गिलोय घन वटी सभी प्रकार के बुखार में फद्येमंद होती है। खासकर इसका प्रयोग रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने के लिए किया जाता है। चरक संहिता में गिलोय को मेध्य रसायन माना है। रसायन होने के कारण यह बुद्धिवर्धक और आयुवर्धक है।

इसका प्रयोग चिरकालीन और जीर्ण रोगावस्था में अधिक होता है। और इन रोगों में यह अच्छा प्रभाव डालती है। इसलिए इसको जीर्ण ज्वर अर्थात क्रोनिक फीवर और जीर्ण आमवात या क्रोनिक रहूमटॉइड आर्थराइटिस और वातरक्त या गाउट में दिया जाता है।

गिलोय घन वटी के घटक द्रव्य

जैसे कि नाम से ही सिद्ध होता है की इसमें गिलोय एक मुख्य घटक द्रव्य है।

गिलोय आयुर्वेदिक चिकित्सकों के बीच एक लोकप्रिय जड़ी बूटी है। जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियों में भी किया जाता है। संस्कृत में, गिलोय को ‘अमृता’ कहते हैं, जो इसके औषधीय गुणों के कारण कहा जाता है। गिलोय सदा अमर रहने वाली बेल है और इसके अनगिनत लाभ हैं। नीम के पेड़ पर चढ़ी हुई गिलोय (गुडूची) बेल ज्यदा गुण वाली होती है, क्योंकि इसमें नीम के गुण भी आ जाते हैं। नीम के पेड़ पर चढ़ी हुई गिलोय से यदि वटी बनाई जाये तो यह बुखार में भी अधिक उपयोगी सिद्ध होती है।

गिलोय वानस्पतिक नाम टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया (Tinospora Cordifolia) है। इसका सत्व निकालकर गोली या कैप्सूल बनाये जाते हैं, जिन्हें गिलोय घन वटी कहा जाता है।

संघटक का नाम हर गोली में है:
गिलोय (गुडूची) सत्व – Tinospora Cordifolia extract 500 मिलीग्राम

गिलोय घन वटी की प्रत्येक गोली में 500 मिलीग्राम गिलोय एक्सट्रेक्ट होता है।

पतंजलि गिलोय घन वटी बाजार में आमतौर पर और आसानी से उपलब्ध है, जिसे दिव्य फार्मेसी द्वारा निर्मित किया जाता है।

गिलोय घन वटी का निर्माण कैसे किया जाता है?

सब से पहले हम बात करते है कि गिलोय घन वटी होती क्या है और यह कैसे बनती है?

गिलोय घन वटी गिलोय के एक्सट्रैक (extract) से बनाई जाती है। एक्सट्रैक को आयुर्वेद में घन का नाम दिया जाता है। गिलोय घन वटी के निर्माण से पहले गिलोय की शाखाएं से घन बनाया जाता है।

घन बनाने के लिए गिलोय की शाखाएं को कूट कर उसे पानी में थोड़ी देर रखा जाता है और फिर उस का क्वाथ बनाया जाता है। क्वाथ को छान कर फिर क्वाथ को पुनः थीमी थीमी आंच पर पकाया जाता है और जब वह गाढ़ा हो जाता है तो उसको चूल्हे से उतार कर धूप में गोली बनाने योग्य अवस्था तक सुखाया जाता है। फिर इसकी गोलीयां बना ली जाती है जिनको गिलोय घन वटी या गुडूची घन वटी कहा जाता है।

यदि गिलोय के एक्सट्रैक्ट से गोलियाँ बनानी हो तो आवश्यकता अनुसार इसमें बबूल अर्थात कीकर की गोंद मिलाकर गोलियां बनाई जाती है।

गिलोय घन वटी के औषधीय कर्म

गिलोय घन वटी (Giloy Ghan Vati) में निम्नलिखित चिकित्सीय गुण हैं।

  • रोग प्रतिरोधक शक्ति वर्धक – इम्यूनिटी बूस्टर
  • एंटी ऑक्सीडेंट (प्रतिउपचायक)
  • ज्वरोत्तर दुर्बलता नाशक
  • मस्तिष्क बल्य – मस्तिष्क को ताकत देने वाला
  • वेदनास्थापन – पीड़ाहर (दर्द निवारक)
  • ज्वरनाशक – बुखार में लाभदायक
  • शोथहर – सूजन कम करने में सहायक है
  • कैंसर विरोधी
  • ह्रदय – दिल को ताकत देने वाला
  • रक्तवर्धक
  • रक्त शोधक
  • पाचन – पाचन शक्ति बढाने वाली
  • अनुलोमन – पेट से हवा को बाहर निकालने वाला
  • आमपाचन – शरीर के टॉक्सिन को नष्ट करने वाली

