शंखपुष्पी (Shankhpushpi) का वनस्पति नाम “कोनोवुल्लूस प्लूरिकालिस (Convolvulus Pluricaulis)” है। यह अपने चिकित्सीय गुणों के कारण आयुर्वेद में प्रयोग होने वाली एक बहुत महत्वपूर्ण जड़ी बूटी है। यह औषधि मानसिक शक्ति और स्मृति को बढ़ाने, एकाग्रता में सुधार करने और याद करने की क्षमता में वृद्धि करने में फायदेमंद है। चिकित्सकीय रूप से, शंखपुष्पी अनिद्रा (नींद ना आने), तनाव संबंधी विकारों, मानसिक दुर्बलता या संवेदनशीलता, चक्कर आने आदि में लाभदायक है। अन्य जड़ी-बूटियों के साथ इसे स्ज़ोफ्रेनिया, अवसाद, मिर्गी और आक्रामक व्यवहार वाले  विकारों में भी उपयोग किया जाता है।

शंखपुष्पी के लाभ और औषधीय उपयोग

शंखपुष्पी (Shankhpushpi) को मनोविकार में प्रभावी पाया गया है जब रोगी में निम्न में से कोई लक्षण हों:

  1. आक्रामक व्यवहार
  2. उदास होना
  3. चिड़चिड़ापन
  4. बेचैनी
  5. मानसिक तनाव
  6. व्याकुलता
  7. मानसिक थकान महसूस करना
  8. गुस्सा
  9. अनिश्चितता
  10. मनोदशा की अशांति
  11. चक्कर आना
  12. मतिभ्रम
  13. सिर में जलन
  14. गर्मी लगना
  15. अत्यधिक पसीना आना या तनाव के कारण अत्यधिक पसीना आना
  16. चक्कर

आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में पित्त दोष अधिक हो जाने पर शंखपुष्पी एक प्रभावशाली औषधि है। हालांकि, यह तीनों दोषों (वात –  Vata, कफKapha और पित्तPitta) के बढ़ने पर भी प्रभावी है, लेकिन यह मानसिक रोगों में पित्त प्रोकोप अधिक होने पर प्रभावी रूप से काम करती है।

मानसिक थकान

हालांकि, आधुनिक विज्ञान के अनुसार मानसिक थकान एक गैर विशिष्ट लक्षण है, लेकिन स्पष्ट रूप से अधिक संज्ञानात्मक प्रदर्शन में लोगों को थकान लगती है। यह स्पष्ट हो जाता है जब व्यक्ति सुस्ती में और ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता अनुभव करता है। हालांकि, मानसिक थकान के कई कारण होते हैं, लेकिन सबसे आम कारण अधिक काम, कंप्यूटर पर काम, अध्ययन, सीखना या याद रखना और मानसिक तनाव है।

यदि सभी कारण दिमाग या मस्तिष्क से सम्बंधित होते हैं, तो शंखपुष्पी मानसिक थकान के सभी मूल कारणों को दूर करने पर अच्छी तरह से काम करता है। यह मानसिक थकान को कम करने और काम के लिए अधिक उत्साह प्रदान करने में अत्यधिक सहायक है।

मानसिक थकान कम करने के लिए एक चम्मच शंखपुष्पी पाउडर को पानी के साथ दिन में दो बार ले सकते हैं। लाभकारी परिणामों के लिए, निम्न संयोजन बहुत प्रभावी है।

शंखपुष्पी चूर्ण1 ग्राम
अश्वगंधा1 ग्राम
बादाम2 ग्राम
सफेद मिर्च125 मिलीग्राम

अश्वगंधा की उपस्थिति के कारण यह उपाय शारीरिक शक्ति में सुधार के लिए बहुत प्रभावी है।

स्मरण शक्ति की क्षति और उन्माद

शंखपुष्पी संज्ञानात्मक कार्यों में सुधार करता है और मेमोरी बूस्टर के रूप में कार्य करता है। यह प्रतिधारण अवधि और याद रखने की क्षमता को सुधारता है।

यद्यपि, उन्माद के कई कारण होते हैं, लेकिन सभी कारण मस्तिष्क कोशिकाओं की क्षति की ओर इशारा करते हैं। शंखपुष्पी मस्तिष्क कोशिकाओं की बढ़ती हुई क्षति को रोककर बढ़ते हुए उन्माद में सहायता करता है। यह मनोभ्रंश और स्मृति हानि के लक्षणों को सुधारने के लिए शेष तंत्रिका कोशिकाओं के कार्यों में सुधार भी करता है।

