आयुर्वेद में शिलाजीत का प्रयोग इस का शोधन करने के बाद ही किया जाता है। जो शिलाजीत हिमालय आदि पहाड़ों से प्राप्त होता है वह कई तरह के पत्थर, मिट्टी आदि अशुद्धियों से युक्त होता है। इसलिए इसे मनुष्य के खाने योग्य नहीं माना जाता।

इस को खाने योग्य बनाने के लिए आयुर्वेद में शोधन प्रक्रिया का उल्लेख है।  यह शोधन प्रक्रिया इन सब अशुद्धियों को दूर कर शिलाजीत को औषदीय प्रयोग के लिए योग्य बनती है। इसके इलाबा यह प्रक्रिया बैक्टीरिया आदि सूक्ष्मजीवों को भी मारने और शिलाजीत को कीटाणुरहित बनाने भी कारगर सिद्ध हुई है। इसलिए शुद्ध शिलाजीत को ही उपयोग में लेना चाहिए।

शिलाजीत का शोधन करने के लिए कई तरह के तरीकों का प्रयोग किया जाता है। त्रिफला क्वाथ से शिलाजीत का शोधन कैसे करते है इसकी जानकारी प्राप्त करेगें। इसी तरीके का अधिकतम लोग शिलाजीत का शोधन करने के लिए प्रयोग में लेते है।

शिलाजीत शोधन के लिए त्रिफला क्वाथ बनाना

शिलाजीत का शोधन करने के पूर्व त्रिफला क्वाथ बनाना होता है।

  1. त्रिफला क्वाथ बनाने के लिए किसी लौह के पात्र में १ किलोग्राम त्रिफला चूर्ण और ६४ लीटर पानी लें।
  2. इसको पहले उबाल लें और फिर थीमी थीमी आंच पर पकने दे।
  3. जब द्रव एक चौथाई रह जाए अर्थात लगभग 16 लीटर रह जावे, तो छानकर अलग लौह के पात्र में रख लें।

शिलाजीत का शोधन

  1. अब शिलाजीत के 1500 ग्राम छोटे-छोटे टुकड़े कर लौह या मिट्टी के पात्र में रखकर उसमे इस क्वाथ को डालें और इसको २४ घंटो के लिए भीगने दें।
  2. २४ घंटो बाद इसको पुनः गर्म करें और जैसे ही शिलाजीत त्रिफला क्वाथ में घुल जाए, तो ऊपर ऊपर से निथार कर द्रव को अलग पात्र में डाल लें।
  3. अब इस निथारे हुए शिलाजीत युक्त त्रिफला क्वाथ अलग बरतन में डालकर थीमी थीमी आंच पर गर्म करें और पकने दें।
  4. जब यह गाढ़ा हो जावे तो इसे उतारकर तीव्र धूप में रख कर सुखा लें।

इस तरह प्राप्त हुए शिलाजीत को आयुर्वेद में शोधित शिलाजीत या शुद्ध शिलाजीत कहा जाता है

शिलाजीत शोधन के अन्य तरीके

त्रिफला क्वाथ के अतिरिक्त गोमूत्र तथा दशमूल क्वाथ का भी प्रयोग कर शिलाजीत को शुद्ध किया जाता है।

भैषज्य रत्नावली में लिखा है – शिलाजीत को गाय को दूध, त्रिफले का काढ़ा, भांगरे का रस में लोहे के पात्र में रखकर एक दिन तक पीस कर धूप में सुखा लेने से शिलाजीत शुद्ध हो जाता है।

मगर यह एक विशेष शोधन विधि है इससे मिटटी पत्थर आदि बाहर नहीं निकलते। इसप्रकार का विशेष शोधन तभी किया जा सकता है जब शिलाजीत को पहले से ही अत्युष्ण जल में डाल कर और भली-भांति घोलकर, छानकर मिटटी पत्थर आदि अशुद्धियों पहले से ही दूर कर दी गई हो।

नहीं तो जो शोधन प्रक्रिया त्रिफला क्वाथ वाली हम ने पहले बताई है वह ही उपयुक्त है।

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