सौंफ के अद्भुत फायदे, प्रयोग, गुण-कर्म, सेवन विधि और दुष्प्रभाव के बारे में जानें

सौंफ एक बहुत सुगन्धित द्रव्य है और इसमें उड़नशील तेल पाया जाता है जो इसके औषधीय गुणों के लिए उत्तरदायी है। यह भोजन में एक विशिष्ट सुगंध लाता है जिस के कारण इसका अक्सर भारतीय खाना पकाने में इस्तेमाल किया जाता है। सौंफ़ बीज स्वाद में मधुर किंचित कटु और तिक्त है।

इसमें कई पोषक तत्व, खनिज और विटामिन है जो स्वास्थ्य लाभदायक है। यह अपचन को दूर करती है और इसका प्रयोग दस्त, पेट का दर्द और सांस की बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। यह आँखों की समस्याओं महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी विकार में फायदेमंद है।

लोग आमतौर पर, भारत में भोजन के बाद सौंफ़ खाते है। यह भोजन को पचाने में मदद करता है और पेट में गैस के गठन को रोकता है।  यह खट्टापन, अम्लपित्त, जलन आदि रोगों के इलाज के लिए उत्तम औषधि है। यह एक सुगन्धित द्रव्य होने के कारण यह मुख की दुर्गन्ध दूर करता है। यह दांत के दर्द और मसूढ़े की बीमारी से राहत देता है और इन रोगो पर प्रतिबंध लगाता है। सौंफ़ के बीजों में नाइट्रेट होते हैं जो हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते है। इसलिय यह दिल के रोगों को होने से रोकता है और हृदय को स्वस्थ रखता है। सौंफ में मौजूद तत्व पाचन क्रिया को ठीक रखने में सहायक होने है और श्वसन संबंधी समस्याएँ को दूर करने में उपयोगी सिद्ध हुए है।

आयुर्वेदिक गुण धर्म एवं दोष कर्म

रस (Taste) मधुर, कटु, तिक्त
गुण (Property) लघु, स्निग्ध
वीर्य (Potency) शीत (ठंडा)
विपाक (Metabolic Property) मधुर
दोष कर्म (Dosha Action) त्रिदोष शामक विशेषत: वात-पित शामक

औषधीय कर्म

  • क्षुधावर्धक – भूख बढ़ाने वाला
  • अम्लत्वनाशक (अम्लपित्तहर)
  • उदर शूलहर
  • तृषणा निग्रहण – प्यास को कम करता है
  • छदिनिग्रहण – वमनरोधी
  • दीपन – जठराग्नि को प्रदिप्त करता है
  • पाचन – पाचन शक्ति बढाने वाली
  • अनुलोमन – उदर से मल और गैस को बाहर निकालने वाला
  • मेध्य – बुद्धिवर्धक – बुद्धि को बढ़ाने वाला
  • चक्षुष्य – आंखों के लिए फायदेमंद
  • दृष्टि वर्धक – नजर बढ़ाने वाला
  • ह्रदय – दिल को ताकत देने वाला
  • रक्तप्रसादक – रक्त परिसंचरण क्रिया को बढ़ाने वाला
  • कफ नि:सारक – बलगम की चिपचिपाहट कम कर और कफ स्राव को तोड़कर कफ को बाहर निकालने वाला
  • योनिशूलहर
  • स्तन्यजनन
  • दाह प्रशमन – जलन कम करने वाला
  • ज्वरहर
  • बलवर्धक
  • आक्षेपनाशक
  • रोगाणुरोधी
  • विषाणु-विरोधी
  • जीवाणुरोधी
  • कामोद्दीपक
  • अर्बुदरोधी

सौंफ़ बीज पेट की मांसपेशियों को आराम देता है और ऐंठन कम कर देता है। आंत्र गैस को निकालता है और दर्द से राहत देता है।

चिकित्सीय संकेत

सौंफ़ के बीजों का प्रयोग निम्नलिखित रोगों और लक्षणों किया जाता है:

