जड़ी बूटी, आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी दवाओं के बारे में हिंदी में जानें

त्रिफला चूर्ण लाभ, उपयोग, खुराक और दुष्प्रभाव

त्रिफला अथवा त्रिफला चूर्ण एक आयुर्वेदिक हर्बल औषधि है जिसमें तीन प्रकार के फलों का चूर्ण होता हैं। इसके समान मात्रा में आमला, बहेड़ा और हरड़ होते है। त्रिफले का प्रयोग चूर्ण, गोलियों और सत्त कैप्सूल्स के रूप में किया जाता है। यह कब्ज, वजन घटाने, पेट की चर्बी को कम करने, शरीर शोधन, अपच और पेट की समस्याओं में लाभ देता है।

घटक (संरचना)

त्रिफला चूर्ण में बीजरहित आंवला, बहेड़ा और हरड़ के छिलकों का चूर्ण समान अनुपात में  होता है।

सामग्री मात्रा (वजन में)
आंवला (आमलकी) के फल का छिलका 33.33%
बहेड़ा (बिभीतकी) के फल का छिलका 33.33%
हरड़ (हरीतकी) के फल का छिलका 33.33%

त्रिफला की रासायनिक संरचना

त्रिफला में कई जैविक यौगिक शामिल हैं। इसमें मुख्य रूप से टैनिन, गैलिक एसिड, चेबुलाजीक एसिड और चेबुलिनिक एसिड होते है। त्रिफला में विटामिन सी भी बहुत अधिक मात्रा में होता है। त्रिफला में उपस्थित विटामिन सी और चेबुलाजीक एसिड एक एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव डालती है।

औषधीय कर्म (Medicinal Actions)

त्रिफला में निम्नलिखित औषधीय गुण है:

  • सौम्य रेचक
  • हल्का एंटासिड
  • अति उच्च रक्तचाप रोधी
  • गठिया विरोधी
  • उत्परिवर्तनीय विरोधी
  • एंटीऑक्सिडेंट
  • हल्का पीड़ाहर
  • जीवाणुरोध
  • कैंसर विरोधी
  • वायुनाशी
  • पाचन बढ़ाने वाला
  • आर्तवजनक
  • कफ निस्सारक
  • वसा गलाने वाला
  • रक्त वर्धक

चिकित्सकीय संकेत (Indications)

त्रिफला निम्नलिखित व्याधियों में लाभकारी है:

  • कब्ज
  • क्षीण प्रतिरोधक क्षमता में कमी
  • वजन घटाने (मोटापा)
  • मधुमेह
  • उदर फूलना
  • पीलिया
  • पाइरिया
  • खून की कमी
  • दमा
  • खांसी
  • कैंसर
  • सामान्य जुखाम
  • आवर्तक संक्रमण

त्रिफला के लाभ और प्रयोग (Benefits & Uses)

त्रिफला रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है और श्वसन संक्रमण को होने से रोकता है। यह गैस्ट्रिक स्राव को उत्तेजित करता है और पाचन क्रिया में सुधार करता है। रेचक और वायुनाशी गुणों के कारण, त्रिफला चूर्ण कब्ज, पेट फूलने, गैस और उदर रोग में लाभ प्रदान करता है।

वजन घटाने (मोटापा) के लिए त्रिफला

त्रिफला एक साधारण औषधि है परंतु यह वजन घटाने में लाभ प्रदान करता है। यह विसेरल फैट और सेल्युलाईट को कम कर देता है।

त्रिफला वजन घटाने (मोटापे) में कैसे काम करता है?

