शुद्ध शिलाजीत (शिलाजतु) – एक शक्तिवर्धक और ऊर्जावर्धक आयुर्वेदिक रसायन

शुद्ध शिलाजीत (शिलाजतु) एक शक्तिवर्धक और ऊर्जावर्धक आयुर्वेदिक रसायन औषधि है जिस में कई तरह के पोषक तत्त्व पाए जाते है। यह पोषक तत्त्व शारीर के विकास के लिए और व्यक्ति को स्वस्थ रखने ले लिए लाभदायक है। यह आयुर्वेदिक मत अनुसार कफ दोष (Kapha Dosha) और वात दोष (Vata Dosha) का शमन करता है। यह पित्त दोष (Pitta Dosha) का संशोधन करने के लिए उपयुक्त दवा है।

शुद्ध शिलाजीत आमवात (संधिशोथ गठिया), अस्थिसंधिशोथ या संधिवात (osteoarthritis), वातव्याधि (diseases of nervous and musculoskeletal system), वातरक्त (gout), यूरिक एसिड का बढ़ना, मानसिक रोग, मूत्र विकार, गुर्दे की बीमारियां, पुरुषों की समस्याएं और बहुत से रोगों की चिकित्सा करने में लाभदायक है और उत्तम दवा है।

विषय-सूची

शिलाजीत का स्रोत

शिलाजीत चट्टानों में पाई जाती है। यह काले भूरे रंग का एक गाढ़ा पदार्थ है जिस में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते है। यह हिमालय के उन पर्बतों पर पाई जाती है जिन की ऊंचाई १००० – ५००० मीटर के बीच होती है। इसकी उत्पति चट्टानों में लंबे समय से दबे हुए पौधों आदि और चट्टानों से निकले खनिज पदार्थ आदि से हुई है।

यह पदार्थ भारत और नेपाल के बीच के हिमालय पर्वतो पर पाया जाता है। जब गर्मियों के मौसम में अत्यधिक गर्मी पड़ती हैं तो इन चट्टानें में से एक गाढ़ा पदार्थ का स्राव बाहर निकलता है जिसे शिलाजीत के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस में फुल्विक एसिड नामक खनिज मुख्य रूप से पाया जाता है।

देखने में शिलाजीत काला या भूरे किसी भी रंग का और गाढ़ा होता हैं मगर सूखने के बाद यह एकदम चमकदार हो जाता है। पानी में शिलाजीत घुल जाता हैं और शिलाजीत के सूखने पर इससे गोमूत्र जैसी दुर्गन्ध आती है।

रासायनिक संरचना

शिलाजीत का मुख्य घटक हैं फुल्विक एसिड, जो इसे वेदनास्थापन, शोथहर, जीवाणु नाशक, नाड़ी बल्य आदि गुण प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त इस में हमिंस, ह्यूमिक एसिड्स, सेलेनियम आदि खनिज पदार्थ भी पाए जाते है।

आयुर्वेदिक गुण धर्म एवं दोष कर्म

रस (Taste) कटु, तिक्त, कषाय
गुण (Property) लघु, रुक्ष
वीर्य (Potency) उष्ण (गरम)
विपाक (Metabolic Property) कटु
दोष कर्म (Dosha Action) वात शामक, कफ शामक और पित्त संशोधक, कफ निसारक

औषधीय कर्म (Medicinal Actions)

मुख्य रूप से शिलाजीत में पुष्टिकारक, बल्य, वृष्य और प्रमेहघन गुण है।

  • रसायन – कायाकल्प करने वाला
  • पुष्टिकारक – पोषक
  • बल्य – ताकत बढानें वाला
  • वृष्य – पौरष शक्ति वर्धक
  • नाड़ी बल्य – नसों के लिए टॉनिक
  • मेध्य – स्मृति एवं बुद्धि वर्धक
  • वेदनास्थापन – दर्द निवारक (पीड़ाहर)
  • शोथहर – सूजन काम करने वाला
  • जीवाणु नाशक
  • प्रमेहघन – मूत्र रोग में हितकारी
  • अश्मरी भेदक – गुर्दे की पथरी की तोड़ने वाला
  • कुष्ठगन – त्वचा रोगों में हितकारी
  • लेखन – वजन कम करने वाला
  • योगवाही – दूसरी औषधियों के गुण बढ़ाने वाला
  • हृदयबल्य – दिल के लिए टॉनिक
  • रक्त शोधक
  • आरोग्यकर – स्वास्थ्यवर्धक
  • ज्वरघ्न

चिकित्सकीय संकेत (Indications)

शुद्ध शिलाजीत (शिलाजतु) का प्रयोग मस्तिष्क, नसों, हृदय, गुर्दे, मूत्राशय और प्रजनन अंगों के रोगों में किया जाता है।

