गिलोय घन वटी घटक द्रव्य, औषधीय कर्म, उपयोग, लाभ, मात्रा तथा दुष्प्रभाव

Giloy Ghan Vati Ingredients, Medicinal Actions, Benefits, Uses, Dosage & Side Effects

गिलोय घन वटी (Giloy Ghan Vati) गिलोय के सत्व (extract) से बनाई जाती है। गिलोय चिकित्सकों के बीच एक लोकप्रिय जड़ी बूटी है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियों में भी किया जाता है। संस्कृत में, गिलोय को ‘अमृता’ कहते हैं, जो इसके औषधीय गुणों के कारण कहा जाता है। गिलोय सदा अमर रहने वाली बेल है और इसके अनगिनत लाभ हैं। नीम के पेड़ पर चढ़ी हुई गिलोय (गुडूची) बेल ज्यदा गुण वाली होती है, क्योंकि इसमें नीम के गुण भी आ जाते हैं।

इसी गिलोय (वानस्पतिक नाम टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया – Tinospora Cordifolia) का सत्व निकालकर गोली या कैप्सूल बनाये जाते हैं, जिन्हें गिलोय घन वटी कहा जाता है।

गिलोय घन वटी का उपयोग रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और आम संक्रमणों से बचने के लिए किया जाता है। इसमें ज्वरनाशक, वातनिरोधक, प्रतिउपचायक (anti-oxidant) और कैंसर विरोधी गुण हैं। इसको एक अत्यधिक प्रभावी रक्त शोधक के रूप में जाना जाता है। साथ ही हृदय की दुर्बलता, गठिया, एनीमिया, कुष्ठ रोग, पीलिया और कैंसर जैसी अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। गिलोय स्वाइन फ्लू का इलाज करने की क्षमता के कारण बेहद लोकप्रिय हो गया है।

गिलोय घन वटी के घटक

संघटक का नाम हर गोली में है:
गिलोय (गुडूची) – Tinospora Cordifolia सत्व (extract) 500 मिलीग्राम

गिलोय घन वटी की प्रत्येक गोली में 500 मिलीग्राम गिलोय सत्व होता है।

गिलोय घन वटी के औषधीय कर्म

गिलोय घन वटी (Giloy Ghan Vati) में निम्नलिखित चिकित्सीय गुण हैं।

  • रोग प्रतिरोधक शक्ति वर्धक – इम्यूनिटी बूस्टर
  • एंटी ऑक्सीडेंट (प्रतिउपचायक)
  • ज्वरोत्तर दुर्बलता नाशक
  • मस्तिष्क बल्य – मस्तिष्क को ताकत देने वाला
  • वेदनास्थापन – पीड़ाहर (दर्द निवारक)
  • ज्वरनाशक – बुखार में लाभदायक
  • शोथहर – सूजन कम करने में सहायक है
  • कैंसर और उत्परिवर्तन विरोधी
  • ह्रदय – दिल को ताकत देने वाला
  • रक्तवर्धक
  • रक्त शोधक
  • पाचन – पाचन शक्ति बढाने वाली
  • अनुलोमन
  • आमपाचन – शरीर के टॉक्सिन को नष्ट करने वाली

गिलोय घन वटी के चिकित्सीय संकेत

गिलोय घन वटी निम्नलिखित व्याधियों में लाभकारी है:

  1. वातरक्त
  2. तृष्णा – अधिक प्यास लगना
  3. क्षीण प्रतिरोधक क्षमता में कमी – रोगों से लड़ने की क्षमता कम होने पर
  4. हृदय दुर्बलता – हृदय की निर्बलता या कमजोरी
  5. उच्च कोलेस्ट्रॉल
  6. ज्वरोत्तर दुर्बलता
  7. कास – खांसी
  8. अग्निमांद्य या मंदाग्नि – भूख ना लगने पर
  9. यकृत विकार
  10. कामला या पीलिया (Jaundice)
  11. पाण्डु रोग (एनीमिया – anemia)
  12. मधुमेह
  13. चर्म रोग
  14. स्व – प्रतिरक्षित विकार – Autoimmune Diseases

गिलोय घन वटी के लाभ और औषधीय उपयोग

गिलोय घन वटी एक प्राकृतिक और सुरक्षित हर्बल उपचार है जिसका उपयोग सरल स्वास्थ्य समस्याओं और  गंभीर रोगों में होता है। यह औषधि आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है जिससे कि आप संक्रमण से लड़ सकें। यह आपके अंदर बनाने वाले विषैले टॉक्सिन्स और आम का नाश करता है जिससे आप के रोगी होने की संभावना कम होती है।