आयुर्वेद मत अनुसार गिलोय घन वटी कफहर और वातनाशक है और पित्त संशोधक है। यह शरीर के लिए बल्य औषधि का भी काम करती है। क्योंकि यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है, इसलिए इसका प्रयोग आमतौर पर होने वाली बीमारियों जैसे सर्दी जुकाम बुखार आदि की रोकथाम के लिए किया जाता है।

इसमें ज्वरनाशक, वातशामक, एंटीऑक्सीडेंट (antioxidant) और कैंसर विरोधी गुण भी होते हैं।

आचार्य भावप्रकाश के अनुसार यह अत्यधिक प्रभावी आम पाचक और रक्त शोधक औषधि है।  अनपचे भोजन से कई तरह के विषाक्त पदार्थों का निर्माण पेट में होता है जो कई तरह के रोगो का कारण बनता है इसको आयुर्वेद में आम कहा गया है। गिलोय घन वटी इस तरह के विषाक्त पदार्थों के निर्माण को रोकती है और भोजन का पाचन भी कराती है।

उच्च यूरिक एसिड और गठिया में भी आम का बनाना ही मुख्य कारण होता है जो बाद में आमविष में परिवर्तित हो जाता है। और गाउट और गठिया के लक्षणों की उत्पत्ति का कारण भी बनता है।

आयुर्वेद में इसके अतिरिक्त इसका प्रयोग हृदय की दुर्बलता, एनीमिया, त्वचा रोग, पीलिया और कैंसर जैसी अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। गिलोय स्वाइन फ्लू का इलाज करने की क्षमता के कारण बेहद लोकप्रिय हो गया है।

गिलोय घन वटी के चिकित्सीय संकेत

गिलोय घन वटी निम्नलिखित व्याधियों में लाभकारी है:

  1. जीर्ण ज्वर और सभी तरह के बुखार
  2. ज्वरोत्तर दुर्बलता
  3. वातरक्त
  4. तृष्णा – अधिक प्यास लगना
  5. क्षीण प्रतिरोधक क्षमता में कमी -रोगों से लड़ने की क्षमता कम होने पर
  6. अग्निमांद्य या मंदाग्नि -भूख ना लगने पर
  7. यकृत विकार
  8. कामला या पीलिया (Jaundice)
  9. पाण्डु रोग (एनीमिया – anemia)
  10. कास – खांसी
  11. मधुमेह
  12. चर्म रोग
  13. हृदय दुर्बलता – हृदय की निर्बलता या कमजोरी
  14. उच्च कोलेस्ट्रॉल

गिलोय घन वटी के लाभ और औषधीय उपयोग

गिलोय घन वटी का उपयोग रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और आमतौर होने वाले संक्रमणों (infections) से बचने के लिए किया जाता है।

गिलोय घन वटी एक प्राकृतिक और सुरक्षित हर्बल उपचार है जिसका उपयोग कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं और जीर्ण रोगों में होता है। यह औषधि आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है जिसके कारण आप का शरीर कई तरह के रोगों को रोकने में समर्थ हो जाता है। यह आपके अंदर बनाने वाले कई विषैले पदार्थों और आम दोष का नाश करता है जिससे आप के रोगी होने की संभावना कम हो जाती है।

प्रमुख लाभ

  1. यह शरीर और मांस पेशियों में बल प्रदान करती है। मांस पेशियों में दर्द और शरीर में सभी भी प्रकार की सूजन में लाभ देती है।
  2. इसके प्रयोग से शरीर दर्द और थकान में आराम मिलता है।
  3. पुराने ज्वर की उच्चतम औषधि है।
  4. रक्त शोधक होने के कारण यह त्वचा रोगों में लाभदायक है।
  5. इसका सेवन मूत्र विसर्जन को बढ़ाता है जिससे विषैले टॉक्सिन बाहर निकल जाते हैं।
  6. यदि आप शारीरिक कमजोरी का अनुभव कर रहे हैं तो इसके सेवन से लाभ ले सकते है।
  7. यदि मल में से बदबू आती हो, आंव (mucus) आती हो, तो यह बहुत फद्येमंद है।
  8. यह औषधि बार बार होने वाले संक्रमण की आवृत्ति को कम करती है। इसलिए यह बार बार होने वाले जुकाम या फ्लू को रोकने में मदद करती है।
  9. ह्रदय के संदर्भ में यह दिल को ताकत देती है।
  10. यह ज्वर के बाद होने वाली दुर्बलता को दूर करती है।
  11. पुराने ज्वर में लाभ देती है। बार बार होने वाले बुखार के लक्षणों को कम करती है।
  12. शरीर को तनाव से मुक्ति देती है।
  13. शरीर दर्द और थकान में आराम मिलता है।