  • मानसिक रोग – तनाव, चिंता, मानसिक थकान, अवसाद (डिप्रेशन), अल्जाइमर रोग
  • मिर्गी या एपिलेप्सी
  • हृदय की कमजोरी
  • कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना
  • धमनीकलाकाठिन्य (atherosclerosis)
  • शवास (दमा या अस्थमा)
  • पुरानी खांसी
  • वातव्याधि (diseases of nervous and musculoskeletal system)
  • आमवात (संधिशोथ गठिया) – Rheumatoid Arthritis
  • अस्थिसंधिशोथ या संधिवात – osteoarthritis
  • वातरक्त (gout) यूरिक और एसिड का बढ़ना
  • गुर्दे की बीमारियां
  • मूत्र विकार
  • अश्मरी – गुर्दे की पथरी
  • प्रमेह
  • पुयमेह
  • हल्का पेट दर्द
  • पुराना कब्ज
  • पुरुषों की समस्याएं या पुरुषों की कमजोरी या दुर्बलता
  • पौरुष ग्रंथि की अतिवृद्धि
  • अल्पशुक्राणुता के कारण बांझपन
  • पेडू का दर्द और कष्टार्तव
  • ल्यूकोरिया
  • शोथ
  • जीर्ण ज्वर
  • मेदोरोग – मोटापा

औषधीय प्रयोग एवं लाभ (Used & Benefits)

आयुर्वेद में शिलाजीत रसायन द्रव्य के रूप में जाना जाता है और ये एक अच्छी कायाकल्प औषधि है। चंद्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati) में यह एक मुख्य घटक द्रव्य है। शिलाजीत का प्रभाव थायरॉयड ग्रंथि पर भी पड़ता है जिस के कारण इस के मुख्य योग चंद्रप्रभा वटी का प्रयोग थायरॉयड के रोगों में किया जाता है। यह गले के कैंसर में भी हितकारी है।

शुद्ध शिलाजीत (शिलाजतु) आमतौर पर एक स्वास्थ्य टॉनिक के रूप किया जाता है। रसायन होने के कारण यह कई तरह की बीमारियो को रोकने व ठीक करने में अत्यधिक लाभदायक है।

शिलाजीत तनाव, चिंता आदि मानसिक रोगों में लाभदायक है

शुद्ध शिलाजीत का प्रयोग चिंता, तनाव और अवसाद आदि जैसे मानसिक रोगों को दूर करने के लिए लाभदायक है। शिलाजीत मेध्य होने के साथ साथ चिंता निवारक और मन को शांत करने वाला भी है। शिलाजीत में फुल्विक एसिड होता है जिसके कारण जो मन को शांत करने का भी काम करता है और चिंता, तनाव और अवसाद (डिप्रेशन) से मुक्ति दिलाता है। व्यक्ति की प्रकृति व रोग के दोष अनुसार शिलाजीत निम्नलिखित अनुपानों के साथ प्रयोग किया जा सकता है:

वात प्रकृति व वात दोष की प्रधानता

शुद्ध शिलाजीत 500 मिलीग्राम
ब्राह्मी (Bacopa Monnieri) 500 मिलीग्राम
शंखपुष्पी 500 मिलीग्राम
मालकांगनी 500 मिलीग्राम
जटामांसी 500 मिलीग्राम

पित्त प्रकृति व पित्त दोष की प्रधानता

शुद्ध शिलाजीत 500 मिलीग्राम
मंडूकपर्णी (Centella Asiatica) 500 मिलीग्राम
शंखपुष्पी 500 मिलीग्राम
पेठा सूखा पाउडर 500 मिलीग्राम

कफ प्रकृति व कफ दोष की प्रधानता

शुद्ध शिलाजीत 500 मिलीग्राम
वच चूर्ण 500 मिलीग्राम
ज्योतिष्मती 500 मिलीग्राम

अल्जाइमर रोग में सहायक

शिलाजीत मेध्य औषधियों के साथ मिल कर अल्जाइमर रोग की चिकित्सा में हितकर है। जैसे ऊपर तनाव चिंता आदि रोगों में शिलाजीत के लिए अनुपानों की व्यवस्था की है, उसी प्रकार अल्जाइमर रोग में भी वही व्यवस्था लाभदायक है। इस प्रकार की व्यवस्था अल्जाइमर रोग की वृद्धि को रोकती है और इस के लक्षणों को कम करती है। यह रोग के कारण मनोदशा में हो रहे बदलाव रोकने और ठीक करने में मदद करती है।

मोटापे और वजन को कम करने में सहायक

शिलाजीत को त्रिफला के काढ़े के साथ शुद्ध किया जाता हैं जो इस के मेदोहर गुण में वृद्धि करता है। इससे शिलाजीत के वजन को कम करने की क्षमता बढ़ जाती है।