सिरदर्द

(तनाव, मानसिक कार्यभार या अध्ययन के कारण)

कई छात्र अध्ययन करते समय सिरदर्द की सूचना देते हैं। यदि उनकी दृष्टि सही है, तो शंखपुष्पी उनके लिए जड़ी बूटी का एक अच्छा विकल्प है। आम तौर पर, इस प्रकार का सिरदर्द मानसिक कमजोरी, मानसिक कार्यभार, लंबी अवधि तक अध्ययन करने या मानसिक तनाव के कारण होता है। शंखपुष्पी मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करता है और तंत्रिका क्रियाओं में सुधार करता है। इस प्रकार, यह विचलित नसों को शांत करने और सिरदर्द का उपचार करने में मदद करता है। इस स्थिति में शंखपुष्पी सिरप का उपयोग करना अधिक लाभकारी माना जाता है। यदि अन्य कारण भी जुड़े हुए हैं तो शंखपुष्पी पाउडर को इत्रिफल उस्तुखुददूस के साथ  ले सकते हैं।

ध्यान अभाव सक्रियता विकार (एडीएचडी)

शंखपुष्पी में मानसिक चिड़चिड़ेपन और आवेग को कम करने के गुण हैं। एडीएचडी के लिए प्रभावी उपाय इस प्रकार है:

शंखपुष्पी चूर्ण250 मिलीग्राम
मंडूकपर्णी500 मिलीग्राम
मुक्ता पिष्टी (मोती भस्म)125 मिलीग्राम

 

अभ्रक भस्म30 मिलीग्राम

यदि एडीएचडी से पीड़ित बालक अधिक चिड़चिड़ापन, आक्रामकता, व्याकुलता और गर्मी का अनुभव कर रहा हो, अत्यधिक पसीना, बेचैनी और मिजाज़ में बदलाव, आसानी से गुस्सा आना जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हों तो निम्नलिखित उपचार उपयोगी होता है।

मुक्ता पिष्टी (Mukta Pishti)250 मिलीग्राम *
प्रवाल पिष्टी (Praval Pishti)250 मिलीग्राम *
गिलोय सत्त (Giloy Sat)250 मिलीग्राम *
शंखपुष्पी (Shankhpushpi)250 मिलीग्राम *
यष्टिमधु (MulethiYashtimadhu) – Licorice – Glycyrrhiza Glabra500 मिलीग्राम *
दिन में दो बार पानी, दूध या शहद के साथ
इस मिश्रण के साथ, दिन में दो बार 2 मिलीलीटर सारस्वतारिष्ट (स्वर्णयुक्त) का उपयोग करना चाहिए।
इस उपचार से, अनेक रोगियों को 3 महीनों के भीतर सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।

स्वलीनता (आत्मकेंद्रित)

शंखपुष्पी संयोजन स्वलीन और आत्मकेंद्रित बच्चों की मदद कर सकता है।

घटकमात्रा
शंखपुष्पी चूर्ण250 मिलीग्राम
ब्राह्मी – Brahmi (Bacopa Monnieri)100 मिलीग्राम
अश्वगंधा – Ashwagandha100 मिलीग्राम
मण्डूकपर्णी – Mandukaparni (Centella Asiatica)100 मिलीग्राम
जटामांसी – Jatamansi50 मिलीग्राम
मुक्ता पिष्टी – Mukta Pishti50 मिलीग्राम
अभ्रक भस्म – Abhrak Bhasma25 मिलीग्राम

इस संयोजन को दिए गए अनुपात में मिलाना चाहिए और दिन में दो बार पानी के साथ देना चाहिए।

मानसिक अतिसंवेदनशीलता

(या अत्यधिक संवेदनशील व्यक्ति या एचएसपी)

जो व्यक्ति तेज ध्वनि, उज्ज्वल प्रकाश, तीव्र गंध को सहन नहीं कर सकता, उसे अति संवेदनशील व्यक्ति कहा जाता है। इस समस्या का मूल कारण तंत्रिकाओं की अतिसंवेदनशीलता है।

हालांकि, शंखपुष्पी अकेले पूरी तरह से प्रभावी नहीं है, लेकिन शंखपुष्पी पाउडर के साथ निम्नलिखित आयुर्वेदिक संयोजन ऐसे लक्षणों का उपचार करने में प्रभावी है।

शंखपुष्पी250 मिलीग्राम
मुक्ता पिष्टी125 मिलीग्राम
अभ्रक भस्म125 मिलीग्राम
प्रवाल पिष्टी125 मिलीग्राम
रौप्य (रजत) भस्म – Chandi Bhasma50 मिलीग्राम

