मिलीग्राम
पुनर्नवा12.50 मिलीग्राम
मकोय12.50 मिलीग्राम
चित्रक12.50 मिलीग्राम
आमला12.50 मिलीग्राम
हरड़ छोटी12.50 मिलीग्राम
बहेड़ा12.50 मिलीग्राम
सौंफ12.50 मिलीग्राम
तुलसी12.50 मिलीग्राम
निशोध12.50 मिलीग्राम
कुटकी12.50 मिलीग्राम
अतीस12.50 मिलीग्राम
बेल12.50 मिलीग्राम
पुदीना12.50 मिलीग्राम
अजवायन12.50 मिलीग्राम
घृत कुमारी12.50 मिलीग्राम
गिलोय50.00 मिलीग्राम
सनाय50.00 मिलीग्राम
अतिबल50.00 मिलीग्राम

दिव्य उदरामृत वटी  लाभ एवं प्रयोग

दिव्य उदरामृत वटी में सभी घटकों का पाचन तंत्र पर प्रभाव पड़ता है। प्रत्येक घटक के प्रभाव का प्रदर्शन करने के लिए यहाँ कुछ महत्वपूर्ण लाभ लिखे हैं।

पेट दर्द के उपचार के लिए

दिव्य उदरामृत वटी पेट की अनेक समस्याओं के उपचार में मदद करती है। इसके सेवन से  भूख बढ़ जाती है और पेट दर्द के इलाज के लिए मदद मिलती है। यह दस्त और कब्ज के उपचार के लिए के भी एक बहुत अच्छा उपाय है। दिव्य उदरामृत वटी पेट की गैस, पेट फूलना, उदर विस्तार और पेट के भारीपन को भी दूर करती है।

पाचन संबंधी विकारो के उपचार के लिए

दिव्य उदरामृत वटी में मौजूद जड़ी-बूटियां कई रोगों जैसे पेट फूलना, उल्टी, मतली, अपच आदि से बहुत ही जल्दी राहत देती हैं। पाचन संबंधी विकारो से राहत देने और उनके रोकथाम के लिए दिव्य उदरामृत वटी एक अद्भुत प्राकृतिक उपाय है।

पुराने बुखार और गैस संबंधी रोगों को दूर करने के लिए

दिव्य उदरामृत वटी पेट पर सीधा असर करती हैं इसलिए यह गैस और पुराने बुखार की रोकथाम करने के लिए असरदार हैं इसके अलावा पीलिया,अनीमिया जैसी बिमारियों के लिए भी असरदार हैं।

कब्ज के लिए

दिव्य उदरामृत वटी में मौजूद औषधियां पूरी तरह से कुदरती हैं और इनका कोई दुष्प्रभाव नही होता। इसमें मौजूद घृत कुमारी और गिलोय पुरानी से पुरानी कब्ज को कम करने में सहायक हैं, इसके घटक एसिडिटी जैसे रोग की रोकथाम में भी सहायक हैं।

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