यशद भस्म के लाभ, औषधीय प्रयोग, मात्रा एवं दुष्प्रभाव

यशद (जसद) भस्म (Yashad/Jasad Bhasma) एक खनिज आधारित और प्रतिरक्षा-संशोधक आयुर्वेदिक औषधि है। यह आयुर्वेदिक जस्ता पूरक भी है जिसका उपयोग जस्ते की कमी, धीमी गति से घाव भरने, बच्चों के अवरुद्ध विकास और दस्त में किया जाता है।

यशद भस्म प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रोत्साहन देता है और बार बार होने वाली सर्दी और कान के संक्रमण का उपचार करने में मदद कर सकता है। यह श्वसन संक्रमण को भी रोकता है। आयुर्वेद में, इसका उपयोग मलेरिया और अन्य परजीवी रोगों के लिए किया जाता है।

आयुर्वेदिक आँखों के ड्रॉप्स (ayurvedic eye drops) के साथ, यशद भस्म आँख की मैक्यूला के व्यपजनन (macular degeneration), रतौंधी, मोतियाबिंद के लिए लाभदायक है। यह अस्थमा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और एड्स के मामलों में भी मदद कर सकता है। इसका उपयोग त्वचा रोगों में भी किया जाता है विशेषकर मुँहासे, खुजली और अपरस में।

घटक द्रव्य

यशद (जसद) भस्म का निर्माण करने के लिए शुद्ध जस्ते का उपयोग किया जाता है।

इस भस्म को बनाने के लिए शुद्ध जस्ते को एलो वेरा रस के साथ संसाधित किया जाता है।

रासायनिक संरचना

यशद (जसद) भस्म में शुद्ध और निस्तापित जस्ता होता है। यह इसके छोटे आकार के कणों और नैनोकैमिस्ट्री के कारण एक अत्यधिक अवशोषित होने वाला जस्ता पूरक है।

औषधीय गुण

यशद (जसद) भस्म में निम्नलिखित उपचार के गुण हैं।

  1. अम्लत्वनाशक
  2. दाह विरोधी
  3. गठिया नाशक
  4. ज्वरनाशक
  5. पाचन उत्तेजक
  6. रक्तकणरंजक (हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाता है)
  7. हेमेटोजेनिक (लाल रक्त कोशिकाओं के गठन में मदद करता है)

चिकित्सीय संकेत

यशद (जसद) भस्म का प्रयोग निम्नलिखित रोगों में किया जाता है।

सामान्य परिस्थितियां

  • ज्वर
  • जीर्ण ज्वर
  • ज्वर के बाद सामान्य दुर्बलता
  • जीर्ण या लम्बी बीमारी के बाद शारीरिक कमजोरी
  • जस्ते की कमी
  • बच्चों को बहुत अधिक दस्त होना
  • घाव धीमे भरना
  • बार बार होने वाली सामान्य सर्दी
  • बार बार होने वाला कान का संक्रमण
  • मलेरिया
  • मधुमेह

मस्तिष्क और तंत्रिकाएं

  • स्मरण शक्ति की क्षति
  • ध्यान अभाव सक्रियता विकार (ADHD)
  • अल्जाइमर रोग
  • पार्किंसंस रोग
  • सिर की गंभीर चोटें

नेत्र

  • आँख की मैक्यूला का व्यपजनन
  • रतौंधी
  • मोतियाबिंद

कान

  • टिन्निटस (कर्णक्ष्वेड) (कान में घंटियां बजना)

ह्रदय और रक्त

  • उच्च रक्त चाप
  • रक्ताल्पता
  • लाल रक्त कोशिका रोग (Sickle cell disease)

फेफड़े और श्वास नलिका

  • दमा
  • मौसमी संक्रामक ज़ुकाम
  • हल्का श्वसन संक्रमण

पाचन स्वास्थ्य

  • मुँह में जलन के लक्षण
  • हाइपोग्यूसिया – स्वाद लेने की कम क्षमता
  • क्रोहन रोग
  • सव्रण बृहदांत्रशोथ
  • पाचक व्रण
  • क्षुधामान्द्य
  • भूख में कमी
  • यकृत विकारों से जुडी मांसपेशियों की ऐंठन

मांसपेशियां, हड्डियां और जोड़

  • कमजोर हड्डियां (osteoporosis)
  • संधिशोथ
  • मांसपेशियों में ऐंठन
  • जोड़ों को घेरने वाली पेशियों में तेज दर्द

त्वचा और बाल

  • मुँहासे
  • अपरस
  • खुजली
  • समयपूर्व बाल सफ़ेद होना
  • समय से पहले त्वचा पर झुर्रियां आना
  • दाद
  • घाव

पुरुष स्वास्थ्य

  • पुरस्थ ग्रंथि में अतिवृद्धि (BPH)
  • पुरुष बांझपन
  • स्तंभन दोष (ED)

