उद्वर्तन आयुर्वेदिक चूर्ण मालिश

उद्वर्तन(udvartana) : जड़ी बूटियों से तैयार किये गया पाउडर जिसका इस्तेमाल शरीर की मालिश करने के लिए किया जाता है उसको उद्धार्थनं कहा जाता है।  आयुर्वेदिक विशेष्यज्ञों  दुआरा उद्वर्तन को सबसे एच मालिश का तरीका बताया गया है। उद्वर्तन एक आयुर्वेदिक पाउडर के रूप में के  रूप  में  होता है। उद्वर्तन पाउडर को बनाने के लिए जड़ी बूटियों  का प्रयोग  किया जाता है।इसका इस्तेमाल करने के लिए इसको तेल में मिला कर  मिला कर शरीर की मालिश करने के लिए किया जाता है। इसके इस्तेमाल करने से रंगत बढ़ती है होर बड़ा हुआ मोटापा भी कम किया जाता है।उद्वर्तन के अन्य फायदे यह हैं की यह त्वचा के  रंग को निखारे, त्वचा छूटना, तनाव से राहत और विश्राम करने में मदद करता है।

उद्वर्तन की किस्में(udvartana types)

पाउडर मालिश के अनुसार उद्वर्तन दो तरह की होती है :

  1. स्निग्धऔरस्नेह  (मरहम या तैलीय)
  2. रुक्ष (ruksha udvartana):

स्निग्ध  उद्वर्तन (snigadh udvartana): स्निग्ध  एक तरह की पाउडर मालिश है जो की जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करके बनाया जाता  है  इसके पेस्ट को तैयार करने के लिए औषधीय तेल का प्रयोग किया जाता है।इसके पेस्ट को शरीर पर अच्छे  से रगड़ा जाता है। इसका इस्तेमाल करने से रंगत में निखार आता है साथ में चेहरे पे चमक आती है। यह त्वचा सम्बंदि रोगों को ठीक करता है और युवा रखने में मदद भी करता है।चरक संहिता के अनुसार यह उद्वर्तन कमजोर लोगों के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद है। यह उन लोगों के लिए भी लाभकारी है जो सुखी जड़ी बूटियों की मालिश नहीं से सकती क्योंकि उनकी त्वचा कोमल होती है।

रुक्ष  (ruksha udvartana): रुक्ष उद्वर्तन को सुखी हुई जड़ी बूटियों से तैयार किया गया है। यह  देखने में भी काफी  सूखा दिखाई देता है।  इसको त्वचा पर रगड़ा जाता है। यह  बढ़े हुए कफ को कम करने में मदद करता है। इसका इस्तेमाल करने से बड़ा हुआ मोटापा भी कम होता है। यह मधुमेह के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद है। चरक संहिता के अनुसार रुक्ष उद्वर्तन मोटे लोगों के लिए बहुत ज्यादा लाभकारी है।

सुश्रुत संहिता के अनुसार : सुश्रुत संहिता के अनुसार पाउडर मालिश को तीन श्रेणियों में बांटा गया है :

1.उत्सादन

2.उद्घर्षण

3.उद्वर्तन

उत्सादन:उत्सादन और उद्वर्तन दोनों ही एक सम्मान हैं। दोनों को ही तैयार करने के लिए तेल के साथ जड़ी बूटियों को मिला कर पेस्ट तैयार किया जाता है। उत्सादन के फायदे बिलकुल  ही उद्वर्तन के जैसे ही हैं।

उद्घर्षण

उद्घर्षण और  रुक्ष  उद्वर्तन  एक सम्मान हैं। सुश्रुत संहिता के अनुसार  उद्घर्षण  उद्वर्तन में पाए जाने वाले तत्व के बारे में बताया गया है जिसमे ईंट पाउडर और रीठा पाउडर इत्यादि भी मौजूद हैं। यह कोमल त्वचा वालों के लिए फायदेमंद नहीं हैं क्योंकि  इसमें पाए जाने वाले ईंट पाउडर को रगड़ने से मुँह पर निशान भी  पड़ सकते हैं जो  की  जले  हुए  निशान के जैसे लगते हैं। इसमें ईंट पाउडर की जगह त्रिफला या रीठा  पाउडर  को मिला लें क्योंकि वो ईंट पाउडर की तरह नहीं होते और न ही त्वचा को नुक्सान पहुंचते हैं।