धमनीकलाकाठिन्य (Atherosclerosis) में लाभदायक

धमनीकलाकाठिन्य (Atherosclerosis) एक धमनियों का रोग हैं जिस में धमनियों सख्त व तंग होने लगती है।  इस रोग में शिलाजीत फायदेमंद हैं। यह धमनियों में होने वाला शोथ (inflammation) जो धमनीकलाकाठिन्य का कारण बनता है उसे कम करता है और रोग की वृद्धि को रोकता है। यह कोलेस्ट्रॉल और लिपिड के स्तर को भी कम करता है।  यह ३ से ६ महीनो में अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर देता है।  यह रक्त वाहिकाओं की मोटाई और कठोरता को कम करता हैं और उन्हें लचीलापन प्रदान करता हैं। यदि यह अर्जुन, गुग्गुल, पुष्करमूल और त्रिकटु चूर्ण आदि के साथ में प्रयोग किया जाये तो इस के इस रोग में और भी अच्छे परिणाम आते है।

साँस लेने की मुश्किल में राहत

शिलाजीत साँस लेने की मुश्किलो में उतना प्रभावी नही हैं क्यों की यह सीधा असर नहीं करता। यह सिर्फ तब काम करता हैं जब शारीरिक कमजोरी या ज्यादा श्रम से साँस लेने की तकलीफ हो रही हो। शिलाजीत मांसपेशियों को मजबूत करता हैं और कमजोरी कम करता हैं।  इसके साथ ही ये मनुष्य को शारीरिक श्रम के लिए सक्षम बनाता हैं और सांस संबंधी मुश्किलो का कम करता हैं।

दमा के रोगियों के लिए भी शिलाजीत के वही फायदे है। यह बार बार होने वाले अस्थमा को कम करता है। अच्छे लाभ के लिए इसे पुष्करमूल और अश्वगंधा के साथ प्रयोग किया जा सकता है।

पुराना कब्ज दूर करने के लिए

पुरानी कब्ज में आँते कमजोर जो जाती हैं।  इसी वजह से क्रमाकुंचन की गति भी कम हो जाती हैं। इस प्रकार की कब्ज में रोगियों को उन औषधियों की ज़रूरत पड़ती हैं जो आंतो को शक्ति प्रदान करती हैं। प्रकृतिक तरीके से आंतों की गतिशीलता को यह सुचारू करता हैं और जिगर और पित्ताशय से पित्त स्राव को सुधारता हैं। जिस के कारण कब्ज से छुटकारा मिलता है।

गठिया के विकार को दूर करता हैं शिलाजीत

शिलाजीत में शोथहर और पीड़ानाशक गुण होते हैं, जो कि गठिया में होने वाले जोड़ों के दर्द, सुजन और जकड़न को ठीक करता है  शिलाजीत सिर्फ गठिये में ही लाभदायक नही हैं बल्कि हर तरह के जोड़ो के दर्द में भी सहायक है।

पुराना कष्टार्तव और पेडू के दर्द दूर करने में सहायक

शिलाजीत महिलायो के गर्भाशय और पेडू को मजबूती प्रदान करता हैं। यह गर्भाशय से सम्बंधित हर रोग जैसे कष्टार्तव या पेडू के दर्द की रोकथाम करने में भी सहायक हैं। गंभीर मामलों में, रोगी को दूसरे आयुर्वेदिक उपचार की ज़रूरत भी होती हैं।

बार बार पेशाब आना

शिलाजीत के सेवन से हालाँकि शुरुआत में पेशाब आने की आवृत्ति  बढ़ जाती हैं। पर ऐसा सिर्फ कुछ समय तक ही होता हैं इसके बाद सब ठीक हो जाता हैं और इसके प्रयोग से अत्यधिक पेशाव आने की समस्या दूर हो जाती हैं।

अल्पशुक्राणुता के कारण होने वाली बांझपन की समस्या को दूर करता हैं

शिलाजीत पुरुषो में ज्यादा प्रसिद्ध हैं। यह अल्पशुक्राणुता के कारण होने वाले बाँझपन को कम करने में सहायक हैं। यह पुरुषों की शक्ति को बढ़ाता है। इसके लिए इसका प्रयोग अश्वगंधा के साथ किया जा सकता है।

ज्यादा शराब पीने से होने वाला उच्च रक्तचाप को कम करता है शिलाजीत

हर चीज़ की अधिकता वैसे तो बुरी होती हैं और यही बात ज्यादा शराब पीने वालो पर भी लागु होती हैं। ज्यादा शराब पीने से रक्तचाप बढ़ता हैं और भविष्य में उच्चरक्तचाप होने का खतरा रहता हैं। जिन मामलो में ज्यादा शराब पीने से रक्तचाप बढ़ता हैं, उनमे शिलाजीर या चंद्रप्रभा वटी सहायक होती हैं।