  • पेट का दर्द और पेट में ऐंठन
  • शिशु के पेट में दर्द
  • अधिक प्यास लगना
  • गैस
  • पेट फूलना
  • भूख में कमी
  • खट्टी डकार
  • मतली और उल्टी
  • अरुचि
  • मस्तिष्क, नसों और इंद्रियों की कमजोरी
  • दृष्टिमान्द्य
  • दिल की कमजोरी
  • रक्त विकार
  • खांसी
  • सांस संबंधी रोग
  • गले में खराश
  • गले में दर्द
  • मुख दुर्गन्ध
  • मसूड़े की सूजन
  • पेशाब में जलन
  • पेशाब का कम आना या रुक जाना
  • कष्टार्तव – मासिक धर्म के दौरान दर्द
  • योनिशूल
  • माँ का दूध कम आना
  • स्तन के दूध की खराब गंध
  • अल्पशुक्राणुता
सौंफ़ बीज
सौंफ़ बीज

सौंफ़ के लाभ एवं प्रयोग

सौंफ़ के बीज मुख्य रूप से पाचन तंत्र संबंधित समस्याओं के लिए उपयोग किया जाता है। यह श्वसन संबंधित रोगों में मदद करता है। यह पेट के ऐंठन और पेट दर्द से छुटकारा दिलाता है। इसके लाभकारी प्रभाव पेट, आंत, लीवर, मस्तिष्क, हृदय, गुर्दे और गर्भाशय पर दिखाई देते हैं।

सौंफ़ (foeniculum vulgare) गैस बनने से रोकने और वजन घटाने, अपच, कैंसर, और उम्र बढ़ने में मदद करने के लिए सहायक सिद्ध हुआ है।  यह शारीरिक बल बढाता है और व्यक्ति को दीर्घायु प्रदान करता है।

जठरशोथ (पेट की सूजन)

सौंफ़ पेट की सूजन के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता हैं। सौंफ़ बीज चूर्ण आमतौर पर जठरशोथ लक्षणों के उपचार के लिए किया जाता है। यह गैस्ट्रिक एसिड के स्राव विनियमित करता है और श्लैष्मिक कला के शोथ को कम करता है।

आयुर्वेद के अनुसार, वास्तव में यह पित्त  के तीक्षण गुण को कम करता है आमाशय कला का शोथ कम होता है और जठरशोथ से और पेट दर्द से राहत मिलती है। इसलिए इसका काम आमाशय कला पर होता है और भूख को कम करने की बजाय यह भूख को बढानें में सहायक होता है। यह पेट की सूजन, अपच, जलन, भूख में कमी आदि रोगों में उपचार में उत्तम औषधि है।

जठरशोथ में अछे परिणाम के लिए, सौंफ का प्रयोग आमला चूर्ण, मुलेठी चूर्ण और धनिया बीज चूर्ण के साथ किया जा सकता है। इन सभी जड़ी बूटियों को बराबर अनुपात में मिलाया जाना चाहिए। खुराक भोजन के बीच में दिन में दो बार 1 चम्मच है।

अपचन, अमलपित्त, खट्टी डकार, गैस

अपचन, अल्सर, अमलपित्त, खट्टी डकार, गैस और अन्य रोगों के उपचार के लिए सौंफ का प्रयोग उत्तम माना जाता है। यह पेट में तेजाब के स्राव विनियमित करता है, उसकी तीक्ष्णता कम करता है, आमाशय शोथ को दूर करता है, और आमाशय दर्द को दूर करता है

मतली और उल्टी

सौंफ के वमनरोधी (छदिनिग्रहण) होने के कारण मतली और उल्टी के इलाज में मदद करता है। यह गैस्ट्रिक स्राव को विनियमित कर अम्लीय स्वाद और मुंह के खट्टा स्वाद को कम करने में मदद करता है।

अत्यधिक प्यास

इलायची बीज के सामान सौंफ भी तृषणा निग्रहण (प्यास को कम करता है) गुण है जिसके कारण यह अत्यधिक प्यास को कम करने के लिए फायदेमंद होते हैं। अत्यधिक प्यास को कम करने के लिए, इसके बीज चूर्ण को शक्कर या मिस्री में मिलाकर प्रयोग में लिया जाता है। प्यास कम करने के लिए सौंफ अर्क, सौंफ के पानी या सौंफ की चाय बनाकर भी प्रयोग किया जा सकता है।