उद्वर्तन :सुश्रुत के अनुसार इसमें पाई जाने वाली जड़ी बूटियों में शरीर की शक्ति बढ़ाने के साथ साथ मोटापा कम करने की भी शक्ति शामिल होती है। इसको बनाने के लिए जड़ी बूटियों और औषधीय तेल का इस्तेमाल किया जाता है जैस की उत्सादन और स्निग्ध में किया जाता है।

उद्वर्तन पाउडर सामग्री :

आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का चयन :जड़ी बूटियों को चुनने के समय यह ध्यान रखें की मालिश वाले व्यक्ति की त्वचा  किस तरह की है। यहाँ कुछ जड़ी बूटियों के बारे में बताया गया है।

वजन कम करने के लिए जड़ी बूटियां (कफ वाले व्यक्तियों के लिए )

त्रिफला पाउडर :त्रिफला पाउडर मवीं वजन कम करने की क्षमता होती है। इसका इस्तेमाल करने से  मोटापा कम होता है। त्रिफला पाउडर अंदरूनी तौर से तो वजन कम करता ही है परंतु इसका इस्तेमाल मालिश के रूप से करने से भी मोटापा कम होता है। त्रिफला पाउडर बनाने के लिए निम्नलिखित तत्व चाहिए होतें हैं :

1.एम्ब्लिका ओफ्फिसिनालिस -अम्लाकी (आंवला  और गूसबेरी ) (Emblica  officinalis – Amalaki      )

2.टर्मीनालिया बेलिरिका -बिभीतकी      (Terminalia Bellirica – Bibhitaki)

3.टर्मीनालिया चेबुल -हरीतकी (Terminalia Chebula – Haritaki)

इन तीनो तत्वों को बिलकुल  बराबर मात्रा में लेना है।

कफ वाले लोगों के लिए एक ख़ास फार्मूला इस प्रकार है :

तत्व मात्रा
आमला 20%
बहेड़ा (बिभीतकी) 20%
हरड़ (हरीतकी) 20%
रीठा 10%
पुष्करमूल 5%
सोंठ 5%
वचा 5%
काली मिर्च 5%
पिप्पली 5%
यव  चूर्ण 5%

इसमें जितने भी तत्व बताये गए हैं यह सब ज्यादातर उद्वर्तन में मालिश के लिए इस्तेमाल किये जातें है जो की शरीर में से मोटापा कम करने  में सहायक होतें है।

वजन कम करने के लिए (पित्त वाले लोगों के लिए ):पित्त वाले लोगों के लिए वजन कम करने के लिए मसाज पाउडर को बनाने के लिए नीचे दिए गए तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है :

तत्व मात्रा
नागरमोथा 50%
यव  चूर्ण 20%
आमलकी 15%
तगर 5%
हरीतकी 5%
 गोटू  कोला  – मंडूकपर्णी 5%

वजन घटाने के लिए प्राचीन शास्त्रीय फार्मूले :

1.कोलाकुलाथड़ी  चूर्णम (Kolakulathadi Choornam)

2.कोट्टामचुक्कड़ई  चूर्णम (Kottamchukkadi Choornam)

रंगत निखारने के लिए हर्बल फार्मूला:

तत्व मात्रा
आमलकी 15%
यष्टिमधु 15%
गुलाब की पत्तियां 15%
नीम 10%
सारिवा 10%
सफ़ेद  चन्दन 10%
लाल चन्दन 10%
उशिरा 10%
हल्दी 5%

इन सब चीजों  को अच्छे  से मिक्स करके इनका एक हर्बल पाउडर तैयार कर लें। इस पाउडर से मुह पर मसाज करने से त्वचा का रंग निखरता है। इसमें  चंदनादि  तेल , चन्दन  मसाज तेल  और  कुंकुमड़ी  तेल को भी मिला कर लगाने से त्वचा और भी निखरती हैं।

उद्वर्तन में इस्तेमाल किये जाने वाले औषधीय तेल :

तेल  का इस्तेमाल त्वचा को और बीमारी को ध्यान में  रख कर किया जाता है।

वजन कम करने के लिए:

  1. त्रिफला तेल (Triphala Oil)
  2. कोट्टामचुक्कड़ई थैलाम( Kottamchukkadi Thailam)
  3. धन्वन्ताराम थैलाम(Dhanwantharam Thailam)
  4. कार्पसस्थ्यडि थैलाम  (Karpasasthyadi Thailam)
  5. लवण तेल (Lavana Oil)

रंगत  निखारने  के :