अब बात करते है इसके भिन भिन रोगों में उपयोग के बारे में और जानते है कि यह कैसे काम करती है और इसका हम कैसे प्रयोग कर सकते है।

आवर्तक संक्रमण (बार बार होने वाले infections)

जब आपके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी होती है तो आपका शरीर कई तरह के रोगों से ग्रस्त होने लगता है। आपको सामान्य सर्दी जुकाम, बुखार और अन्य संक्रमण (infections) बार-बार होने लगते हैं।

यदि आप को बार बार कोई रोग हो रहा है तो यह कम हुई इम्युनिटी का सूचक है।

गिलोय घन वटी का उपयोग आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। यह शरीर में संक्रमण होने से रोकता है और अन्य बीमारियों के होने की प्रवृति को कम करता है जिससे आप को जल्दी कोई बीमारी नहीं होती।

इसके अतिरिक्त यदि दुर्भाग्यवश कोई इन्फेक्शन हो भी जाए तो आपके शरीर की बड़ी हुई रोग प्रतिरोधक क्षमता बीमारी को जल्दी दूर करने में और रोग से लड़ने में मदद करती है और यह बीमारी की गंभीरता को भी कम करती है।

ज्वर उपचार

हालांकि गिलोय घन वटी बुखार में काम प्रयोग होता है। फिर भी इसका प्रयोग करने से ज्वर की तीव्रता कम हो जाती है। इसका प्रयोग जीर्ण ज्वर में ज्यादा फायदेमंद होता है। इसका प्रभाव ज्वर को उतारने से ज्यादा, ज्वर को होने से रोकने में अधिक लाभदायक होता है।

ज्वर को उतारने के लिए इसका यदि एकला प्रयोग किया जाए तो यह ज्वर पर हल्का असर डालती है। परंतु गिलोय घन वटी की 2 गोली के साथ 500 मिलीग्राम प्रवाल पिष्टी (Praval Pishti) और 500 मिलीग्राम गोदंती भस्म (Godanti Bhasma) या 1 ग्राम संताप शामक मिश्रण का भी प्रयोग किया जाए तो यह एक दो घंटे में ज्वर कम करने में अति लाभदायक होती है। एक वयस्क इन औषधियों को दिन में तीन चार बार ले सकता है।

इस सम्मिश्रण में ज्वर कम करने के गुण होते हैं और यह बुखार को उतार देता है। परंतु ज्वर के प्रकार और कारण के अनुसार भी औषध देने की भी जरूरत होती है।

यदि ज्वर का कारण कोई वायरल इन्फेक्शन हो या सर्दी जुकाम के कारण ज्वर हुआ हो तो इसके साथ तुलसी रस का प्रयोग लाभदायक होता है। यदि जुकाम जीर्ण हो गया हो तो इस सम्मिश्रण का प्रयोग हो सकता है।

परन्तु यदि सर्दी जुकाम नया हो अर्थात एक दो दिन ही हुए हो तो प्रवाल पिष्टी का प्रयोग कम मात्रा में करना चाहिए या गिलोय घन वटी को सिर्फ गोदन्ती भस्म और तुलसी रस के साथ ही प्रयोग करना चाहिए। नए जुकाम में काली मिर्च भी इसके साथ लेनी चाहिए।

जीर्ण ज्वर

गिलोय घन वटी अकेली सिर्फ जीर्ण ज्वर में काम करती है। इस लिए इस का प्रयोग जीर्णज्वर में उत्तम है। जैसा कि पहले बताया गया है कि यह वटी ज्वर को बढ़ने और चढ़ने से रोकती है। जीर्ण ज्वर में ऐसी ही औषधि की जरूरत होती है। जो ज्वर को चढ़ने से रोके और शरीर को बल दे।

आयुर्वेद में जीर्ण ज्वर में इसके साथ स्वर्ण वसंतमालती रस (Swarna Vasant Malti Ras Gold) या जसद भस्म (Jasad Bhasma) का भी प्रयोग किया जाता है। यदि रोगी को भूख ठीक लगती हो तो लघु वसंत मालती रस का भी प्रयोग स्वर्ण वसंतमालती रस के स्थान पर किया जा सकता है।

इसके अलावा इसके साथ अन्य बहुत सी औषधियां का प्रयोग रोग और रोगी के अनुसार किया जा सकता है। इसलिए रोग और रोगी का परीक्षण कर ही अन्य औषधियों के बारे में बताया जा सकता है। आमतौर पर इनका ही प्रयोग किया जाता है और रोगी को लाभ मिल जाता है ।

