स्वर्ण भस्म (Swarna Bhasma in Hindi)

स्वर्ण भस्म (Swarna Bhasma) आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण औषधि है जो रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाती है और बहुत से जीर्ण रोगों के इलाज के लिए उपयुक्त दवा है। स्वर्ण भस्म वात (Vata),पित्त (Pitta), और कफ (Kapha) के समस्त रोगों में ख़ास तौर पर पित्त प्रधान रोगों यह विशेष लाभकारी है। यह त्वचा के वर्ण को सुधारती है, रस रक्त आदि धातुओ को बल प्रदान करती है, मुख की कान्ति को बढ़ाती है, और बहुत से साधारण रोगों से व्यक्ति को सुरक्षित रखती है। रसायन के रूप में इस का उपयोग करने से सर्दी जुकाम, ज्वर, और अन्य सामान्य रोगों से रक्षा होती है।

आयुर्वेद में इसका उपयोग बुखार (ज्वर) विशेषत: जीर्ण ज्वर, कई तरह के संक्रमण (infections), हृदय रोग, दमा (अस्थमा), मानसिक रोग, स्नायु-मांसपेशी (muscles & ligaments) संबंधी विकार, ज्वर सहित खांसी, फेफड़ों के संक्रमण, सामान्य दुर्बलता, मांसपेशियों में कमजोरी, पुरुषों में कमजोरी, नपुंसकता, बांझपन आदि में प्रयोग किया जाता है। यह विशेष रूप से संधिशोथ गठिया (Rheumatoid Arthritis) के लिए किया बहुत लाभकारी है।

स्वर्ण भस्म के घटक (Ingredients)

स्वर्ण भस्म को 24 कैरट शुद्ध सोने (gold) से बनाया जाता है। आयुर्वेद की प्राचीन रस-विधा में इस के निर्माण के बारे में एवं इसके गुणों के बारे में विस्तार से चर्चा की गयी है।

आयुर्वेदिक गुण धर्म एवं दोष कर्म

रस (Taste) मधुर, कषाय
गुण (Property) लघु, स्निग्ध
वीर्य (Potency) शीत
विपाक (Metabolic Property) मधुर
दोष कर्म (Dosha Action) त्रिदोषघ्न या त्रिदोष शामक, विशेषत: पित शामक

औषधीय कर्म (Medicinal Actions)

  • मेध्य – बुद्धिवर्धक और मेधावर्धक
  • उत्कृष्ट हृदय टॉनिक – दिल के लिए हितकारी
  • जीवाणु नाशक (एंटीबैक्टीरियल)
  • ज्वरघ्न
  • विषघ्न
  • वणर्य – रंग वर्ण सुधरनेवाला
  • शोथहर – सूजन आदि दूर करने वाली
  • श्वासहर – सांस की तकलीफ दूर करे
  • श्लेष्मपूतिहर – फेफड़ों में से बलगम मवाद कम करे
  • पूतिहर – मवाद कम करें
  • जीवनीय – जीवन शक्ति बूस्टर
  • ओजोबर्धक – रोग प्रतिरोधक शक्ति बूस्टर
  • वृष्य – पुरुष शक्ति और क्षमता वर्धक
  • रसायन
  • बृंहण – बलवर्धक

स्वर्ण भस्म के चिकित्सीय संकेत (Indications)

स्वर्ण भस्म को स्वास्थ्य की निम्न स्थितियों में उपयोग करने में काफी लाभ मिलता है।

  1. मानसिक रोग
  2. मानसिक दुर्बलता
  3. मानसिक असंतुलन
  4. स्मरण शक्ति की क्षति
  5. उन्माद (विक्षिप्तता)
  6. तनाव
  7. चिंता
  8. डिप्रेशन
  9. वातव्याधि
  10. पक्षाघात
  11. मिर्गी
  12. क्षीण प्रतिरोधक क्षमता में कमी
  13. ज्वर विशेषत: जीर्ण ज्वर
  14. लगभग हर तरह के संक्रमण (infections)
  15. उपदंश (सिफलिस)
  16. श्वाश – दमा (अस्थमा)
  17. उरःक्षत
  18. यक्ष्मा (tuberculosis)
  19. पुरानी खांसी
  20. ज्वर सहित खांसी
  21. फेफड़ों के संक्रमण
  22. ह्रदय रोग (heart diseases)
  23. हृदय की निर्बलता या कमजोरी
  24. त्वचा के रोग
  25. त्वचा और रूप की हानि
  26. कुष्ठ रोग
  27. प्रमेह
  28. बुढ़ापा
  29. व्यसन या बुढ़ापे के माध्यम से पुरुष शक्ति कम होने पर
  30. आंखों में जलन