  1. चंदनादि  तेल (Chandanadi oil)
  2. चन्दन  मसाज तेल (Sandalwood Massage Oil)
  3. कुंकुमड़ी तेल (Kumkumadi Oil)
तत्व मात्रा
जैतून का तेल या तिल का तेल 100 मिलीलीटर
हल्दी पाउडर  एक चुटकी
चन्दन का तेल 5 मिलीलीटर


बनाने
की विधि :

  1. 100 मिलीलीटर जैतून का तेल या शीशम का तेल लें।
  2. अब  इसको गर्म करें और इसमें एक चुटकी हल्दी पाउडर को मिला लें।
  3. इसको ठंडा करने के लिए रख दें और इस तेल को एक खाली जार में दाल लें।
  4. अब इसमें 10 मिलीलीटर चन्दन का तेल मिलाएं।
  5. सब को अच्छे से मिला लें और इसको मसाज करने के लिए इस्तेमाल करें।

यह त्वचा को निखरता है और दाग धब्बों को दूर करता है।

उद्वर्तन तकनीक और प्रक्रिया: आयुर्वेदिक उद्वर्तन तकनीक का इस्तेमाल करने से त्वचा के अंदर की सेल्युलाईट ठीक हो जाती है। उद्वर्तन एक पाउडर के रूप में होता है जिसका उपयोग त्वचा पर मालिश के लिए किया जाता है। इसका इस्तेमाल सात तरीकों से शरीर की मालिश करने के लिए किया जाता है। पाउडर मालिश करने के लिए सूखी या गीली  औषधीयों का इस्तेमाल किया जाता है। इसको थेरपिस्ट दुआरा 20 से 45मिनट तक किया जाता है।

स्निग्ध  उद्वर्तन  तकनीक :

1.स्निग्ध उद्वर्तन तेल मालिश है जो की सिर,चेहरे ,पीठ ,छाती,बाजू ,टांगो के लिए की  जाती है।

2.इसका पेस्ट बनाने के लिए इसमें तेल को मिलाया जाता है फिर पूरी त्वचा पर लगाया जाता है।

3.इस पेस्ट को हाथों  से  कंधो तक रगड़ा जाता है,पीठ के नीचे  से   गर्दन तक अच्छे  से मालिश की जाती है।

4.इसको उप्र की तरफ भी दबाब डालते हुए रगड़ा जाता है ।

5.इस हर्बल पेस्ट को पेट पर भी रगड़ा जाता है। इसको पेट के आस पास के हिस्सों में गोलाकार तरीके से रगड़ा जाता है।

रुक्ष  उद्वर्तन  तकनीक :

  1. रुक्षउद्वर्तन एक पाउडर के रूप में होता है जो की जड़ी बूटियों से बनाया गया है।
  2. बाकी यह पूरास्निग्ध  उद्वर्तन  तकनीक की तरह ही है।

स्वयं मालिश तकनीक :

(घर पर पाउडर मालिश करने का तरीका)

1.पुरे शरीर की मालिश गर्म शीशम तेल या जैतून के तेल से करें।

2.हर्बल पाउडर की जितना आप ज्यादा से सकते हैं उतने प्रेशर में लगाएं। अगर आपकी त्वचा नाजुक है तो आप तेल शीशम  के तेल   और जैतून के तेल को पेस्ट बना कर इस्तेमाल कर सकते हैं।

3.आपको अपने हाथो  से कंधो तक मालिश करनी है।

4.इस  मालिश  को आप चर्बी वाली जगह पर भी रगड़ सकते हैं।

5.आपको  नियमित  मालिश से उलटी दिशा की तरफ मालिश करनी है। जैसे की पीठ से लेके गर्दन तक।

इसके बाद आपको पुरे शरीर पर भाप लेनी है। अगर आप भाप नहीं ले सकते तो आपको गर्म पानी से नहाना है। आप अधिक चर्बी वाले हिस्सों पर गर्म पैड भी रख सकतें हैं।

उद्वर्तन के चिकित्स्य संकेत :

  1. मोटापा -चर्बी को कम करने के लिए
  2. उदर मोटापा
  3. अधिक वजन कम करने के लिए
  4. सेल्युलाईट टूटने
  5. वजन कम करने के लिए त्वचा को ढीलेपन से बचाना
  6. बच्चे के जनम के  बाद वजन का बाद जाना
  7. मासपेशियों में कमजोरी
  8. मधुमेह
  9. गठिया की  वजह  से  जोड़ों  दर्द को घटाए
  10. त्वचा को निखरे और मृतक कोशिकायों को हटाये
  11. पक्षाघात
  12. रक्त वाहिकाओं मूल के स्केलेरोसिस
  13. कफ मूल के कटिस्नायुशूल

