वणर्य द्रव्य या औषधि

varny

आयुर्वेद में त्वचा के वर्ण में सुधार लाने वाली और चमक बढ़ाने वाली औषधि को वणर्य कहा जाता है। यह शरीर के रोगों के कारण विकृत हुए वर्ण को द्वारा प्राकृतिक करने में सहायक होती है। इसका प्रभाव भ्राजक नामक पित्त पर पड़ता है। इसकी वृद्धि अथवा हानि त्वचा के प्राकृतिक वर्ण में परिवर्तन कर देती है जो वणर्य औषधिओं पुनः प्राकृतिक किया जा सकता है।

विकृत पित्त, क्षीण पित्त, वृद्ध पित्त (Pitta), विकृत वात (Vata) या विकृत कफ (Kapha) के कारण शरीर के वर्ण या रंग में कई तरह के परिवर्तन हो सकते है जैसे कि वर्ण का काला होना, नीला होना, लाल होना, सफ़ेद होना आदि। इन सभी पर वणर्य द्रव्य या औषधि अच्छा काम करती है। हालांकि दोष अनुसार वणर्य औषधि का चुनाव करना आवश्यक है।

वणर्य द्रव्य या औषधि का रोगों में प्रयोग

वणर्य द्रव्य या औषधि निम्नलिखित रोगों में लाभदायक है:

  1. त्वचा के दाग धब्बे
  2. चेहरे का रंगहीन होना
  3. काले दाग
  4. छाईआं या व्यंग – Blemishes
  5. नीलिका

वणर्य द्रव्यों की उदारहण

निम्नलिखित द्रव्यों में वणर्य गुण मंजूद है:

  • मंजीठ (मंजिष्ठा)
  • हल्दी
  • चन्दन
  • सारिवा
  • दारुहल्दी
  • आंवला
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