वजन घटना

सौंफ़ चयापचय क्रिया बढ़ाने में सहायक हैं। सौंफ़ वसा चयापचय को बढ़ा देता है और अतिरिक्त चर्बी संचय से बचाता है। यह वजन कम करने में मदद करता है।

हालांकि, कुछ लोग सौंफ़ को भूख मारक  या भूख कम करने वाला बताते है जो कि असल में गलत है। आयुर्वेद के अनुसार, सौंफ़ भूख को कम नही करता या दबाता नहीं है बल्कि यह भूख को सामान्य कर पाचन क्रिया में सुधार लाता है। यदि आप को भूख कम लगती है तो इसके प्रयोग से आपकी भूख में वृद्धि होगी।

सौंफ़ चयापचय क्रिया को बढाता है और वसा की उपयोगिता को सुधारने का काम करता है जिससे यह वजन कम करने में सहायक सिद्ध होता है। मोटापे में इसका प्रयोग करने से संचित वसा कम होता है और उसकी उपयोगता सुधरने लगती है। आयुर्वेद अनुसार यह धातुओं की अग्नि को भी बढाता है जिससे सभी धातुए सामान्य रहती है और संचित वसा को जलाने के लिए प्रेरित करता है।

मात्रा एवं सेवन विधि

सौंफ़ की सामान्य औषधीय मात्रा  व खुराक इस प्रकार है:

सौंफ़ या सौंफ़ चूर्ण की औषधीय मात्रा

बच्चे 50 से 100 मिलीग्राम प्रति किलो शरीर के वजन मुताबिक
वयस्क 3 से 6 ग्राम (इष्टतम खुराक: 3 ग्राम)
गर्भावस्था 1 से 2 ग्राम
वृद्धावस्था (बुढ़ापा) 2 से 3 ग्राम
बच्चे 1 गोली
1 से 2 गोली

सेवन विधि

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) खाना खाने के बाद लें
दिन में कितनी बार लें? 2 बार – सुबह और शाम
अनुपान (किस के साथ लें?) चबाकर खाए, या गुनगुने पानी के साथ ले
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

सौंफ़ अर्क या सौंफ़ के पानी की औषधीय मात्रा

सौंफ के अर्क (Saunf Ark)  की सामान्य औषधीय मात्रा  व खुराक इस प्रकार है:

शिशुओं (उम्र: ऊपर 12 महीने के लिए) 1 से 5 मिलीलीटर
बच्चे 5 करने के लिए 20 मिलीलीटर
वयस्क 20 करने के लिए 60 मिली
गर्भावस्था 10 से 20 मिलीलीटर
वृद्धावस्था (बुढ़ापा) 10 से 20 मिलीलीटर
अधिकतम संभावित खुराक प्रति दिन 180 मिलीलीटर (विभाजित खुराकों में)

सेवन विधि

दवा लेने का उचित समय (कब लें?)  ख़ाली पेट लें या खाना खाने के 1 घंटे पहिले लें या खाना खाने के 3 घंटे बाद लें
दिन में कितनी बार लें? 2 बार – सुबह और शाम (जरुरत अनुसार  इसका प्रयोग 3 बार भी किया जा सकता है।)
अनुपान (किस के साथ लें?) गुनगुने पानी में मिलकर
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

आप के स्वास्थ्य अनुकूल सौंफ के अर्क  की उचित मात्रा के लिए आप अपने चिकित्सक की सलाह लें।

सौंफ़ तेल की औषधीय मात्रा

सौंफ़ बीज तेल खुराक:
शिशुओं (उम्र: ऊपर 12 महीने के लिए) सिफारिश नहीं की गई
बच्चे (उम्र: 5 साल तक) सिफारिश नहीं की गई
बच्चे (उम्र: 5 साल से ऊपर) 1 बूंद प्रति 15 किलोग्राम शरीर के वजन
वयस्क 4 करने के लिए 10 बूँदें
गर्भावस्था सिफारिश नहीं की गई
वृद्धावस्था (बुढ़ापा) 3 से 5 बूँदें
अधिकतम संभावित खुराक प्रति दिन 20 बूँदें (विभाजित खुराकों में)

