आयुर्वेद में पंच कषाय कल्पना का वर्णन मिलता है। औषधि को सेवन योग्य बनाने के तरीके को कषाय कल्पना कहा जाता है। कषाय कल्पना भैषज्य विज्ञान का एक महत्वपूर्ण हिसा है। चरक संहिता में औषधि बनाने के मुख्य निम्नलिखित पांच तरीकों को पंच कषाय कल्पना का नाम दिया गया है।

  1. स्वरस (Juice)
  2. कल्क (Paste)
  3. क्वाथ (Decoction)
  4. हिम (Cold Infusion)
  5. फांट (Hot Infusion)

स्वरस (Juice)

ताजी, हरी और स्वच्छ जड़ी बूटियों अथवा वनस्पतियों से निकले गए रस को स्वरस कहते है। स्वरस निकालने के लिए चुनी गई जड़ी बूटियों साफ होनी चाहीहे, कीड़े और मिटी रहित होनी चाहीहे और तुरंत उखाड़े हुए वनस्पतियों से ही स्वरस निकालना चाहीहे। निकले गए स्वरस को छान कर प्रयोग में लेना चाहीहे। स्वरस अन्य कषाय कल्पनाओं से अधिक प्रभावशाली होता है।

स्वरस की मात्रा12 से 24 ग्राम
स्वरस लेने का उचित समय (कब लें?)ख़ाली पेट लें या खाना खाने के आधे घंटे पहिले लें
स्वरस दिन में कितनी बार लें?2 बार – सुबह और शाम
स्वरस का अनुपान (स्वरस किस के साथ लें?)स्वरस को ऐसे ही पी लें और ऊपर से गुनगुना  पानी ले सकते है
स्वरस के साथ उपचार की अवधि (स्वरस कितने समय तक लें)निश्चित नहीं है

कल्क (Paste)

ताजी, हरी और स्वच्छ गीली जड़ी बूटियों अथवा वनस्पतियों को पत्थर पर पीसकर या सूखे द्रव्यों को जल के साथ पीसकर पेस्ट बना लें। इसको आयुर्वेद में कल्क कहा जाता है। इसको प्रक्षेप या आवाप की भी संज्ञा दी जाती है। खासकर अगर घी, अम्ल यह तेल मिलकर यह बनाया जाये तो इस कल्क को प्रक्षेप की संज्ञा दी जाती है।

कल्क की मात्रा6 से 12 ग्राम
कल्क लेने का उचित समय (कब लें?)ख़ाली पेट लें या खाना खाने के आधे घंटे पहिले लें या खाना खाने के 2 घंटे बाद लें
कल्क दिन में कितनी बार लें?2 बार – सुबह और शाम
कल्क का अनुपान (कल्क किस के साथ लें?)गुनगुने पानी
कल्क के साथ उपचार की अवधि (कल्क कितने समय तक लें)निश्चित नहीं है

क्वाथ या काढ़ा (Decoction)

औषधि द्रव्यों को दरदरा कूटकर उनको क्वाथ पत्र के डालकर 16 गुना पानी में मिलकर धीमी आंच पर पकाया जाता है। जब मिश्रित जल का आठवां भाग शेष रह जाता है तो अग्नि देना बंद किया जाता है और छान लिया जाता है। इस प्रकार बनाए गई कल्पना को क्वाथ या काढ़ा कहा जाता है। क्वाथ जब गुनगुना हो तो इसका सेवन करना चाहीहे।

क्वाथ की मात्रा24 से 48 ग्राम
क्वाथ लेने का उचित समय (कब लें?)ख़ाली पेट लें या खाना खाने के 1 घंटे पहिले लें या खाना खाने के 3 घंटे बाद लें
क्वाथ दिन में कितनी बार लें?2 बार – सुबह और शाम
क्वाथ का अनुपान (क्वाथ किस के साथ लें?)क्वाथ को ऐसे ही पी लें और ऊपर से गुनगुना  पानी ले सकते है
क्वाथ के साथ उपचार की अवधि (क्वाथ कितने समय तक लें)निश्चित नहीं है

हिम (Cold Infusion)

मिट्टी के बर्तन में 1 भाग औषधि द्रव्यों को 6 भाग पानी में डालकर रात्रि भर पड़ा रहने दे और फिर इसको प्रातः काल मसलकर छान लें। इस प्रकार बनाए गई कल्पना को हिम कहा जाता है।

भैषज्य रत्नावली में 48 ग्राम औषधि द्रव्यों को 288 ग्राम पानी में भिगोकर रखने को कहा गया है।

हिम की मात्रा48 से 144 ग्राम
हिम लेने का उचित समय (कब लें?)प्रातः काल ख़ाली पेट लें और जरूरत पड़ने पर शाम को भी लिया जा सकता है
हिम दिन में कितनी बार लें?1 बार – सुबह या 2 बार सुबह और शाम (जरूरत अनुसार)
हिम का अनुपान (हिम किस के साथ लें?)हिम को ऐसे ही पी लें
हिम के साथ उपचार की अवधि (हिम कितने समय तक लें)निश्चित नहीं है

फांट (Hot Infusion)

मिट्टी के बर्तन में 1 भाग औषधि द्रव्यों को 4 भाग सुतप्त (गर्म) पानी में डालकर रात्रि भर पड़ा रहने दे और फिर इसको प्रातः काल मसलकर छान लें। इस प्रकार बनाए गई कल्पना को फांट कहा जाता है।

भैषज्य रत्नावली में 48 ग्राम औषधि द्रव्यों को 192 ग्राम पानी में भिगोकर रखने को कहा गया है।

फांट की मात्रा48 से 96 ग्राम
फांट लेने का उचित समय (कब लें?)प्रातः काल ख़ाली पेट लें और जरूरत पड़ने पर शाम को भी लिया जा सकता है
फांट दिन में कितनी बार लें?1 बार – सुबह या 2 बार सुबह और शाम (जरूरत अनुसार)
फांट का अनुपान (फांट किस के साथ लें?)फांट को ऐसे ही पी लें
फांट के साथ उपचार की अवधि (फांट कितने समय तक लें)निश्चित नहीं है
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