त्रिफला का वसा के चयापचय पर प्रभाव पड़ता है। यह शरीर में चयापचय को सुधारने के द्वारा वसा के जलने में वृद्धि करता है। मोटे लोगों में, हड्डियां कमजोर होती हैं क्योंकि आयुर्वेदिक विज्ञान के अनुसार वसा का चयापचय सही नहीं होता है।

आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में मुख्य रूप से सात प्रकार के धातु (टिश्यू) होते हैं, जो की साथ ही साथ अगली धातु बनाने के लिए भी जिम्मेदार होते हैं। उदाहरण के लिए, रस धातु (लसीका) चयापचय होता है और रक्त धातु बनाता है। रक्त धातु (रक्त) चयापचय होता है और मांस धातु (मांसपेशियों) बनाता है। मांस धातु चयापचय होता है और मेद धातु (वसा) बनाता है। जब मेद धातु चयापचय होता है तो अस्थि धातु का गठन होता है।

इस अवधारणा के अनुसार, मांस धातु से मेद धातु और मेद धातु से अस्थि धातु के चयापचय में एक समस्या है, जो अंततः शरीर में वसा को जमा कर देती है और आपकी हड्डियों को कमजोर बनाती है।

हाल के अध्ययनों के अनुसार, मोटे लोगों में कमजोर हड्डियां होती हैं, जो मोटे लोगों की कमजोर हड्डियों की आयुर्वेदिक अवधारणा का समर्थन करती हैं।

त्रिफला शरीर में चयापचय के चक्र को सुधारता है, इसलिए यह शरीर का वजन कम कर देता है। इसका उपयोग हड्डियों को मजबूत बनाता है और मोटे लोगों में अस्थि खनिज घनत्व बढ़ाता है। इसलिए, व्यावहारिक अवलोकन के अनुसार, धातु चयापचय के संबंध में आयुर्वेद की अवधारणा सही है।

हमें मोटापा से ग्रसित लोगों में कमजोर हड्डियां और कम अस्थि खनिज घनत्व भी मिले। त्रिफला से उपचार करने से पेट की वसा और साथ ही साथ कम हुए हड्डी खनिज घनत्व भी बढता है।

वजन घटाने के लिए त्रिफला चूर्ण का उपयोग कैसे करें?

वजन कम करने के लिए त्रिफला चूर्ण को गर्म पानी के साथ 3 से 5 ग्राम (लगभग 1 चम्मच) की खुराक में लेना चाहिए। इसे एक दिन में 2 से 3 बार लिया जा सकता है।

वैकल्पिक रूप से, त्रिफला चूर्ण (1/2 चम्मच) को त्रिकटु चूर्ण (250 मिलीग्राम) और शहद (1 चम्मच) के साथ मिलायें और फिर इस मिश्रण को गुनगुने पानी से लें। यह काफी अच्छा तरीका है क्योंकि त्रिकटु चयापचय को बढ़ाता है और त्रिफला की चर्बी गलाने की क्षमता में सुधार करता है।

वजन घटाने के लिए त्रिफला चूर्ण को कब लेना चाहिए?

हालांकि, वजन कम करने के लिए त्रिफला चूर्ण को लेने का कोई निर्दिष्ट समय नहीं है। कुछ लोग इसे खाली पेट ले लेते हैं, इस कारण उन्हें पेट की गड़बड़ी का सामना करना पड़ता है। त्रिफला चूर्ण को लेने का सबसे उचित समय भोजन करने के एक घंटे बाद का होता है।

मधुमेह में त्रिफला का उपयोग

कुछ अध्ययनों के अनुसार इसमें हाइपोग्लाइसेमिक प्रभाव है, जो इंसुलिन प्रतिरोध पर इसकी कार्रवाई के कारण हो सकता है। त्रिफला चूर्ण इंसुलिन को तेज करने के लिए सेलुलर प्रतिरोध को कम करता है और कोशिकाओं में इंसुलिन के उचित उपयोग में मदद करता है। इसलिए, यह मधुमेह के उपचार में प्रभावी हो जाता है।

त्रिफला के एंटीऑक्सिडेंट और इम्युनो-उत्तेजक प्रभाव

त्रिफला में कई फाइटो केमिकल्स हैं, जो शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट और इम्युनो-उत्तेजक (रोग प्रतिरोधक शक्ति वर्धक) हैं। इन यौगिकों के कारण, त्रिफला चूर्ण उम्र बढ़ने से रोकने में, त्वचा के स्वास्थ्य को बनाए रखने, समय से पहले बाल सफ़ेद होने, बाल झड़ने और शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में प्रभावी है।