स्वर्ण भस्म के लाभ एवं प्रयोग (Benefits & Uses)

पारंपरिक भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा में स्वर्ण भस्म को एक महत्त्वपूर्ण चिकित्सीय घटक के रूप में उपयोग किया जाता है। प्राचीन काल में लगभग 2500 ईसा पूर्व से ही भारतीय, अरबी और चीनी साहित्य में इस बात के उदाहरण मिलते हैं। स्वर्ण भस्म को ब्रोन्कियल अस्थमा, गठिया, मधुमेह, और तंत्रिका तंत्र के रोगों सहित कई अन्य ​​विकारों के लिए औषधि के रूप में दिया जाता है।

स्वर्ण भस्म एक विशिष्ट आयुर्वेदिक औषधि है जिसका प्रभाव शरीर के सभी अंगों पर होता है। यह आपके शरीर के सभी अंगों को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ बनाती है। इसका उपयोग बहुत से रोगों के उपचार में किया जाता है।

  1. स्वर्ण भस्म वात, पित्त और कफ को संतुलित रखती है।
  2. यह एक उत्कृष्ट हृदय टॉनिक है जो दिल की सामान्य कमजोरी को दूर करता है और दिल की पम्पिंग क्षमता को बढ़ाता है। यह रक्तचाप को सामान्य रखने में मदद करता है।
  3. यह पुरुषों की शक्ति को बढ़ाने में सहायक है और नपुंसकता एवं शक्तिहीनता के इलाज में लाभकारी है।
  4. महिलाओं में यह अन्य औषदियो के साथ बांझपन दूर करने के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ है।
  5. यह क्षीण हुई रोग प्रतिरोधक शक्ति (इम्युनिटी) को बढ़ाने के लिए अतिउत्तम सप्लीमेंट है। इस के सेवन से कई बीमारियों से शरीर की रक्षा होती है। बच्चों में यह जन्म के समय सुवर्ण प्राशन (Swarna Prashana) के रूप में मानसिक विकास और रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिए दिया जाता है।
  6. स्वर्ण भस्म बुद्धि, स्मृति, स्मरण शक्ति, विश्लेषणात्मक शक्ति आदि को बढ़ाने के लिए अतिउत्तम व सिद्ध उपाय है।
  7. यह मानसिक रोग जैसे अल्जाइमर रोग, पार्किंसंस रोग आदि को ठीक करने तथा रोकने में भी कारगर है।
  8. मधुमेह के कारण होने वाली तंत्रिकाविकृति को भी दूर करती है।
  9. स्वर्ण भस्म का उपयोग करने से त्वचा की कांति और रूप में निखार आता है।

रक्त शुद्धि

किसी भी संक्रमण या अपच के कारण, शरीर कई विषाक्त पदार्थों (टोक्सिन) को बनाता है और इन्हीं पदार्थों के संचय से हमारे शरीर में कई रोग हो जाते हैं। शुद्ध स्वर्ण भस्म से हमारे शरीर से यह विषाक्त पदार्थ (टोक्सिन) दूर हो जाते हैं और शरीर निरोगी हो जाता है।

हृदय रोगों में

स्वर्ण भस्म को हृदय रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है। यह हृदय और हृदय की मांसपेशियों को शक्ति प्रदान करता है। यह रक्त परिसंचरण, खून के विषहरण और धमनियों की सफाई में सुधार लाता है।

मानसिक विकार

यह अवसाद (depression) की तरह अलग अलग मानसिक विकारों के लिए लाभदायक आयुर्वेदिक औषधि है। यह भी मस्तिष्क में सूजन को कम करता है। यह भी स्मृति और एकाग्रता को भी बढ़ाता है।