उद्धार्थनं के लाभ: उद्धार्थनं  चेहरे की रंगत को निखारे ,यह चर्बी को कम करने के लिए भी काम आता है। उद्वर्तन का इस्तेमाल करने से चेहरे की मृतक कोशिकाएं हैट जाती है और दाग धब्बे भी साफ़ हो जातें हैं।

सेल्युलाईट और मोटापा कम करने के लिए : उद्वर्तन सेल्युलाईट और मोटापे को कम करनेमें सहायक है। जिन लोगों का वजन बहुत ज्यादा हो गया है  उनके लिए यह तकनीक बाहत ही फायदेमंद है। इससे बढ़ी हुए मोटापे को कण्ट्रोल में किया जा सकता है।

पेट  की   चर्बी  घटाए :उद्वर्तन पेट की चर्बी को कम करने में मदद करता है। इसका इस्तेमाल करने से अंदरूनी हिस्से में जो चर्बी जमा होती है वो साड़ी मालिश करने से बहार निकल जाती है और वजन कम हो जाता है।

रहेयूमेटॉइड गठिया : उद्वर्तन कफ और ए ऍम ए को कम करता है। उद्वर्तन   तकनीक  का इस्तेमाल करने से गठिया के रोग में भी लाभ मिलता है जिसमें  ए ऍम ए को कम करना मुख काम होता है। कई बार अगर पाउडर मालिश अगर ज्यादा जोर लगा कर की जाए तो यह दर्द बड़ा भी देता है इसलिए चिकित्सिक की सलाह अनुसार ही इसको करें। रुक्ष उद्वर्तन का इस्तेमाल सूजन कम करने के लिए किया जाता है। यह  बहु ही लाभकारी है। परंतु  अगर  सूजन  से जोड़ों का रंग लाल हो गया है तो स्निग्ध  तकनीक  का इस्तेमाल करना लाभदायक है।

शरीर की जकड़न:यह शरीर की जकड़न को ठीक करता है और छिद्रों को खोलने में मदद भी करता है। यह त्वचा को तेल सोखने में मदद करता है।

त्वचा की रंगत को निखारे :उद्वर्तन का इस्तेमाल करने से चेहरे से सम्बंदित रोग ठीक हो जातें है। यह चेहरे के दाग धब्बों को मिटाने में लाभकारी है। इसके इस्तेमाल से  चेहरे का रंग और भी निखरता है। जो तत्व उद्वर्तन को बनाने के लिए प्रयोग किये जाते हैं वह उप्पेर बताये गए हैं।

विषाक्त पदार्थ हटाये :उद्वर्तन का इस्तेमाल करने से विषाक्त पदार्थ  हट जातें है। उद्वर्तन एक ऐसी थेरेपी है जो की शरीर को साफ़ रखने में मदद करती है और विषैले पदार्थों को बहार निकालती है। यह शरीर को काफी बिमारियों से बचाती है। उद्वर्तन शरीर के अंदर  विषैले पदार्थों को जमा होने से रोकती है।

चमड़ी को पपड़ी(exfoliate) से बचाये :उद्वर्तन शरीर को कई बिमारियों से बचत है। इसको पाउडर मालिश के रूप में   इस्तेमाल करने से त्वचा पर पपड़ी नहीं जमती है और रंग साफ़ होता है।

खून संचार को बढ़ाये :उद्वर्तन पाउडर मालिश खून के संचार को बढ़ाती है।

स्पर्श भावना को पुनर्जीवित :उद्वर्तन स्पर्श भावना को पुनर्जीवित करने में मदद करता है।

तनाव कम करे कायाकल्प हेतु : यह तनाव को कम करने में बहुत ही लाभकारी है।

मतभेद:

आयुर्वेदिक मालिश पाउडर निम्नलिखित परिस्थितियों में इस्तेमाल  नहीं करना हानिकारक होता है :

  1. सूखी त्वचा
  2. जला या घाव हो
  3. एग्ज़ीमा
  4. सोरायसिस
  5. गर्भावस्था दौरान
  6. 10 साल तक की उम्र बच्चों के
  7. पंचकर्म विषहरण के बाद

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