ज्वरोत्तर दुर्बलता

बहुत से रोगियों को ज्वर के बाद जा किसी जीर्ण बीमारी के बाद दुर्बलता आ जाती है। लंबी बीमारी और ज्वर के बाद होने वाली दुर्बलता में गिलोय घन वटी बहुत लाभ देती है। यह शारीरिक कमजोरी, दर्द और थकान को दूर करती है।

एंटीबायोटिक और अन्य दवाओं के दुष्प्रभाव

अक्सर एलोपैथिक उपचार के बाद, एंटीबायोटिक दवाओं का दुष्प्रभाव आपके गुर्दे और यकृत पर होता है। गिलोय घन वटी का सेवन आपके गुर्दे और यकृत को सुरक्षित रखता है और इन एलोपैथिक दवाओं के दुष्प्रभावों को दूर करता है।

गाउट या यूरिक एसिड का बढ़ना

लगातार तीन महीने तक गिलोय घन वटी के साथ पुनर्नवारिष्ट या पुनर्नवा चूर्ण और चंद्रप्रभा वटी का सेवन करने से यूरिक एसिड (uric acid) का स्तर कम हो जाता है। यह गाउट के इलाज के लिए अति उत्तम औषधि है।

सेवन विधि और मात्रा

आइए अब बात करते है गिलोय घन वटी को कैसे लेना चाहिए और कितनी मात्रा में इसका प्रयोग करना चाहिए।

गिलोय घन वटी की सामान्य औषधीय मात्रा व खुराक इस प्रकार है:

औषधीय मात्रा (Dosage)

बच्चे 1 गोली
वयस्क 2 गोली

सेवन विधि

गिलोय घन वटी लेने का उचित समय (कब लें?) सुबह और शाम
दिन में कितनी बार लें? 2 बार
अनुपान (किस के साथ लें?) गुनगुने पानी

रोगी के स्वास्थ्य के अनुसार गिलोय घन वटी के साथ चिकित्सा की अवधि एक हफ्ते से लेकर छे महीने या इसके अधिक तक हो सकती है।

बुखार में बच्चे के लिए एक एक गोली दिन में २ से ४ बार उपयुक्त है। अन्य रोगों में एक एक गोली सुबह शाम को ही लेनी चाहिए।

वयस्क के लिए यदि बुखार में इसका प्रयोग कर रहे हो तो दो दो गोली दिन में २ से ४ बार ली जा सकती है। अन्य रोगों में दो दो गोली सुबह शाम को ही लेनी चाहिए।

गुनगुने पानी के साथ इसको लेना चाहिए।

इम्युनिटी बढ़ाने के लिए और गाउट में 3 से 6 महीने इसका प्रयोग करना चाहिए।

दुष्प्रभाव एवं साइड इफेक्ट्स

यदि गिलोय घन वटी का सेवन संतुलित मात्रा में एक निश्चित अवधि तक किया जाए तो इसके को दुष्प्रभाव नहीं देखे गए। इसका कोई अभी तक कोई गंभीर दुष्प्रभाव साहमने नहीं आया।

सावधानियां

आपको सलाह दी जाती है कि चिकित्सक के परामर्श से ही गिलोय घन वटी लें। यह एक प्राकृतिक और सुरक्षित हर्बल उपचार है, परंतु कुछ मामलों में कुछ सावधानियां आवश्यक है।

मधुमेह

यदि आप मधुमेह के रोगी हैं और एलोपैथिक मेडिसिन ले रहे है तो इस औषधि के उपयोग के समय आपको शर्करा के स्तर अर्थात ब्लड सुगर लैवल की जांच करते रहना चाहिए।

क्योंकि गिलोय भी मधुमेह में लाभदायक होती है और यह ब्लड सुगर लैवल को सामान्य करने में मदद करती है। यदि आप का ब्लड सुगर लैवल सामान्य आ जाता है और आप एलोपैथिक दवा लेते रहते है तो आप की एलोपैथिक मेडिसिन आप के ब्लड सुगर लैवल को सामान्य से भी अधिक कम कर सकती है। जोकि एक घातक अवस्था होती है। ऐसी स्थिति में चिकित्सक का परामर्श लें और मधुमेह की दवा के समय में बदलाव करें।

गर्भावस्था और स्तनपान

यदि आप गर्भवती हैं या स्तनपान कराती हैं। तो परामर्श लें क्योंकि अभी तक इन स्थितियों में औषधि के प्रभाव के बारे में पर्याप्त शोध नहीं हुआ है। इसलिए सुरक्षित साइड रहना ही बुद्धिमानी है।

संदर्भ