अन्य

  • शारीरिक सहनशक्ति, एथलेटिक प्रदर्शन और शारीरिक शक्ति में सुधार के लिए

औषधीय उपयोग और लाभ

यशद भस्म जस्ते की कमी, गले, आँखें, श्वसन तंत्र, हृदय, रक्त और पाचन तंत्र से संबंधित रोगों के उपचार के लिए लाभदायक है। यह बहुमूत्ररोग और पुरुषों की समस्याओं में भी अच्छा काम करता है।

यशद भस्म अपने इम्युनो-मॉड्युलेटरी प्रभाव के कारण सभी प्रकार के ज्वर और संक्रमणों में उपयोगी है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाता है और बीमारी से लड़ने में मदद करता है।

सामान्य जुखाम

यशद भस्म में जस्ता होता है, जिसके प्रभाव का अध्ययन जुखाम के लक्षणों की गंभीरता को रोकने और घटाने के लिए किया गया है। इस प्रकार, यशद भस्म आम सर्दी के लक्षण कम कर देता है।

संक्रमण की अवधि या लक्षणों की गंभीरता को कम करने के लिए सामान्य जुखाम के लक्षणों की शुरुआत के 24 घंटे के भीतर इसका उपयोग किया जाना चाहिए। जस्ता पूरक बच्चों में बार बार जुखाम होने की घटनाओं में कमी लाता है।

इसलिए, हम बार बार होने वाली आम सर्दी या मौसमी फ्लू से पीड़ित बच्चों के लिए यशद भस्म का उपयोग रोगाणु चिकित्सा उपचार के रूप में भी कर सकते हैं। सितोपलादि चूर्ण के साथ यशद भस्म का मिश्रण लगभग सभी प्रकार के वायरल संक्रमण के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार कर सकता है।

गले में खराश और टौंसिल या गलसुओ की सूजन

कई जीवाणु और रोगाणु के कारण गले में खराश और टौंसिल या गलसुओ की सूजन हो सकती है। जब गले में लाली, सूजन और दर्द हो तो यशद भस्म का उपयोग किया जाता है। हालांकि, जब गले में लाली और सूजन की जगह सफ़ेद पपड़ी या परत दिखाई दे तो यह प्रभावी नहीं हो सकता है। इसका उपयोग सितोपलादि चूर्ण, प्रवाल पिष्टी और तुलसी के साथ किया जाता है।

टौंसिल या गलसुओ की सूजन के लिए अच्छा आयुर्वेदिक चिकित्सा संयोजन

औषधि खुराक
सितोपलादि चूर्ण 2 ग्राम
यशद भस्म 100 मिलीग्राम
गंधक रसायन 500 मिलीग्राम

इसे शहद के साथ, दिन में तीन बार 7 दिनों के लिए या सभी लक्षणों की समाप्ति तक लेना चाहिए। यदि रोगी को बार बार टॉन्सिलिटिस का सामना करना पड़ रहा है, तो इस संयोजन को कम से कम तीन महीने तक लेना चाहिए।

आँख आना (नेत्रश्लेष्मलाशोथ)

यशद भस्म नेत्रश्लेष्मलाशोथ की सूजन में अच्छा काम करता है। यह संक्रमण, सूजन, लालिमा, खुजली और आँखों में पानी आने के लक्षणों को काम कर देता है।

मुँह में जलन के लक्षणों के लिए आयुर्वेदिक उपचार

मुँह में जलन के लक्षण जस्ते की कमी के कारण होते हैं। इस रोग के सबसे आम लक्षण मुँह में जलन, अधिक प्यास लगना, शुष्क मुंह, धातु या कड़वा स्वाद और स्वाद की कमी हैं। यशद भस्म इन सभी लक्षणों को कम कर सकता है और मुँह में जलन के लक्षणों का उपचार करने में मदद कर सकता है।

पेट में व्रण, सव्रण बृहदांत्रशोथ और क्रोहन रोग

जस्ता पूरक का प्रभाव आमाशय व्रण, पाचक व्रण, सव्रण बृहदांत्रशोथ और क्रोहन रोग पर पड़ता है। यह व्रण के उपचार की प्रक्रिया को तेज करता है और इन रोगों में सूजन कम कर देता है।

आयुर्वेद में, आमतौर पर यशद भस्म का उपयोग इन रोगों के उपचार के लिए किया जाता है। हालांकि, यह अकेले प्रभावी नहीं होता है। इसका उपयोग मुलेठी (Mulethi), वंशलोचन (vanshlochan) और गिलोय सत्व (Giloy Satva) के साथ किया जाता है।

मधुमेह

मधुमेह के रोगियों में सीरम जस्ता संकेंद्रण कम हो सकता है। जस्ता पूरक ग्लाइसेमिक नियंत्रण में सुधार और HbA1c प्रतिशत में कमी करता है।

जस्ते का अग्न्याशय में इंसुलिन स्रावित कोशिकाओं पर सुरक्षात्मक प्रभाव भी होता है। इस प्रकार, यह कोशिकाओं का और अधिक नुकसान होने से रोकने में मदद करता है और मधुमेह में स्वास्थ्य को सुधारता है। आयुर्वेदिक औषधियों में, यशद भस्म (जस्ता) मधुमेह विरोधी उपचारों (anti-diabetic remedies) के लिए एक आम घटक है।

