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बिल्वादि गुलिका के घटक द्रव्य, प्रयोग एवं लाभ, मात्रा, दुष्प्रभाव

बिल्वादि गुलिका - Vilwadi Gulika

विल्वादि गुलिका (जिसे विल्वादि अगद, विल्वादि वटी, बिल्वादि गुटिका भी कहते हैं) विभिन्न घटकों से बनी एक आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका उपयोग साँप काटने, बिच्छू के डंक, मकड़ी के काटने, चूहे के काटने, आंत्रशोथ, हैजा, अपच और बुखार के उपचार में किया जाता है। आम तौर पर, यह मानव शरीर …

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कर्पूरादि तैलम् घटक द्रव्य, लाभ, एवं उपयोग विधि

कर्पूरादि तैलम् (Karpooradi Thailam) - कर्पूरादि तेल

कर्पूरादि तैलम् (Karpooradi Thailam), जो कर्पूरादि तेल या कर्पूरादि थैलम के नाम से भी जाना जाता है, एक मालिश के उपयोग में आने वाला आयुर्वेदिक तेल (Ayurvedic massage oil) है। इसका उपयोग ऐंठन, दर्द, अकड़न और सुन्नपना को कम करने के लिए किया जाता है। इसमें कपूर और तिल का …

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अजमोदादि चूर्ण के लाभ, प्रयोग, घटक द्रव्य, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

अजमोदादि चूर्ण Ajmodadi Churna

अजमोदादि चूर्ण विभिन्न अवयवों से बनी औषधि है जिसका उपयोग संधिशोथ (Rheumatoid Arthritis),  गृध्रसी (Sciatica), पीठ दर्द और कफ विकारों के उपचार के लिए किया जाता है। इसमें शक्तिशाली दाहक विरोधी गुण हैं। यह जोड़ों की सूजन और जोड़ों के विकारों के कारण होने वाले तेज दर्द को कम करता …

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भृंगराज के लाभ, प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

भृंगराज (Bhringraj)

भृंगराज (Bhringraj) एक सुप्रसिद्ध औषधि है जो यकृत विकारों और केश वर्धन में उसके उपयोग और लाभ के लिए जानी जाती है। यह त्वचा रोगों, खांसी, अस्थमा, नेत्र विकार और सिर के किसी भी हिस्से से संबंधित विकारों के लिए भी प्रभावी औषधि है। यह बालों की बढ़वार में सुधार …

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हरड़ (हरीतकी) के लाभ, प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

हरड़ (हरीतकी) (Harad या Haritaki)

आयुर्वेद चिकित्सा में हरीतकी अमृत के समान एक बहुत ही प्रभावशाली औषधि मानी गयी है। इसका वानस्पतिक नाम Terminalia Chebula है और आम बोलचाल की हिंदी भाषा में इसे हरड़ या हर्रे भी कहते हैं। इसके अतिरिक्त आयुर्वेद साहित्य में इस औषधि को विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे …

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अग्निमुख चूर्ण के गुण-कर्म, प्रयोग, लाभ, मात्रा और दुष्प्रभाव

अग्निमुख चूर्ण (Agnimukh Churna)

अग्निमुख चूर्ण का प्रयोग अग्नि वर्धक औषधि के रूप में किया जाता है। अग्निमुख चूर्ण मंदाग्नि में अच्छा काम करता है। भूख लगाता है और पेट की वायु का नाश करता है। इसका प्रयोग वात (Vata) और कफ (Kapha) प्रधान विकार में करना ही हितकर है। इस औषधि के गरम वीर्य …

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चूर्ण – आयुर्वेदिक चूर्णों की सूची

चूर्ण या आयुर्वेदिक पाउडर

चूर्ण या आयुर्वेदिक पाउडर एक प्रकार की आयुर्वेदिक औषधि की एक श्रेणी है जिसमें एक या एक से ज्यादा जड़ी बूटियों को महीन पीसकर, कपड़े या बारीक चलनी में छानकर तैयार किया जाता है। “रज” या “क्षोद” चूर्ण के ही पर्यायवाची नाम हैं। चूर्ण बनाने की विधि एवं तैयारी चूर्ण …

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गुड़मार अर्क

गुड़मार अर्क (Gudmar Arq)

गुड़मार अर्क या गुरमार अर्क (Gudmar Arq) मधुमेह की एक उत्तम औषधि के रूप में प्रयोग की जाती है। यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करने के लिए एक कारगर दवा है। इसका प्रयोग मुख्य रूप से रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। …

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बंधानी हींग

बंधानी हींग (Bandhani Hing)

बंधानी हींग (Compounded Asafoetida) पाचन रोगों तथा पेट की बीमारियों के लिए एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है। हींग का पुराने ज़माने से ही पेट की बिमारियों को ठीक रखने के लिए प्रयोग किया जाता रहा हैं। यह गैस से राहत देता हैं और पाचन तंत्र को ठीक रखता हैं, इसके …

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ऋतु हरीतकी – सदा स्वस्थ रहने के लिए कैसे करें हरड़ का प्रयोग

ऋतु हरीतकी

स्वास्थ्य लाभ के लिए ऋतु के अनुसार हरीतकी (हरड़) का सेवन उपयुक्त अनुपान के साथ करने की विधि को आयुर्वेद में ऋतु हरीतकी कहा जाता है। आयुर्वेद की मान्यता है कि प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक एवं मानसिक प्रकृति के अनुसार और वातावरण में होने वाले बदलाव के अनुसार औषधि और …

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