आयुर्वेदिक प्रोप्राइटरी मेडिसिन

दिव्य वातारि चूर्ण

दिव्य वातारि चूर्ण (Divya Vatari Churna) को 100 % आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से मिला कर बनाया जाता हैं जो गठिये के लिए एक बेहतरीन औषधि हैं। यह सोंठ, विधारा, अश्वगंधा और मेथी का मिश्रण हैं जो गठिये के अलावा जोड़ो के दर्द के लिए भी लाभदायक हैं। यह एक ऐसा चूर्ण हैं जो जोड़ो की अकडन और दर्द को न सिर्फ कम करता हैं बल्कि उसको जड़ से ख़तम करने के लिए भी लाभदायक हैं। प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बनी यह औषधि पूरी तरह से सुरक्षित हैं और इसका कोई दुष्प्रभाव नही हैं। इसके प्रयोग का एक और फायदा यह भी हैं की यह जोड़ो का पोषण करता हैं जिससे जोड़ो में दर्द नही होती और पीड़ित फिर से अपना काम आसानी से कर सकता हैं।

दिव्य वातारि चूर्ण के घटक

दिव्य वातारि चूर्ण निम्नलिखित घटको का मिश्रण हैं:-

घटक द्रव्यमात्रा
सोंठ1  ग्राम
विधारा1 ग्राम
अश्वगंधा1  ग्राम
मेथी1 ग्राम
कुटकी1  ग्राम

वातारि चूर्ण के लाभ एवं उपयोग

दिव्य वातारि चूर्ण जोड़ो और माशपेशियों के दर्द के लिए बहुत ही लाभकारी हैं यह बाजार में उपलब्ध उन कुछ औषधियों में से एक हैं जो गठिये का बेहतरीन उपचार करती हैं और गठिये के रोगियों को सामान्य जीवन जीने के लिए मदद करते हैं। इससे जोड़ो के अन्य रोगों में भी रहत मिलती हैं।

कई महिलायो को रजोनिवृत्ति के बाद ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी हो जाती हैं जिसमे भी जोड़ो में समस्या आ जाती हैं, दिव्य वातारि चूर्ण इस समस्या की रोगथाम के लिए भी बहुत उपयोगी हैं।

दिव्य वातारि चूर्ण उन बूढ़े लोगो के लिए उपयोगी हैं जो ठीक से चल पाने में भी असमर्थ हैं क्योंकि उम्र बढ़ने के कारण उनके जोड़ कमजोर हो चुके होते हैं। यह चूर्ण हड्डियों और जोड़ो को मजबूत बनाता हैं, ताकि वो अपने सामान्य काम कर सके।

दिव्य वातारि चूर्ण जोड़ो तक पोषक तत्व पहुंचाता हैं जिससे इससे सम्बंधित समस्याएं न केवल कम होती हैं बल्कि शरीर को भी ऊर्जा मिलती हैं।

इन सब फायदों के अलावा यह चूर्ण शरीर के अन्य दर्दो जैसे कमर दर्द, पीठ कर दर्द और सभी तरह से वात रोगों से छुटकारा भी दिलाता हैं।

औषधीय मात्रा निर्धारण एवं व्यवस्था

दिव्य वातारि चूर्ण की प्रतिदिन 2-4 ग्राम की मात्रा में लेना चाहिए। इसका सेवन दिन में दो बार करना चाहिए और खाना खाने के बाद लेना चाहिए (दोपहर के खाने और रात के खाने के बाद )। दिव्य वातारि चूर्ण का सेवन गर्म दूध या पानी के साथ लेने से अच्छे परिणाम मिलते हैं या फिर डॉक्टर के निर्देशानुसार इस चूर्ण का सेवन करना चाहिए। इसको रोजाना लंबी अवधि के लिए लिया जा सकता हैं इससे कोई नुकसान नही होता।

दुष्प्रभाव

दिव्य वातारि चूर्ण पूरी तरह से हर्बल जड़ी-बूटियों से मिल कर बना हैं इसको कोई दुष्प्रभाव नही होता। इसका सेवन बताये हुए निर्देशो के अनुसार करना चाहिए और अगर कोई समस्या होती हैं तो अपने डॉक्टर की राय लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं भी इसका सेवन कर सकती हैं इस आयुर्वेदिक औषधि से कोई हानि नही होती हैं।

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Dr. Jagdev Singh

डॉ जगदेव सिंह (B.A.M.S., M.Sc. Medicinal Plants) आयुर्वेदिक प्रैक्टिशनर है। वह आयुर्वेद क्लिनिक ने नाम से अपना आयुर्वेदिक चिकित्सालय चला रहे हैं।उन्होंने जड़ी बूटी, आयुर्वेदिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक आहार के साथ हजारों मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया है।आयुर टाइम्स उनकी एक पहल है जो भारतीय चिकित्सा पद्धति पर उच्चतम स्तर की और वैज्ञानिक आधार पर जानकारी प्रदान करने का प्रयास कर रही है।

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