दिव्य यौवनामृत वटी (Divya Yauvanamrit Vati) पुरुषों में हर तरह के यौन रोगों के उपचार के लिए एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है। दिव्य यौवनामृत वटी पौष्टिक, शरीर में ऊर्जा को बढ़ने वाली और शरीर को चुस्त रखने वाले गुणों से भरपूर हैं। दिव्य यौवनामृत वटी में मौजूद घटक पुरुषो में यौन इच्छा बढ़ाने में सहायक हैं, इसके अलावा यह रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढाती हैं। यह कमजोरी और थकावट को दूर करती हैं और शुक्राणुओ की संख्या को बढ़ाने में भी मदद करती हैं नपुसंकता को दूर करने में भी यह औषधि सहायक हैं और हमेशा जवान बनाये रखती हैं।

दिव्य यौवनामृत वटी के घटक

दिव्य यौवनामृत वटी निम्नलिखित घटको को मिला कर बनाई जाती है:-

घटक द्रव्यमात्रा
अश्वगंधा12 मिलीग्राम
कोंच12 मिलीग्राम
बला12 मिलीग्राम
शतावर8.25 मिलीग्राम
सफ़ेद मूसली12 मिलीग्राम
जावित्री12 मिलीग्राम
जायफल17.50 मिलीग्राम
कुचला शुद्ध2 मिलीग्राम
अकरकरा12 मिलीग्राम
जुंदवेस्तर12 मिलीग्राम
बबूल1.75 मिलीग्राम
स्वर्ण भस्म0.25 मिलीग्राम
प्रवाल पिस्टी0.25 मिलीग्राम
वंग भस्म5.50 मिलीग्राम
शिलाजीत शुद्ध5.50 मिलीग्राम

लाभ एवं प्रयोग

दिव्य यौवनामृत वटी  में सभी घटकों का पुरुषों के यौन स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। प्रत्येक घटक के प्रभाव का प्रदर्शन करने के लिए यहाँ कुछ महत्वपूर्ण लाभ लिखे हैं।

पुरुषों के लिए लाभदायक

दिव्य यौवनामृत वटी पुरुषों के यौन संबंधी रोगों की रोकथाम के लिखे बहुत ही लाभदायक औषधि हैं। इसके नियमित सेवन से यह कमजोरी और थकावट को कम करती हैं और पुरुषों को नपुंसकता की समस्या में इससे सेवन से फायदा होता हैं। यह पुरुषों में होने वाले स्वपनदोष जैसे रोग को दूर करती हैं और शुक्राणुओ को भी स्वस्थ बनाती हैं। दिव्य यौवनामृत वटी यौन शक्ति को बढाती हैं और शीघ्रपतन को भी रोकती हैं इसके अलावा यह यौन इच्छा को बढ़ाने के लिए भी फायदेमंद हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए फायदेमंद

दिव्य यौवनामृत वटी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाती हैं और शरीर को चुस्त बनाये रखती हैं, इसमें मौजूद घटक जैसे शिलाजीत को प्राचीन काल से ही पुरुषों के यौन रोगों की रोकथाम के लिए प्रयोग किया जाता रहा हैं। इसके अलावा इनमे मौजूद शतावर, सफ़ेद मूसली,जायफल पुरुषों की यौन कमजोरी को दूर करने और नपुंसकता के लिए अच्छी औषधि हैं, प्रवाल पिष्ठि यौन इच्छाओ को बढ़ाता हैं और हार्मोन्स को संतुलित रखने में सहायता करता हैं,वंग भस्म शुक्राणुओ को स्वस्थ बनाये रखती हैं और शरीर को चुस्त रखने के अलावा सदैव युवा होने का अहसास दिलाती हैं।अश्वगंधा भी यौन कमजोरी को दूर करने में लाभदायक हैं  यह औषधि ह्रदय और दिमाग को भी मजबूत बनाती हैं।

संदर्भ

  1. Divya Yauvanamrit Vati
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