वात दोष के गुण, कर्म, मुख्य स्थान, प्रकार, असंतुलन, बढ़ने और कम होने के लक्षण

"वा गतिगंधनयो" धातु से वात अर्थात वायु शब्द निष्पति होती है।  वात एक अभिव्यक्ति है और मुख्य कार्यकारी शक्ति है जो श्वाश, शारीरिक और मानसिक कर्म, परिवहन, संचलन, चिंतन, चेष्टायुक्त कार्य आदि के लिए जिम्मेदार होती है।
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आम, आम विष, आम के लक्षण और प्रभाव एवं आम की उत्पति कैसे रोकें

आयुर्वेद में आम एक महत्वपूर्ण कारक है। यह पोषण नाली, कोशिका और उत्तकों में कम पाचन अग्नि के कारण शरीर में पैदा होता है। आम शरीर की प्रणालियों को रोक सकता है, जिनसे कई बीमारियां होती । आम को विषाक्त कणों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो शरीर में कमजोर पाचन या चयापचय के कारण होता है।
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अकीक भस्म एवं अकीक पिष्टी

अकीक भस्म (पिष्टी) एक खनिज आधारित आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका उपयोग सामान्य दुर्बलता, हृदय की कमजोरी, शरीर में अत्यधिक गर्मी, मानसिक रोगों, नेत्र रोगों और महिलाओं में गर्भाशय से होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव के उपचार में किया जाता है। अकीक बनाने के लिए मुख्य रूप से गोमेद रत्न को जड़ी बूटियों के रस में पीसकर, फिर तपाकर उसकी भस्म बनायी जाती है। यह मुख्य…
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अभ्रक भस्म

अभ्रक भस्म अभ्रक की जलाई हुई राख है जिसका उपयोग आयुर्वेद में श्वसन विकारों, यकृत और पेट की बीमारियों, मानसिक बीमारियों और मनोदैहिक विकारों के लिए किया जाता है। अभ्रक भस्म को निस्तापन की प्रक्रिया के द्वारा तैयार किया जाता है, जिसमें अभ्रक मुख्य घटक होता है और पौधों के रस, अर्क और काढ़ों का उपयोग किया जाता है। इस निस्तापन की प्रक्रिया को आयुर्वेद में…
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अविलतोलादि भस्म

अविलतोलादि भस्म गंजी या अविलतोलादि भस्म सहस्रयोगम में प्रस्तुत एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग कई अंतर्निहित कारणों से होने वाले जलोदर के उपचार में किया जाता है। अविलतोलादि भस्म में मूत्रवर्धक गुण होते हैं, इसलिए यह पेशाब को बढ़ाता है और शरीर में जमा द्रव को कम कर देता है। घटक अविलतोलादि भस्म के निर्माण में निम्नलिखित जड़ी-बूटियों को समान अनुपात…
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गोदंती भस्म के गुण, लाभ और औषधीय उपयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

गोदन्ती भस्म जिप्सम से बनाई गयी एक खनिज आधारित आयुर्वेदिक औषधि है। यह प्राकृतिक कैल्शियम और सल्फर सामग्री में समृद्ध है। आयुर्वेद (Ayurveda) के अनुसार, गोदन्ती भस्म तीव्र ज्वर (आयुर्वेद में इसे पित्तज ज्वर के रूप में भी जाना जाता है), सिरदर्द, जीर्ण ज्वर, मलेरिया, योनिशोथ, श्वेत प्रदर, गर्भाशय से अत्यधिक रक्तस्राव, सूखी खाँसी और रक्तस्राव के…
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शंखपुष्पी के स्वास्थ्य लाभ

शंखपुष्पी (Shankhpushpi) का वनस्पति नाम “कोनोवुल्लूस प्लूरिकालिस (Convolvulus Pluricaulis)” है। यह अपने चिकित्सीय गुणों के कारण आयुर्वेद में प्रयोग होने वाली एक बहुत महत्वपूर्ण जड़ी बूटी है। यह औषधि मानसिक शक्ति और स्मृति को बढ़ाने, एकाग्रता में सुधार करने और याद करने की क्षमता में वृद्धि करने में फायदेमंद है। चिकित्सकीय रूप से, शंखपुष्पी अनिद्रा…
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अडूसा (वासा)

अडूसा जिसे वासा भी कहा जाता है एक आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है। इस पौधे का प्रयोग खांसी, अस्थमा, साँस की तकलीफ, नाक बंद होना, रक्तस्राव संबंधी विकार, एलर्जी, श्वसन प्रणाली के संक्रमण, गर्भाशय से अत्यधिक रक्तस्राव, माहवारी  में अत्यधिक खून बहना, और नाक से खून बहना आदि समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है।
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ताम्र भस्म

प्रागैतिहासिक काल से ही, मनुष्य स्वास्थ्य और रोगों के उपचार के लिए दवाओं के विभिन्न स्रोतों का उपयोग कर रहा है। धातु और खनिजों का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा का एक प्रमुख भाग रहा है। ताम्र (तांबा) एक ऐसी ही धातु है जिसे विधिपूर्वक संसाधित और विषहरण करने पर यह कई रोगों में उपयोगी है। परन्तु अशुद्ध ताम्र भस्म बहुत ही हानिकारक है और इसे सख्ती से…
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त्रिवंग भस्म

त्रिवंग भस्म हर्बल और धातु सामग्री से बनी एक आयुर्वेदिक औषधि है। यह एक आयुर्वेदिक धातु युक्त निर्माण है जिसमें वंग (टिन), नाग (सीसा) और यशद (जस्ता) की बराबर मात्रा की भस्म होती है। त्रिवंग भस्म को नपुंसकता के लिए, स्वप्नदोष, मधुमेह, बार बार पेशाब आने पर, आवर्ती गर्भपात, लयूकोरिया, और बांझपन के लिए दिया जाता है। इसका मुख्य प्रभाव नसों, वृषण,…
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