तनाव विकार और अवसाद

(आक्रामक लक्षणों या हिंसा के साथ)

मानसिक तनाव या अवसाद का जो भी कारण हो, लेकिन इसका परिणाम तीन प्रमुख बातों पर होता है जो मस्तिष्क कार्यों को प्रभावित कर सकता है।

  1. मस्तिष्क में भौतिक परिवर्तन
  2. न्यूरोट्रांसमीटर असंतुलन
  3. हार्मोन में परिवर्तन

हालांकि, मस्तिष्क में भौतिक परिवर्तन और हार्मोन परिवर्तनों पर शंखपुष्पी की क्रिया का असर अज्ञात है। हालांकि, यह मस्तिष्क रासायनिक असंतुलन (न्यूरोट्रांसमीटर असंतुलन) के मामले में प्रभावी है। यह डोपामाइन के स्राव को बढ़ाता है और व्यक्ति को अच्छा और सचेत महसूस कराता है।

भूख ना लगना (एनोरेक्सिया नर्वोसा)

जब एनोरेक्सिया नर्वोसा या भूख ना लगने पर भावनात्मक विशेषताऐं प्रभाव डालती हैं तो शंखपुष्पी अधिक प्रभावी होता है। शंखपुष्पी में भूख लगने और पाचन उत्तेजक के लक्षण भी होते हैं, जिससे भूख में सुधार करने में मदद मिलती है।

हेमेटेमिसिस (उल्टी में रक्त)

कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि शंखपुष्पी हेमेटेमिसिस में प्रभावी है। ईमानदारी से, हमने इस उद्देश्य के लिए कभी इसका उपयोग नहीं किया है।

आवर्ती गर्भपात (अभ्यस्त गर्भपात)

आयुर्वेद के अनुसार, गर्भाशय या उसकी संरचनाओं की कमजोरी के कारण बार बार गर्भपात होते हैं। इस उद्देश्य के लिए, गर्भाशय को मजबूत करने और गर्भपात को रोकने के लिए शंखपुष्पी को अश्वगंधा पाउडर के साथ दिया जाता है।

शंखपुष्पी1.5 ग्राम
अश्वगंधा1.5 ग्राम

अभ्यस्त गर्भपात से पीड़ित महिलाओं को तालिका में उल्लिखित उपरोक्त उपायों के 3 महीने का कोर्स पूरा करने के बाद गर्भधारण का प्रयास करना चाहिए।

खुराक

शंखपुष्पी की खुराक उसके हर्बल रूप के उपयोग पर निर्भर करती है। बाजार में यह पाउडर और अर्क के रूप में उपलब्ध है। ताजा जड़ीबूटी का उपयोग हर्बल पेस्ट बनाने में किया जा सकता है।

शंखपुष्पी चूर्ण3 से 5 ग्राम
शंखपुष्पी सत्व250 से 500 मिलीग्राम
शंखपुष्पी कल्क5 से 20 ग्राम

शंखपुष्पी की मात्रा व्यक्ति की आयु और शरीर के वजन के अनुसार भी अलग-अलग हो सकती है। आम तौर पर, ऊपर दी गयी खुराक वयस्कों के लिए सटीक है।

सावधानी और दुष्प्रभाव

शंखपुष्पी के उपयोग से कोई भी दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है। ताजा हर्बल पेस्ट लेने से  कुछ लोगों को परेशानी महसूस हो सकती है। यह हर्बल स्वाद के कारण हो सकती है। अन्यथा, कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखा गया है। यह ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित और सहन करने योग्य है।

गर्भावस्था और स्तनपान

शंखपुष्पी में जीर्णोद्धार करने वाले और गर्भाशय को ताकत प्रदान करने वाले गुण भी हैं। इसलिए, यह संभवतः गर्भावस्था में सुरक्षित और लाभकारी है। इससे गर्भपात को रोकने में मदद मिलती है। शंखपुष्पी की संभावित क्रिया गर्भाशय की मांसपेशियों को शक्ति प्रदान करना और रक्तस्राव को रोकना है।

यह स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए संभवतः सुरक्षित है। स्तनपान करने वाले बच्चों के साथ-साथ स्तनपान कराने वाली माताओं में भी कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पाया जाता है।

संदर्भ

  1. Shankhpushpi (Convolvulus Pluricaulis) – AYURTIMES.COM
आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श करें
Click Here to Consult Dr. Jagdev Singh