Tag Archives: First Edition

अगरु (अगर) के लाभ, प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

अगरु (Agaru)

अगरु (Agaru) को अगर भी कहा जाता हैं। आयुर्वेद में इसका प्रयोग श्वसनीशोध,अस्थमा, घाव, आंतों की कीड़े, मुँह की बदबू, भूख न लगना,आंत्र गैस, हृदय की कमजोरी, गठिया, लगातार हिचकी आना, एनरेसिस, कैल्यूरिया, ठण्ड के साथ बुखार और पुरुष प्रजनन तंत्र के रोगों के इलाज़ के लिए किया जाता हैं।

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आलू बुखारा के फायदे और नुकसान

आलू बुखारा

आलू बुखारा एक बहुत ही स्वादिष्ट और पौष्टिक फल है। इसका स्वाद खाने में खट्टा मीठा होता है और अच्छी तरह पकने के बाद यह और भी स्वादिष्ट हो जाता है। आलू बुखारा की पैदावार पर्शिया, ग्रीस और अरब देशों में प्रमुख रूप से होती है। आलू बुखारा अधिकतर बुखारे की तरफ से आता है इस लिए भी इसे आलू …

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कफ दोष के गुण, कर्म, मुख्य स्थान, प्रकार, असंतुलन, बढ़ने और कम होने के लक्षण

कफ दोष

कफ एक ऐसी संरचनात्मक अभिव्यक्ति है जो द्रव्यमान को दर्शाता है यह हमारे शरीर के आकार और रूप के लिए भी ज़िम्मेदार है। जैविक रूप से, यह द्रव और पृथ्वी का संयोजन है। कफ के अणु शरीर के जटिल अणु होते हैं जो कोशिकाओं में उत्तकों, ऊतकों के अंगों और जो पूरे शरीर में अंगों की स्थिरता को बनाये रखते …

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पित्त दोष के गुण, कर्म, मुख्य स्थान, प्रकार, असंतुलन, बढ़ने और कम होने के लक्षण

पित दोष

पित्त शरीर का ऐसा भाव(दोष) है जो शरीर की गर्मी, आग और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। जैविक रूप से, यह ऊर्जा और द्रव का संयोजन है। ऊर्जा सक्रिय सिद्धांत के रूप में कार्य करती है और द्रव एक वाहन की भूमिका निभाती है। पित्त तत्वों के कारण शरीर में सभी चयापचय प्रक्रियाएं होती हैं। पित्त कफ अणुओं (जटिल पदार्थों) को …

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वात दोष के गुण, कर्म, मुख्य स्थान, प्रकार, असंतुलन, बढ़ने और कम होने के लक्षण

वात दोष

“वा गतिगंधनयो” धातु से वात अर्थात वायु शब्द निष्पति होती है।  वात एक अभिव्यक्ति है और मुख्य कार्यकारी शक्ति है जो श्वाश, शारीरिक और मानसिक कर्म, परिवहन, संचलन, चिंतन, चेष्टायुक्त कार्य आदि के लिए जिम्मेदार होती है।

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अकीक भस्म एवं अकीक पिष्टी

अकीक भस्म (पिष्टी) एक खनिज आधारित आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका उपयोग सामान्य दुर्बलता, हृदय की कमजोरी, शरीर में अत्यधिक गर्मी, मानसिक रोगों, नेत्र रोगों और महिलाओं में गर्भाशय से होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव के उपचार में किया जाता है। अकीक बनाने के लिए मुख्य रूप से गोमेद रत्न को जड़ी बूटियों के रस में पीसकर, फिर तपाकर उसकी भस्म बनायी जाती …

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अभ्रक भस्म

अभ्रक भस्म अभ्रक की जलाई हुई राख है जिसका उपयोग आयुर्वेद में श्वसन विकारों, यकृत और पेट की बीमारियों, मानसिक बीमारियों और मनोदैहिक विकारों के लिए किया जाता है। अभ्रक भस्म को निस्तापन की प्रक्रिया के द्वारा तैयार किया जाता है, जिसमें अभ्रक मुख्य घटक होता है और पौधों के रस, अर्क और काढ़ों का उपयोग किया जाता है। इस …

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अविलतोलादि भस्म

अविलतोलादि भस्म

अविलतोलादि भस्म गंजी या अविलतोलादि भस्म सहस्रयोगम में प्रस्तुत एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग कई अंतर्निहित कारणों से होने वाले जलोदर के उपचार में किया जाता है। अविलतोलादि भस्म में मूत्रवर्धक गुण होते हैं, इसलिए यह पेशाब को बढ़ाता है और शरीर में जमा द्रव को कम कर देता है। घटक अविलतोलादि भस्म के निर्माण में निम्नलिखित जड़ी-बूटियों को …

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गोदंती भस्म के गुण, लाभ और औषधीय उपयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

गोदन्ती भस्म

गोदन्ती भस्म जिप्सम से बनाई गयी एक खनिज आधारित आयुर्वेदिक औषधि है। यह प्राकृतिक कैल्शियम और सल्फर सामग्री में समृद्ध है। आयुर्वेद (Ayurveda) के अनुसार, गोदन्ती भस्म तीव्र ज्वर (आयुर्वेद में इसे पित्तज ज्वर के रूप में भी जाना जाता है), सिरदर्द, जीर्ण ज्वर, मलेरिया, योनिशोथ, श्वेत प्रदर, गर्भाशय से अत्यधिक रक्तस्राव, सूखी खाँसी और रक्तस्राव के विकारों के लिए …

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शंखपुष्पी के स्वास्थ्य लाभ

Shankhpushpi - शंखपुष्पी

शंखपुष्पी (Shankhpushpi) का वनस्पति नाम “कोनोवुल्लूस प्लूरिकालिस (Convolvulus Pluricaulis)” है। यह अपने चिकित्सीय गुणों के कारण आयुर्वेद में प्रयोग होने वाली एक बहुत महत्वपूर्ण जड़ी बूटी है। यह औषधि मानसिक शक्ति और स्मृति को बढ़ाने, एकाग्रता में सुधार करने और याद करने की क्षमता में वृद्धि करने में फायदेमंद है। चिकित्सकीय रूप से, शंखपुष्पी अनिद्रा (नींद ना आने), तनाव संबंधी …

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