प्रमुख लाभ

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।
  • यह औषधि बार बार होने वाले संक्रमण को कम करती है।
  • बार बार होने वाले बुखार के लक्षणों को कम करती है।
  • शरीर और मांस पेशियों में बल प्रदान करती है।
  • ज्वर के बाद होने वाली दुर्बलता को दूर करती है।
  • मांस पेशियों में दर्द और शरीर में किसी भी प्रकार की सूजन में लाभ देती है।
  • शरीर को तनाव से मुक्ति देती है।
  • शरीर दर्द और थकान में आराम मिलता है।
  • पुराने ज्वर में लाभ देती है।
  • यह रक्त शोधक है जिससे त्वचा रोगों में लाभ मिलता है।
  • इसका सेवन मूत्र विसर्जन को बढ़ाता है जिससे विषैले टॉक्सिन बाहर निकल जाते हैं।
  • यदि आप शारीरिक कमजोरी का अनुभव कर रहे हैं तो इसके सेवन से लाभ मिलता है।
  • बार बार होने वाले संक्रमणों को कम करती है।
  • पुरानी कब्ज में लाभ मिलता है।
  • यह औषधि बार बार होने वाले जुकाम या फ्लू को रोकने में मदद करती है।
  • दिल को बल देती है।

आवर्तक संक्रमण (बार बार होने वाले संक्रमण)

जब आपके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी होती है तो आपको बार बार संक्रमण हो जाता है। कई लोगो को बार बार सर्दी जुकाम होता है और अन्य रोग भी हो सकते है। यह सब कम हुई इम्युनिटी का सूचक है। गिलोय घन वटी का उपयोग आपके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे कारण आपका शरीर संक्रमण से लड़ता है और आप को जल्दी कोई बीमारी नहीं लगती।

ज्वर उपचार और उसकी बाद की दुर्बलता

हालाँकि गिलोय घन वटी ज्वर पर हल्का असर डालती है। परंतु गिलोय घन वटी की 2 गोली के साथ प्रवाल पिष्टी (Prawal Pishti) और गोदंती भस्म (Godanti Bhasma) की 500 मिलीग्राम लेने पर ज्वर आधे से एक घंटे में कम हो जाता है। एक वयस्क इन औषधियों को दिन में दो बार ले सकता है। गिलोय घन वटी का अकेली सिर्फ जीर्णज्वर में काम करती है। इस लिए इस का प्रयोग जीर्णज्वर में उत्तम है।

हालाँकि इस सम्मिश्रण में ज्वर कम करने के गुण होते हैं। साथ में हलके संक्रमण में आप तुलसी रस ले सकते हैं।

लंबी बीमारी और ज्वर के बाद होने वाली दुर्बलता में गिलोय घन वटी बहुत लाभ देती है। वह शारीरिक कमजोरी, दर्द और थकान को दूर करती है।

एंटीबायोटिक और अन्य दवाओं के दुष्प्रभाव

अक्सर एलोपैथिक उपचार के बाद, एंटीबायोटिक दवाओं का दुष्प्रभाव आपके गुर्दे और यकृत पर होता है। गिलोय घन वटी का सेवन आपके गुर्दे और यकृत को सुरक्षित रखता है और इन एलोपैथिक दवाओं के दुष्प्रभावों को दूर करता है।

गाउट या यूरिक एसिड का बढ़ना

लगातार तीन महीने तक गिलोय घन वटी के साथ पुनर्नवारिष्ट का सेवन करने से यूरिक अम्ल (uric acid) का स्तर कम हो जाता है। यह गाउट के इलाज के लिए अति उत्तम औषधि है।

सेवन विधि और मात्रा

गिलोय घन वटी की सामान्य औषधीय मात्रा व खुराक इस प्रकार है:

औषधीय मात्रा (Dosage)

बच्चे 1 गोली
वयस्क 2 गोली

सेवन विधि

गिलोय घन वटी लेने का उचित समय (कब लें?) सुबह और शाम
दिन में कितनी बार लें? 2 बार
अनुपान (किस के साथ लें?) गुनगुने पानी

रोगी के स्वास्थ्य के अनुसार गिलोय घन वटी के साथ चिकित्सा की अवधि एक से छे महीने तक हो सकती है।

दुष्प्रभाव

यदि गिलोय घन वटी का सेवन संतुलित मात्रा में एक निश्चित अवधि तक किया जाए तो इसके को दुष्प्रभाव नहीं देखे गए। इसका कोई अभी तक कोई गंभीर दुष्प्रभाव साहमने नहीं आया।

सावधानियां

आपको सलाह दी जाती है कि चिकित्सक के परामर्श से ही गिलोय घन वटी लें। यह एक प्राकृतिक और सुरक्षित हर्बल उपचार है, परंतु कुछ मामलों में कुछ सावधानियां आवश्यक है।

मधुमेह

यदि आप मधुमेह के रोगी हैं तो इस औषधि के उपयोग के समय आपको शर्करा के स्तर की जांच करते रहनी चाहिए। कुछ मामलों में पाया गया है कि गिलोय घन वटी शरीर में शर्करा का स्तर कम कर देती है। इसलिए चिकित्सक का परामर्श लें और मधुमेह की दवा के समय में बदलाव करें।

गर्भावस्था और स्तनपान

यदि आप गर्भवती हैं या स्तनपान कराती हैं, तो परामर्श लें क्योंकि अभी तक इन स्थितियों में औषधि के प्रभाव के बारे में पर्याप्त शोध नहीं हुआ है, इसलिए सुरक्षित रहना ही बुद्धिमानी है।

संदर्भ

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