त्रिफला का इम्यूनो-उत्तेजक प्रभाव एड्स/एचआईवी पॉजिटिव रोगियों की सहायता करता है। यह प्रतिरक्षा में सुधार करता है और माध्यमिक संक्रमण को रोकता है।

चक्कर आना

त्रिफला चूर्ण चक्कर आने को कम करने के लिए लाभप्रद है। 2 ग्राम त्रिफला चूर्ण को 1 चम्मच शहद के साथ लेना से चक्कर कम करने के लिए फायदेमंद है। गंभीर मामलों में, त्रिफला के साथ उपचार को एक सप्ताह तक जारी रखना चाहिए।

कब्ज में त्रिफला

त्रिफला कब्ज के लिए एक आम घरेलु उपाय है। इसमें हलके रेचक गुण हैं। यह कड़े मल को ढीला करता है और क्रमाकुंचन को सुगम बनाता है। अन्य रेचकों के विपरीत, त्रिफला चूर्ण आदत ना डालने वाला रेचक है। यह हल्के से मध्यम कब्ज वाले लोगों के लिए फायदेमंद है।

उच्च कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स

त्रिफला उच्च कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर को कम करने के लिए एक रामबाण औषधि है। त्रिफला चूर्ण के साथ कुछ ही हफ्ते की चिकित्सा के बाद कुल सीरम कोलेस्ट्रॉल में एक महत्वपूर्ण कमी देखी जा सकती है। यह रक्त में कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर भी कम करता है।

दृष्टि और मोतियाबिंद के लिए त्रिफला

त्रिफला में मोतियाबिंद विरोधी क्षमता है। आयुर्वेद में, कई ग्रंथों ने बताया गया है कि यह दृष्टि में सुधार करता है और मोतियाबिंद और अन्य आंखों के रोगों की प्रवृत्तियों को कम करता है। कुछ अध्ययनों ने भी त्रिफला के इन प्रभावों का प्रदर्शन किया है।

आँखों के विकारों के लिए प्रयोग किये गए सप्तामृत लौह में यष्टिमधु (मुलेठी) और लौह भस्म के साथ साथ त्रिफला भी शामिल है। त्रिफला घृत को शुद्ध घी और त्रिफला चूर्ण से तैयार किया जाता है। इसका उपयोग नेत्र रोगों के लिए, दृष्टि में सुधार के लिए और चश्मे की आवश्यकता को कम करने के लिए भी किया जाता है।

त्रिफला रसायन

आयुर्वेद में, रसायन चिकित्सा एक महत्वपूर्ण अंग है। त्रिफला रसायन उन रसायन औषधियों में से एक है, जो शरीर में पुनर्योजी कार्रवाई करता है। त्रिफला वास्तव में शरीर के हर अंग पर काम करता है, रुकावट को कम करता है, और प्रत्येक अंग के प्राकृतिक कार्यों को पुनर्स्थापित करता है। यह शरीर से टोक्सिन को बाहर निकल देता है और रोगों की प्रवृत्ति कम कर देता है।

वैज्ञानिक अनुसंधान अध्ययनों से यह भी पता चला है कि त्रिफला में इम्मुनोस्टिमुलेटरी गुण हैं जिससे यह रोग प्रतिरोधक शक्ति बढाता है।

त्रिफला रसायन के लाभ

  1. पेट की बीमारियों को रोकता है
  2. दृष्टि में सुधार करता है
  3. मोतियाबिंद को रोकता है
  4. त्वचा रोगों को रोकता है
  5. बालों को बढ़ाता है और बालों के अच्छा रसयान है
  6. मुक्त कणों (oxidants) से लड़ता है
  7. पोषक तत्वों के पाचन और अवशोषण में सुधार लता है
  8. विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है
  9. रोग प्रतिरोधक शक्ति में सुधार करता है और रोगों से बचाता है
  10. त्वचा में सेल्युलाईट कम करता है
  11. आँतों की अतिरिक्त वसा को कम कर देता है

निर्माणकर्ता एवं ब्रांड

  • डाबर त्रिफला चूर्ण

संदर्भ