गिलोय घन वटी घटक द्रव्य, औषधीय कर्म, उपयोग, लाभ, मात्रा तथा दुष्प्रभाव

गिलोय घन वटी

गिलोय घन वटी सभी प्रकार के बुखार में फद्येमंद होती है। खासकर इसका प्रयोग रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने के लिए किया जाता है। चरक संहिता में गिलोय को मेध्य रसायन माना है। रसायन होने के कारण यह बुद्धिवर्धक और आयुवर्धक है। इसका प्रयोग चिरकालीन और जीर्ण रोगावस्था में अधिक …

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च्यवनप्राश

च्यवनप्राश

च्यवनप्राश आयुर्वेद में एक रसायन के रूप में जाना जाता है। रसायन का अर्थ है कि यह रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है, बुढापे को विलंबित करता है और बहुत से रोगों की रोकथाम करता है। इसलिए इसको आयुर्वेद में एक सब से उत्तम स्वास्थ्य सप्लीमेंट की तरह प्रयोग किया जाता …

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नारियल तेल के फायदे

नारियल तेल

नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है।  नारियल के बहुत से लाभ हैं। नारियल तेल का उपयोग न केवल खाने में किया जाता है बल्कि इसका उपयोग और कई कामों में भी किया जाता है। नारियल तेल के बहुत से गुणकारी लाभ हैं।  नारियल के तेल का उपयोग स्वास्थ्य के …

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सेब के सिरके के अदभुत स्वास्थ्य लाभ

सेब का सिरका एक तरल पर्दाथ है जिसका रंग भूरा होता है। यह सेबों के खमीर उठने से बनता हैं इसमें बहुत से पोस्टिक तत्ब पाये जाते है जो मनुष्य की अनेक प्रकार की बिमारियों को दूर करने में सहायक हैं जैसे कि गैंठीयां, थकाबट, मोटापा इत्यादि। यह मनुष्य की …

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अलसी के लड्डू के लाभ और विधि

अलसी औषधीय गुणों से भरपूर है जोकि कई तरह की बिमारियों का उपचार करने के लिए फायदेमंद है। सर्दी में अलसी के लड्डू खाना अत्यंत फायदेमंद है. अलसी के लड्डू त्यार करने की विधि अलसी के लड्डूयों को त्यार करने की विधि बहुत ही आसान है। लड्डूयों को त्यार करने …

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ह्रदय रोग दूर करने के घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे

हृदय रोग एक जानलेवा बीमारी है जो आजकल बहुत से लोगों में बढ़ रही हैं। विश्व में लगभग 30% लोग हृदय रोग से पीड़ित है। भारत में हर साल बहुत से लोगों की मौत दिल के रोगों से हो रही है। हृदय रोगों का मुख्य कारण कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना, तनाव, …

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नीलवम्बू कुदिनीर (नीलवम्बू कषायं)

नीलवम्बू कुदिनीर - नीलवम्बू कषायं हिंदी में

नीलवम्बू कुदिनीर (Nilavembu Kudineer) को नीलवम्बू कषायं (Nilavembu Kashayam) भी कहा जाता है। यह एक सिद्ध चिकित्सा में ज्वर (बुखार) और ज्वर के कारण होने वाले शरीर के दर्द में प्रयुक्त होने वाली एक औषधि है। यह विषाणु संक्रमण (वायरल इन्फेक्शन), चिकनगुनिया और डेंगू फीवर के उपचार और रोकथाम के …

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बीजीआर 34 शुगर ( मधुमेह) के लिए

भारत में ५० लाख से आधिक लोग टाइप-२ मधूमेह रोग से ग्रसित हैं l भारत को मधूमेह की राजधामनी के नाम से भी जाना जाता है l सामान्य शब्दों में टाइप-१ मधूमेह इन्सुलिन के अपर्याप्त उत्पादन एवम स्त्राव के कारन होता है जबकि टाइप-२ मधूमेह इन्सुलिन के दोषपूर्ण प्रतिक्रिया के …

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सितोपलादि चूर्ण

सितोपलादि चूर्ण

सितोपलादि चूर्ण (Sitopaladi Churna) एक आयुर्वेदिक औषधि है। प्राचीन काल के महान ग्रन्थ चरक चिकित्सा स्थान के राजयक्ष्मा अध्याय में इसका उल्लेख है। कुछ अन्य ग्रन्थ जैसे शारंगधर संहिता, गद निग्रह, योग रत्नाकर, भैषज्य रत्नावली आदि में भी इसका उल्लेख खांसी, कफ और बहुत सी अन्य बिमारियों के उपचार में …

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सारस्वतारिष्ट स्वर्ण युक्त (सारस्वतारिष्टम गोल्ड)

सारस्वतारिष्ट

सारस्वतारिष्ट या Saraswatharishtam) एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग प्राचीन काल से कई मानसिक रोगों के उपचार ले लिए किया जाता रहा है। यह स्मरण शक्ति, ध्यान केंद्रित करना, बुध्दिमत्ता, तनाव, आयु, बल, वीर्य, यौन एवम सामान्य दुर्बलता, अवसाद, अनिद्रा, व्यग्रता, हृदय रोग, भूख न लगना, बेचैनी आदि की एक …

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