सेवन विधि

दवा लेने का उचित समय (कब लें?)  खाना खाने के बाद लें
दिन में कितनी बार लें? 1 बार या 2 बार ले – सुबह, या सुबह  और शाम
अनुपान (किस के साथ लें?) गुनगुने पानी में मिलकर
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

आप के स्वास्थ्य अनुकूल सौंफ़ तेल की उचित मात्रा के लिए आप अपने चिकित्सक की सलाह लें।

सौंफ के दुष्प्रभाव

यदि सौंफ़ का प्रयोग व सेवन निर्धारित मात्रा (खुराक) में किया जाए तो सौंफ़ के कोई दुष्परिणाम नहीं मिलते।

अधिक मात्रा में सौंफ़ सूरज की रोशनी के लिए त्वचा की संवेदनशीलता को बढ़ा सकती है और त्वचा संवेदनशीलता में वृद्धि होने के कारण  सूर्यदाह होने की संभावना बढ़ सकती है।

गर्भावस्था

आम तौर पर, सौंफ़ बीज और इसके पारंपरिक योग मतली, भूख, अपच, सिर का चक्कर, और पेट दर्द आदि के इलाज के लिए गर्भावस्था के दौरान प्रयोग किये जाते है। इन सभी स्थितियों में, सौंफ़ प्रभावी और उपयोगी सिद्ध होती हैं।

सौंफ़ कम मात्रा में (प्रति दिन से 6 ग्राम से कम) गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित होने की संभावना है। यह अधिक खुराक में प्रयोग में नहीं लिया जाना चाहिए।

सौंफ़ वास्तव में ऐंठन और माहवारी के दर्द को कम करके मासिक धर्म में सुधार करती है। अधिक खुराक में, सौंफ़ मासिक धर्म का स्त्राव करने वाली हैं। हालांकि, सौंफ़ का प्रभाव मासिक धर्म उत्प्रेरण बहुत नगण्य हैं। फिर भी गर्भवती महिलाओं को इसका प्रयोग अत्याधिक मात्रा में नहीं कारण ही हितकर रहेगा। गर्भवती महिलाओं को 6 ग्राम प्रतिदिन से ज्यादा सौंफ़ का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

सौंफ़ तेल, सौंफ़ सत, या सौंफ़ के किसी भी अप्राकृतिक रूप यौगिक का प्रयोग गर्भावस्था में नहीं करना ही हितकर है।

सौंफ़ पानी, सौंफ़ चाय, सौंफ़ अर्क, या सौंफ़ के पारंपरिक तरीकों के साथ तैयार किये गए काढ़े भी संभवतः सुरक्षित है जब वह 6 ग्राम या कम सौंफ़ बीजों से तैयार किये गए हो। गर्भवती महिलाओं सौंफ़ का उपयोग इसके प्राकृतिक रूप में में ही करें।

स्तनपान

सौंफ़ में स्तन्यजनन और स्तन्य वर्धक गुण है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं दूध वृद्धि और दूध के दोषों को नष्ट करने के लिए इसका प्रयोग करती है। यह आमतौर पर पेट और पाचन समस्याओं के इलाज के लिए शिशुओं में प्रयोग किया जाता है।

सौंफ़ स्तनपान कराने वाली माताओं के द्वारा उपभोग करने के लिए सुरक्षित होने की संभावना है। स्तनपान दौरान इसका प्रयोग करने से  माताओं और बच्चों में कोई दुष्परिणाम होने की कोई सूचना नहीं मिली हैं।

सौंफ़ एलर्जी

जो लोग गाजर, अजवाइन, आड़ू के प्रति संवेदनशील हैं, उनको सौंफ़ बीज से एलर्जी हो सकती है। सौंफ़ एलर्जी के सामान्य लक्षण में शामिल हैं:

  • मुंह में खुजली
  • मुंह में झुनझुनी
  • होठों की सूजन,
  • जीभ और गले की सूजन
  • त्वचा पर खुजली
  • त्वचा के चकत्ते

संदर्भ

  1. Fennel Seeds
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