शिलाजीत मधुमेह के रोगियों के लिए सहायक हैं

हालाँकि पुरानी किताबो में शिलाजीत के बारे में किये गए दावे आजकल के ज़माने में पूरी तरह सही नही लग रहे हैं पर फिर भी ये मधुमेह के लक्षणों को दूर करने, मधुमेह की मुश्किलो को दूर करने और कोशिकाओं में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाने में लाभप्रद हैं।

कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करता है

शिलाजीत उच्च कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करता है। आयुर्वेद में प्रयोग की जाने वाली संयोजित चिकित्सा में शिलाजीत उपयोगी हैं। कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने के लिए शिलाजीत का प्रयोग त्रिकटु, अर्जुन, गुग्गुल, पुष्करमूल और तुलसी के साथ किया जाता हैं।

औषधीय मात्रा एवं सेवन विधि

शिलाजीत की मात्रा इस प्रकार है:

बच्चे में 65 से 250 मिलीग्राम
वयस्क 250 से 1000 मिलीग्राम
अधिकतम संभव मात्रा 3 ग्राम (विभाजित खुराकों में)

शिलाजीत की मात्रा का निर्धारण रोगी की उम्र, वजन, रोग और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार किया जाता है। कुछ लोगों में यह 125 मिलीग्राम की खुराक में भी काम करता है और कुछ को इसकी अधिक मात्रा लेनी पड़ सकती है। यह अधिकतम पुरे दिन में 3 ग्राम तक लिया जा सकता है। हालांकि यह मात्रा आजकल ज्यादा प्रतीत होती है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार शिलाजीत कम मात्रा में शुरू कर धीरे धीरे इस की मात्रा बढ़ानी चाहिए।

शिलाजीत का सेवन कब करना चाहिए?

सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले। शिलाजीत का दूध के साथ सेवन लाभप्रद होता हैं।

शिलाजीत का सेवन कैसे करें?

शिलाजीत को गर्म पानी या गर्म दूध में घोल कर कोसे  कोसे ही पिए।

शिलाजीत कैप्सूल के रूप में भी मिलता हैं जिसका सेवन आसानी से किया जा सकता हैं।

तरल रूप में शिलाजीत लेना हो तो गर्म दूध में सिर्फ एक से पांच बुँदे शिलाजीत मिला कर इसका प्रयोग करें।

दुष्प्रभाव (Side Effects)

शिलाजीत अगर कम मात्रा में लिया जाये तो इसका कोई साइड इफ़ेक्ट नही हैं पर अगर एक दिन में इसका एक ग्राम से अधिक मात्रा का सेवन किया जाये तो उसके कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं जैसे कि:

  1. शरीर में अत्यधिक गर्मी महसूस होना
  2. जलन महसूस होना
  3. पैरो में जलन या गर्मी का अहसास होना
  4. हाथो और पैरो में अत्यधिक गर्मी का महसूस होना

ये सभी साइड इफ़ेक्ट शिलाजीत के गर्म प्रभाव के कारण होते हैं। इन प्रभावो को कम करने के लिए शिलाजीत का सेवन दूध के साथ किया जा सकता है। यदि यह साइड इफेक्ट्स कम न हो तो चिकित्सक से परामर्श करें।

अन्य संभावित दुष्प्रभाव

पेशाव का अधिक आना या कम आना: हालांकि ये साइड इफ़ेक्ट बहुत ही कम देखने में आता हैं पर विभिन्न लोगों के शिलाजीत का अधिक मात्रा का सेवन करने से अलग-अलग साइड इफ़ेक्ट हो सकते हैं। कुछ लोगो ने इससे पेशाव के अधिक आने की शिकायत की हैं तो वहीँ कुछ ने कम पेशाव आने की पर लोगों को इन साइड इफ़ेक्ट से कुछ दिनों तक ही परेशानी होती हैं उसके बाद यह तकलीफ ठीक हो जाती हैं।

ऐलर्जी का प्रभाव: अगर आपको शिलाजीत में मौजूद सामग्री से एलर्जी हैं तो आपको खुजली, पित्ती, चक्कर आना और दिल की गति का बढ़ जाना जैसी मुश्किलो का सामना करना पड़ सकता हैं। हालाँकि इस लक्षण का उल्लेख हमने सिर्फ एहतियात के लिए किया हैं, पर अभी तक हमारे किसी भी रोगी को इसका सामना नही करना पड़ा हैं।

शुद्ध शिलाजीत के विशिष्ट आयुर्वेदिक योग

संदर्भ

  • Shilajit Benefits, Uses, Dosage & Side Effects