प्रतिरक्षण बढ़ाने वाला

यह प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देता है और वायरल संक्रमण के खिलाफ शरीर को ताकत से लड़ने में सुधार करता है। यह कैंसर के इलाज में भी फायदेमंद है। यह शरीर के अवांछित ऊतकों के विकास (abnormal growth of tissues) को रोकता है।

आँख आना (Conjunctivitis)

यह आंखों के आने, खुजली, लालिमा, जलन और सूजन के उपचार में लाभदायक है। स्वर्ण भस्म प्रवाल पिष्टी (Prawal Pishti), मुक्ता शुक्ति पिष्टी (Mukta Shukti Bhasma), मुक्ता पिष्टी (Moti Pishti) और गिलोय सत्व (Giloy Sat) जैसे अन्य दवाइयों के साथ नेत्रश्लेष्मलाशोथ (Conjunctivitis) में सहायक है।

त्वचा रोग

यह सोरायसिस जैसे विभिन्न पुरानी और जीर्ण त्वचा रोग शोथ, सूजन, लालिमा, जलन और खुजली में लाभकारी है।

मधुमेह के कारण शिथिलता

स्वर्ण भस्म मधुमेह के कारण हुई पुरुषों की शारीरिक शक्ति में कमी आदि को दूर करने के लिए लाभदायक है।शिथिलता और पुरुषों में शीघ्रपतन के लिए प्राकृतिक उपचार के रूप में बहुत लोकप्रिय है। मधुमेह में नसें कमजोर हो जाती हैं। स्वर्ण भस्म इस तरह के मामलों में बहुत ही अच्छे परिणाम देती है। स्वर्ण भस्म को शिथिलता के लिए कोई भी उपयोग कर सकता है, चाहे उसे मधुमेह हो या ना हो।

सेवन विधि और मात्रा (Dosage)

स्वर्ण भस्म की मात्रा आपके स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। अपने चिकित्सा की सलाह लें। स्वर्ण भस्म की सामान्य खुराक इस प्रकार है:

आयु वर्ग मात्रा
0 से 5 वर्ष तक 5 मिलीग्राम प्रति दिन
5 से 10 वर्ष तक 10 मिलीग्राम प्रति दिन
10 से 16 वर्ष तक 15 मिलीग्राम प्रति दिन
16 वर्ष से बड़े 15-30 मिलीग्राम प्रति दिन

स्वर्ण भस्म (Swarna Bhasma) का लंबे समय तक उपयोग केवल चिकित्सा पर्यवेक्षण के अंतर्गत किया जा सकता है।

अनुपान

  • शहद (मधु) 1 छोटी चम्मच
  • पिप्पली चूर्ण 500 मिलीग्राम + शहद 1 छोटी चम्मच
  • मक्खन ½ चम्मच + मिश्री  पाउडर ½ चम्मच
  • गिलोय सत्व 500 मिलीग्राम + शहद 1 छोटी चम्मच
  • दूध
  • घी
  • वच चूर्ण
  • आंवले के चूर्ण

स्वर्ण भस्म को उपरोक्त अनुपान साथ लेना चाहिए अथवा रोग के अनुसार बताये अनुपान के साथ लेना चाहिए। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

रोग अनुपान
मानसिक रोग वच चूर्ण 500 मिलीग्राम + शहद 1 छोटी चम्मच या ब्राह्मी चूर्ण 500 मिलीग्राम + शहद 1 छोटी चम्मच
रसायन आंवला चूर्ण 2 ग्राम
आंखों के रोग पुनर्नवा चूर्ण 2 ग्राम

दुष्प्रभाव (Side Effects)

यदि स्वर्ण भस्म का प्रयोग व सेवन निर्धारित मात्रा (खुराक) में चिकित्सा पर्यवेक्षक के अंतर्गत किया जाए तो इस के कोई दुष्परिणाम नहीं मिलते। अधिक मात्रा में इस के साइड इफेक्ट्स की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

सावधानियां (Precautions)

  • बच्चों की पहुंच और दृष्टि से दूर रखें।
  • लंबी अवधि (अधिक से अधिक 9 महीने) के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • स्वयं से औषधि लेना अच्छा नहीं है और यह खतरनाक साबित हो सकता है।
  • उचित खुराक का सेवन एक सीमित अवधि के लिए किया जाना चाहिए।

संदर्भ

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