टिनिटस के लिए आयुर्वेदिक उपचार

यशद भस्म 125 मिलीग्राम
शतावरी 1000 मिलीग्राम
सरीवादि वटी 500 मिलीग्राम (गंभीर मामले में 1000 मिलीग्राम) – (पिसी हुई 4 गोलियां)

इन सभी को मिला लें और इसे दिन में दो बार गुनगुने दूध के साथ लें। यदि आप सिर में जलन महसूस कर रहे हैं तो आप ऊपर बताये गए इस मिश्रण को लाल चंदन के काढ़े के साथ भी ले सकते हैं।

इस उपाय के साथ आपको दिन में एक बार प्रत्येक कान में बिल्वादि तेल की 2 बूंदों का उपयोग करने की आवश्यकता भी होती है।

पित्ती

आयुर्वेद में, यशद भस्म का उपयोग पित्ती के उपचार में किया जाता है। यह खुजली और लाल धब्बे को कम कर देता है। कुछ आयुर्वेदिक लोशन जिनका उपयोग पित्ती के उपचार में किया जाता है, उनमें यशद भस्म एक घटक के रूप में होती है।

यशद भस्म का पूरक उपयोग

निम्नलिखित रोगों में जस्ते का स्तर जस्ते के कम अवशोषण या जस्ते की कमी के कारण कम हो सकता है।

  1. मधुमेह
  2. हीमोडायलिसिस (Hemodialysis )
  3. एड्स
  4. संधिशोथ

यशद भस्म इन रोगों में रोगियों के स्वास्थ्य में सुधार लाता है।

खुराक

औषधीय मात्रा (Dosage)

शिशु 10 मिलीग्राम से 20 मिलीग्राम
बच्चे(5 वर्ष की आयु से ऊपर) 10 मिलीग्राम से 20 मिलीग्राम
वयस्क 15 मिलीग्राम से 250 मिलीग्राम
गर्भावस्था 40 मिलीग्राम
अधिकतम संभावित खुराक प्रति दिन 500 मिलीग्राम

सेवन विधि

दवा लेने का उचित समय (कब लें?) खाना खाने के तुरंत बाद लें
दिन में कितनी बार लें? 2 बार – सुबह और शाम
अनुपान (किस के साथ लें?) समान मात्रा गुनगुने पानी के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) चिकित्सक की सलाह लें

वस्तुतः, सबसे सुरक्षित खुराक प्रतिदिन लगभग 40 मिलीग्राम है। हमारे अनुभव के अनुसार, गले में खराश और दूसरे संक्रमणों में भी यशद भस्म की दिन में दो बार 20 मिलीग्राम की खुराक अच्छी तरह से काम करती है। इसलिए, इसकी खुराक बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है।

कुछ मामलों में, आपका चिकित्सक इस खुराक में वृद्धि कर सकता है। लेकिन इसे दीर्घकाल या एक सप्ताह से अधिक समय के लिए जारी नहीं रखा जाना चाहिए।

मधुमेह में, अग्न्याशय की क्रियाओं को सुरक्षित रखने के लिए प्रति दिन 10 मिलीग्राम से 20 मिलीग्राम तक की खुराक पर्याप्त है।

सावधानी और दुष्प्रभाव

अधिकतर लोगों के लिए यशद भस्म संभवतः सुरक्षित है। हालांकि, यह एक नियमित औषधि नहीं है। आयुर्वेद में उच्च खुराक का उपयोग किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप निम्न दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

  1. मतली
  2. उल्टी (दुर्लभ)
  3. धात्विक स्वाद (यशद भस्म के साथ बहुत दुर्लभ है, लेकिन अन्य जस्ता पूरक के साथ सामान्य)
  4. गुर्दों की क्षति
  5. पेट की क्षति
  6. थकान
  7. पेट दर्द

जैसे की यशद भस्म में जस्ता होता है, इसलिए इसकी अधिक खुराक और दीर्घकालीन उपयोग शरीर में तांबे को अवशोषित करने वाले तंत्र को प्रभावित करके शरीर में तांबे के स्तर को कम कर देता है। इस प्रकार, इसके कारण तांबे की कमी से सम्बंधित रक्ताल्पता हो सकती है।

शिशु और बच्चे

यशद भस्म प्रतिदिन दो बार 20 मिलीग्राम की खुराक में संभवतः सुरक्षित है। यह खुराक अनुशंसित खुराक से पार हो जाने पर असुरक्षित हो सकती है।

गर्भावस्था और स्तनपान

यशद भस्म गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए संभवतः सुरक्षित है। इसकी खुराक प्रति दिन 40 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए।

सूचना स्रोत (Original Article)

  1. Yashad Bhasma Benefits, Uses, Dosage & Side Effects – AYURTIMES.COM

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